Trump Tariff Refund : अमेरिकी सरकार को ट्रंप टैरिफ के तौर पर मिली अतिरिक्त कस्टम ड्यूटी कंपनियों को लौटानी पड़ रही है। अमेरिका के ट्रेजरी विभाग के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मई महीने में ट्रंप प्रशासन ने कंपनियों को 22 अरब डॉलर यानी करीब 2.09 लाख करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगाए टैरिफ को अवैध करार दिया गया और रिफंड का आदेश दिया गया।
टैरिफ पर लगा झटका
क्यों ट्रंप के लिए बड़ा झटका?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रेजरी विभाग की तरफ से कंपनियों से वसूली गई रकम वापस किया जाना ट्रंप के लिए बड़ा झटका है। ट्रंप दावा करते आए हैं कि वे टैरिफ के जरिये अमेरिका को अमीर बना रहे हैं। इसके साथ ही उनका दावा रहा है कि टैरिफ की मदद से अमेरिकी सरकार पर मौजूद कर्ज को कम किया जा सकता है। लेकिन, ट्रेजरी विभाग के मुताबिक मई में ग्लोबल टैरिफ के तौर पर जितनी कस्टम ड्यूटी वसूली गई, करीब उतनी ही रकम रिफंड कर दी गई है। इस तरह अमेरिकी खजाने में टैरिफ से कोई नई राशि नहीं जुड़ी है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
ट्रंप प्रशासन की तरफ से लगाए टैरिफ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अवैध ठहराया था। असल में पिछले वर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अप्रैल में आपातकालीन आर्थिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ग्लोबल टैरिफ का ऐलान किया। इस साल फरवरी में इस टैरिफ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अवैध ठहराया और कहा कि ट्रंप के पास इस तरह की शक्तियां नहीं है कि वे ऐसे टैरिफ लगा सकें। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) को टैरिफ के तौर पर वसूले गए 166 अरब डॉलर कंपनियों को लौटाने का आदेश दिया है।
नए रास्ते निकाल रहे ट्रंप
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एक तरफ जहां ट्रंप प्रशासन ने इस फैसले के खिलाफ अपील दायर कर रखी है। इसकी वजह से अब भी टैरिफ पर कानूनी स्थिति स्पष्ट नही है। वहीं, ट्रंप लगातार नए तरीके आजमा रहे हैं, जिनकी मदद से वे टैरिफ बरकरार रख पाएं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने 10 फीसदी नया टैरिफ लगाया था। इसके अलावा स्टील, एल्युमिनियम और ऑटो कंपोनेंट पर लगाए गए टैरिफ को सुप्रीम कोर्ट ने वैध माना है।
