देशभर में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) सेवाओं में बार-बार आ रही रुकावटों को देखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अहम बैठक की। इस दौरान यूपीआई इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और भविष्य में किसी भी तरह की बाधा को रोकने के लिए व्यापक सुधार के निर्देश दिए गए। बैठक में वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक के दौरान यूपीआई इकोसिस्टम की मौजूदा स्थिति और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
हालिया रुकावटों से उपजे हालात
गत एक माह में यूपीआई सेवाएं तीन बार बाधित हुईं — 26 मार्च, 1 अप्रैल और 12 अप्रैल को। इससे करोड़ों उपयोगकर्ताओं और मर्चेंट्स को भुगतान में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
वित्त मंत्री ने साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और वास्तविक समय निगरानी प्रणाली में सुधार करने पर बल दिया। एनपीसीआई को यूपीआई इन्फ्रास्ट्रक्चर को भविष्य के लिए तैयार करने के निर्देश दिए गए। यूजर्स के अनुभव को बेहतर बनाने और ट्रांजेक्शन की निर्बाधता सुनिश्चित करने के प्रयास तेज करने की सलाह दी गई है।
यूपीआई का बढ़ता प्रभाव
वित्त मंत्रालय के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में यूपीआई की औसत वार्षिक वृद्धि दर 72% रही है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में यूपीआई ट्रांजेक्शन का कुल मूल्य 30% बढ़कर 261 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया, वहीं कुल लेन-देन की संख्या 42% बढ़कर 18,586 करोड़ हो गई।
भविष्य की रणनीति
प्रतिदिन 1 बिलियन यूपीआई लेनदेन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इंटरऑपरेबल पेमेंट फ्रेमवर्क के विकास पर जोर दिया गया। यूपीआई के वैश्विक स्तर पर विस्तार की योजना को गति देने की बात कही गई है।
IANS इनपुट के साथ
