UPI Payments : भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब केवल रोजमर्रा के लेनदेन का जरिया नहीं रहेगा, बल्कि यह देश के शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की वास्तविक तस्वीर पेश करने में भी मदद करेगा। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने एक नया प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके तहत UPI डेटा के जरिए यह ट्रैक किया जाएगा कि देश में लोग स्कूल, कॉलेज, कोचिंग और अस्पतालों पर कितना खर्च कर रहे हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य नए 'सेवा उत्पादन सूचकांक' (Index of Services Production) के दायरे को बढ़ाना और आर्थिक गतिविधियों का सटीक अनुमान लगाना है।
UPI भुगतान से पता चलेगा देश का हाल: स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों के खर्च पर सरकार की नजर
सेवा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में शिक्षा और स्वास्थ्य की भूमिका
देश के सर्विस सेक्टर में शिक्षा और स्वास्थ्य का बहुत बड़ा योगदान है। भारत के सेवा क्षेत्र के कुल मूल्य वर्धन (GVA) में इन दोनों क्षेत्रों की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से अधिक है। इसमें अकेले शिक्षा क्षेत्र का योगदान 7.2 प्रतिशत है, जबकि स्वास्थ्य और आवासीय देखभाल सेवाओं की हिस्सेदारी लगभग 3 प्रतिशत है। हालांकि, बड़े पैमाने पर योगदान देने के बावजूद अब तक इन क्षेत्रों में होने वाले मासिक खर्च का सटीक और त्वरित डेटा उपलब्ध नहीं हो पाता था।
फीस से लेकर कोचिंग तक का हिसाब
प्रस्तावित योजना के अनुसार, निजी शिक्षा के क्षेत्र में गतिविधियों को मापने के लिए UPI के मर्चेंट कैटेगरी कोड (MCC) का सहारा लिया जाएगा। इसके जरिए प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों और ऑनलाइन/पत्राचार कोर्सों में होने वाले डिजिटल भुगतान को अलग-अलग श्रेणी में वर्गीकृत किया जाएगा। वर्तमान में उच्च शिक्षा और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का डेटा केवल वार्षिक आधार पर ही मिल पाता है। UPI डेटा से इस मासिक कमी को दूर किया जाएगा और लेनदेन के मूल्य को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-शिक्षा) से समायोजित कर वास्तविक गतिविधियों का आंकलन होगा।
अस्पताल और डॉक्टरों की फीस का डेटा भी होगा दर्ज
स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में भी यही मॉडल लागू करने की तैयारी है। UPI के मर्चेंट कोड की मदद से अस्पतालों, डॉक्टरों, क्लीनिकों, दंत चिकित्सकों, लैब, ऑप्टोमेट्रिस्ट और अन्य स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों को किए गए भुगतान का डेटा एकत्र किया जाएगा। इस आंकड़े को CPI-हेल्थ (स्वास्थ्य महंगाई दर) के जरिए संतुलित करके यह समझा जाएगा कि निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में वास्तविक रूप से कितनी गतिविधि या खर्च बढ़ा है।
सरकारी और निजी खर्च का अलग-अलग होगा आंकलन
सेवा क्षेत्र की सटीक गणना के लिए MoSPI ने इस सूचकांक को दो हिस्सों सरकारी और निजी में बांटने का सुझाव दिया है। निजी और घरेलू खर्च को मापने के लिए UPI डेटा का इस्तेमाल होगा, जबकि सरकारी सेवाओं के आंकलन के लिए पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) के माध्यम से किए गए सरकारी खर्च का उपयोग किया जाएगा। यह विभाजन इसलिए जरूरी है क्योंकि शिक्षा क्षेत्र के कुल GVA का लगभग 65.6 प्रतिशत और स्वास्थ्य क्षेत्र का 42.7 प्रतिशत हिस्सा सरकारी क्षेत्र के पास है।
सेवा उत्पादन सूचकांक का विस्तार और भविष्य की राह
MoSPI ने जुलाई 2026 से आधार वर्ष 2024-25 के साथ सेवा उत्पादन सूचकांक का ट्रायल शुरू किया था। शुरुआती दौर में इसमें बैंक, बीमा, जीएसटी आपूर्ति और परिवहन जैसे 19 उप-क्षेत्र शामिल थे, जो कुल सेवा GVA के 60 प्रतिशत हिस्से को कवर करते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और रक्षा जैसे क्षेत्रों को जीएसटी-छूट और सरकारी घटक अधिक होने के कारण शुरुआत में बाहर रखा गया था। अब UPI डेटा के इस नए प्रयोग से शिक्षा और स्वास्थ्य को जोड़ने के बाद इस सूचकांक का दायरा बढ़कर लगभग 78.4 प्रतिशत हो जाएगा, जिससे देश की आर्थिक स्थिति को समझने में मदद मिलेगी।
