NCLT के फंसे प्रोजेक्ट बने ‘विन-विन डील’! होम बायर्स को घर और बिल्डरों को लागत बचाने का मौका

सालों से फंसे प्रोजेक्ट में घर की चाबी मिलने का इंतजार कर रहे लाखों होम बायर्स के लिए NCLT में फंसे प्रोजेक्ट संजीवनी बनकर उभरा है। आइए समझते हैं कैसे?

सालों से घर की चाबी मिलने का इंतजार कर रहे लाखों होम बायर्स के लिए NCLT में फंसी रियल एस्टेट परियोजनाएं अब एक नई उम्मीद बन कर आया है। इन अधूरी परियोजनाओं को नए डेवलपर टेकओवर कर कम लागत में रियल्टी सेक्टर में एंट्री मार रहे हैं। इससे जहां एक ओर बिल्डर को लगात बचाकर कमाई का मौका मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर सालों से घर मिलने का इंतजार कर रहे होम बायर्स को उनका घर मिल रहा है। आइए समझते हैं कि फंसे हुए पुराने प्रोजेक्ट में बिल्डरों की दिलचस्पी क्यों बढ़ी?

Real Estate

रियल एस्टेट

महानगरों में जमीन लगातार महंगी हो रही है। दूसरी ओर सीमेंट, स्टील, मजदूरी और दूसरे निर्माण खर्च बढ़ने से नए प्रोजेक्ट की लागत भी बढ़ रही है। ANAROCK के आंकड़ों के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच स्टैंडर्ड-प्लस रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट की औसत निर्माण लागत 2,681 रुपये प्रति वर्ग फुट से बढ़कर 3,604 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई। यानी पांच साल में इसमें करीब 34% की बढ़ोतरी हुई। इसी अवधि में घरों की औसत कैपिटल वैल्यू 5,826 रुपये से बढ़कर 9,260 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई। ऐसे माहौल में पहले से जमीन, मंजूरी और निर्माण वाला प्रोजेक्ट नए डेवलपर के लिए लगात बचााने का एक वैकल्पिक रास्ता बन रहा है।

End of Feed