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Strait of Hormuz Reopening: क्या क्रूड ऑयल की मंदी लाएगी शेयर बाजार में तेजी?

तेल और प्राकृतिक गैस के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण शिपिंग लेन, हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बुरा असर पड़ा है, जिससे ईंधन की कीमतें बढ़ गईं और बुनियादी चीजें काफी महंगी हो गई हैं।

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होर्मुज खुला, तेल सस्ता?
Authored by: Alok Kumar
Updated Jun 14, 2026, 12:39 IST

भारतीय शेयर बाजार में बीते शुक्रवार को जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। यह तेजी अमेरिका-ईरान में 100 दिनों से अधिक जारी युद्ध खत्म होने और दुनिया का अहम समुद्री मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' खुलने की उम्मीद से लौटी। स्टॉक मार्केट में तेजी लौटने से निवेशकों की संपत्ति में 10 लाख करोड़ से अधिक बढ़ गई। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज (रविवार) ईरान के साथ शांति समझौते पर साइन होने और होर्मुज को पहले की तरह खोलने का ऐलान किया है। जानकारों का कहना है कि अगर ऐसा होता है तो कच्चे तेल की कीमत में बड़ी गिरावट आने की संभावना है। यह भारतीय शेयर बाजार के लिए बहुत ही अच्छी खबर होगी। आइए समझते हैं कि होर्मुज का खुलना भारतीय शेयर बाजार के लिए कैसे एक बड़ी संजीवनी होगी और निवेशकों के लिए बूस्टर डोज का काम करेगा।

ट्रंप ने होर्मुज को लेकर क्या दावा किया है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर लिखा है कि ईरान के साथ शांति समझौते पर आज यानी रविवार को हस्ताक्षर होना तय हैं। उन्होंने आगे लिखा है कि हस्ताक्षर होने के तुरंत बाद, हॉर्मुज जलडमरूमध्य सभी के लिए पहले जैसा खुल जाएगा (OPEN TO ALL)। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्शची ने शुक्रवार को ईरानी सरकारी मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि एक या दो दिन में, या अगले कुछ दिनों के भीतर सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।

ट्रंप के ऐलान के बाद कच्चे तेल में गिरावट

शुक्रवार को ट्रम्प के ईरान के साथ शांति समझौते के ऐलान के बाद कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गईं। शनिवार तड़के जुलाई डिलीवरी के लिए अमेरिकी कच्चे तेल का वायदा 84 डॉलर प्रति बैरल पर था, जबकि अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का अगस्त वायदा गिरकर करीब 87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। जानकारों का कहना है कि होर्मुज खुलते ही कच्चे तेल की कीमत में बड़ी गिरावट आ सकती है और यह एक बार फिर 60 से 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच सकता है।

क्यों कच्चे तेल में बड़ी गिरावट की आशंका?

एनर्जी एक्सपर्ट का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट फिर खुलने से दुनिया में कच्चे तेल का सैलाब आ सकता है। इसकी वजह से क्रूड ऑयल के दाम उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से नीचे गिर सकती है। इसके पीछे तर्क है कि होर्मुज 100 से ज्यादा दिनों से बंद है। यह दुनिया का सबसे अहम ऑयल सप्लाई रूट है। जाहिर है जब यह अब खुलेगा तो सप्लाई तेजी से बढ़ेगी। लगभग 20 प्रतिशत लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और करीब 20 फीसदी कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री मार्ग से गुजरती है।

IEA के मुताबिक, हॉर्मुज बंद होने की वजह से सऊदी अरब, इराक, ईरान, यूएई, कुवैत, कतर और बहरीन जैसे खाड़ी देशों को अपना क्रूड उत्पादन 45% तक घटाना पड़ा है। इन देशों का क्रूड प्रोडक्शन 3.2 करोड़ बैरल प्रति दिन से घटकर सिर्फ 1.75 करोड़ बैरल रह गया है। अब जैसे ही होर्मुज खुलेगा इस रास्ते से तेल की सप्लाई तेजी से बढ़ेगी। होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई शुरू होगी, तो एक साथ लगभग 10,000 तेल के कुओं से ऑयल सप्लाई फिर से शुरू होगी। इन तेल के कुओं से दुनिया की करीब 15% फीसदी सप्लाई होती है। जब यहां से क्रूड बाजार में आएगा, तो जाहिर तौर पर क्रूड प्राइस में बड़ा क्रैश देखने को मिलेगा।

भारत और शेयर बाजार के लिए क्यों अच्छी खबर?

होर्मुज खुलने से तेल की कीमतें कम होगी। यह भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा। सस्ता कच्चा तेल देश के आयात बिल को कम करेगा, महंगाई पर दबाव घटाएगा और कंपनियों की लागत कम करने में मदद करेगा। जब-जब कच्चा तेल 10 डॉलर प्रति बैरल सस्ता होता है, तब-जब भारत का चालू खाता घाटा जीडीपी के करीब 0.5% तक सुधर जाता है और देश में राजकोषीय घाटा कम होता है।

कच्चे तेल की कीमत में गिरावट, भारतीय शेयर बाजार में जान फूंकने का काम कर सकते हैं। मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि भातरीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट कच्चे तेल की कीमत में उछाल और रुपया कमजोर होने से आया है। कमजोर रुपया ने विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार से पैसा निकालने को मजबूर किया है।

ऐसे में अगर कच्चे तेल की कीमत ईरान युद्ध शुरू होने के स्तर पर फिर पहुंचती है तो यह भारत के आयात बिल कम करने और महंगाई घटाने में मदद करेगा। यह भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी भी करा सकता है। इससे भारतीय बाजार में अच्छी तेजी आ सकती है।

कच्चा तेल सस्ता होने से ये फायदें

कच्चा तेल सस्ता होने से ये फायदें

इन सेक्टर्स के इनवेस्टर्स की होगी चांदी!

कच्चा तेल सस्ता होने और हॉर्मुज खुलने से बाजार के कई प्रमुख सेक्टर्स को सीधा फायदा मिल सकता है।

  • ऑयल मार्केटिंग कंपनियां: कच्चे तेल के दाम गिरने से BPCL, HPCL और IOCL जैसी कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन में भारी सुधार होगा।
  • पेंट और टायर सेक्टर्स: इन उद्योगों में कच्चे तेल के डेरिवेटिव्स का इस्तेमाल कच्चे माल के रूप में होता है। तेल सस्ता होने से इनकी लागत घटेगी।
  • एविएशन (विमानन कंपनी): एयरलाइंस कंपनियों का करीब 40% खर्च एटीएफ पर होता है। क्रूड टूटने से एविएशन कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी।
  • महंगाई पर लगाम: लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन खर्च घटने से देश में महंगाई कम होगी, जिससे आरबीआई (RBI) के लिए आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती करने का रास्ता साफ होगा। यह पूरे शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ा पॉजिटिव ट्रिगर साबित हो सकता है।
होर्मुज खुलते ही गिरेगा तेल

होर्मुज खुलते ही गिरेगा तेल

लेकिन अभी भी फंसा है पेंच

एक ओर ट्रंप ने जरूर ऐलान कर दिया है कि होर्मुज को पहले की तरह ही खोला जाएगा। वहीं, दूसरी ओर ईरानी विदेश मंत्री अराक्शची ने कहा कि ईरान एक ऐसा समझौता चाहता है जो तेहरान को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से "दी गई सेवाओं के लिए शुल्क (टोल)" वसूलने की अनुमति दे। ईरान ने युद्ध के दौरान एक टोल सिस्टम लागू किया था, जिसे अमेरिका और अन्य देश अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हैं। अब यह समाझौता होने के बाद ही पता चल पाएगा कि होर्मुज पहले की तरह खुलता है या टोल व्यवस्था शुरू हो जाएगी। अगर टोल व्यवस्था पर ईरान और अमेरिका में सहमति बनती है तो यह भारत जैसे तेल आयात देशों के लिए झटका होगा।

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