Innovative Business: एक अमेरिकी कंपनी ने दुनियाभर में रात को सनलाइट डिलीवरी का बिजनेस शुरू किया है। कंपनी करीब 4.60 लाख रुपये प्रति घंटे के हिसाब से अपने कस्टमर की मनचाही जगह पर रात में सूरज की रोशनी डिलीवर करेगी। एक बार सुनने में यह मजाक लगता है। लेकिन, कैलिफोर्निया की एक स्टार्टअप कंपनी Reflect Orbital इस पर 2024 से काम कर रही है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक हाल में ही कंपनी ने बताया है कि रात में एक घंटे रोशनी डिलीवर करने के लिए ग्राहकों को कितनी कीमत चुकानी होगी।
रातें भी रोशन करेगा सूरज
कैसे काम करेगा ‘स्पेस लाइट’ मॉडल
Reflect Orbital लो-अर्थ ऑर्बिट में सैटेलाइट तैनात करने की योजना बना रही है, जिनमें बड़े रिफ्लेक्टिव मिरर लगे होंगे। ये मिरर सूरज की रोशनी को पकड़कर पृथ्वी के चुनिंदा हिस्सों पर भेजेंगे। शुरुआती प्रोटोटाइप में करीब 60 फीट का मिरर होगा, जो लगभग 3 मील चौड़े क्षेत्र को रोशन कर सकेगा। जमीन से यह रोशनी पूर्णिमा के चांद जैसी दिखेगी।
₹4.6 लाख प्रति घंटा
कंपनी इस सेवा को कमर्शियल मॉडल के रूप में पेश करना चाहती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी कीमत करीब 5,000 डॉलर प्रति घंटा यानी लगभग ₹4.6 लाख होगी। यह सेवा उन ग्राहकों के लिए होगी जो सालाना कम से कम 1,000 घंटे का कॉन्ट्रैक्ट लेंगे। इसका सीधा मतलब है कि यह तकनीक बड़े उद्योगों और संस्थानों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है।
ऊर्जा सेक्टर में बड़ा बदलाव संभव
कंपनी का दावा है कि इस तकनीक से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम हो सकती है। खासकर सोलर पावर प्लांट्स को रात में भी रोशनी देकर अतिरिक्त बिजली उत्पादन संभव बनाया जा सकता है। इसके अलावा आपदा प्रबंधन और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है, जहां तुरंत रोशनी की जरूरत होती है।
हजारों सैटेलाइट का नेटवर्क
Reflect Orbital की योजना काफी आक्रामक है। कंपनी 2028 तक करीब 1,000 सैटेलाइट और 2030 तक 5,000 सैटेलाइट तैनात करना चाहती है। भविष्य में यह संख्या 50,000 तक पहुंचाने का लक्ष्य है। बड़े मिरर 180 फीट तक के हो सकते हैं, जो कई गुना अधिक रोशनी देने में सक्षम होंगे।
वैज्ञानिक चिंतित
इस प्रोजेक्ट को लेकर वैज्ञानिकों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। खगोल वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे टेलिस्कोप ऑब्जर्वेशन प्रभावित होंगे। वहीं, जीवविज्ञान विशेषज्ञों के अनुसार, रात में कृत्रिम रोशनी बढ़ने से इंसानों और जानवरों की जैविक घड़ी पर असर पड़ सकता है। पौधों और वन्यजीवों के व्यवहार में भी बदलाव की आशंका जताई गई है।
व्यवहारिकता पर सवाल
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि एक सैटेलाइट से मिलने वाली रोशनी बेहद सीमित होगी और दिन जैसा उजाला पाने के लिए हजारों सैटेलाइट की जरूरत पड़ेगी। इससे लागत और तकनीकी जटिलता काफी बढ़ सकती है।
कहीं स्कैम तो नहीं
स्टॉटअप की वेबसाइट www.reflectorbital.com पिछले कुछ दिनों से खुल नहीं रही है। इसके अलावा सोशली मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी कंपनी सक्रिय नहीं है। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि कहीं यह कोई स्कैम तो नहीं है। हालांकि, कंपनी के फाउंडर्स में शामिल बेन नोवैक ने 12 मार्च को एक्स पर एक पोस्ट में जल्द ही कंपनी की सर्विसेज लॉन्च करने का दावा किया है।
नियामकीय मंजूरी का इंतजार
अमेरिकी मीडिया की कई रिपार्ट्स में बताया गया है कि कंपनी 4 सैटलेलाइट के साथ शुरुआती परीक्षण करना चाहती है। इसके लिए अनुमति मांगी है। अगर मंजूरी मिलती है, तो पहला सैटेलाइट जल्द लॉन्च हो सकता है। हालांकि मौजूदा नियम मुख्य रूप से तकनीकी पहलुओं पर केंद्रित हैं, जबकि पर्यावरणीय प्रभावों पर अभी स्पष्ट फ्रेमवर्क नहीं है।
