ट्रंप को चुभा भारत का ‘राइस किंग’ बनना, 'डंपिंग' की आड़ में टैरिफ बम फोड़ने की तैयारी, समझें क्या होगा असर?

‘इंडियन राइस एक्सपोर्ट्स फेडरेशन’ के आंकड़ों के अनुसार, भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है और वैश्विक बाजार में 28 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। वह शीर्ष निर्यातक भी है, जिसकी 2024-25 में वैश्विक निर्यात में 30.3 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।

भारत को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति समझ से परे है। वह एक तरफ पीएम नरेंद्र मोदी को अपना सबसे अजीत दोस्त और भारत को सबसे बड़ा व्यापार साझेदार बताने से नहीं चूकते हैं। लेकिन, दूसरी ओर वह एक के बाद एक भारत विरोधी फैसले ले रहे हैं। दुनिया की कुछ चुनिंदा देशों पर ट्रंप ने 50% का भारी टैरिफ लगाया है, उनमें भारत भी शामिल है। अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैक्स से भारतीय निर्यातकों को सबसे अधिक नुकसान हो रहा है। अब ट्रंप ने एक बार फिर भारत को नुकसान पहुंचाने वाले बयान दिए हैं। ताजा मामला भारतीय चावल को लेकर है। ट्रंप ने भारतीय चावल पर भारी टैरिफ लगाने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि भारत को अमेरिकी बाजार में चावल ‘डंप’ करना (सस्ते दामों पर बेचना) नहीं चाहिए और वह इस मामले से ‘निपट लेंगे।’ ट्रंप ने चेतावनी दी कि शुल्क (टैरिफ) लगाकर इस ‘समस्या’ का आसानी से हल निकल जाएगा।

चावल निर्यात

चावल निर्यात

चावल पर ट्रंप टैरिफ का क्या है ताजा मामला?

आपको बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ में खेती और कृषि क्षेत्र के प्रतिनिधियों तथा अपने कैबिनेट के प्रमुख सदस्यों खासकर वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और कृषि मंत्री ब्रूक रोलिन्स के साथ एक गोलमेज बैठक की। इस बैठक में ‘केनेडी राइस मिल’ का संचालन करने वाली मेरिल केनेडी ने ट्रंप से कहा कि देश के दक्षिणी हिस्से में चावल उत्पादक ‘वास्तव में संघर्ष कर रहे हैं’ और अन्य देश अमेरिकी बाजार में चावल ‘डंप’ कर रहे हैं। यानी कि बेहद सस्ते दामों पर चावल बेच रहे हैं। जब ट्रंप ने पूछा कि कौन से देश अमेरिका में चावल सस्ते दामों पर बेच रहे हैं तो राष्ट्रपति के बगल में बैठीं केनेडी ने जवाब दिया, भारत और थाईलैंड। ट्रंप ने कहा कि इसे बहुत आसानी से निपटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह उन देशों पर शुल्क लगाकर बहुत जल्दी हल हो जाएगा।

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