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Explained: SME ग्रोथ फंड क्या है? यह कैसे बदलेगा छोटे कारोबारियों की किस्मत, विस्तार से समझें

SME Growth Fund Explained: हाल ही में केंद्र सरकार ने 10000 करोड़ रुपये का SME ग्रोथ फंड की मंजूरी दी। आइए जानते हैं आखिर यह किया है। इस फंड का क्या मकसद है। कैसे छोटे कारोबारियों की किस्मत चमक जाएगी।

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SME ग्रोथ फंड से छोटे उद्योगों को मिलेंगे नए पंख! (तस्वीर-AI)
Authored by: रामानुज सिंह
Updated Oct 11, 2026, 12:52 IST
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SME Growth Fund Explained : भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में हमारे छोटे-बड़े उद्योगों (MSMEs) का बहुत बड़ा योगदान है। चाहे आपके घर के पास की कोई छोटी फैक्ट्री हो, कपड़ों का बुटीक हो या कोई आईटी स्टार्टअप ये सभी हमारे देश के MSME सेक्टर का हिस्सा हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने छोटे और मध्यम उद्योगों (SME) के लिए 10,000 करोड़ रुपये के 'SME ग्रोथ फंड' (SGF) को मंजूरी दी है। इस कदम का मुख्य मकसद छोटे कारोबारियों को पैसों की कमी को दूर करना और उन्हें दुनिया भर में नाम कमाने वाली बड़ी कंपनियां बनाना है। आइए विस्तार से समझते हैं।

SME ग्रोथ फंड (SGF) क्या है और यह कैसे काम करेगा?

SME ग्रोथ फंड सरकार की एक ऐसी योजना है, जिसकी घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी। सरल शब्दों में कहें तो यह सरकार द्वारा तैयार किया गया एक पैसों का गुल्लक या वित्तपोषण माध्यम (Financing Mechanism) है।

  • दीर्घकालिक इक्विटी पूंजी (Long-term Equity Capital):- आमतौर पर जब कोई छोटा व्यापारी बैंक से लोन लेता है, तो उसे हर महीने भारी ब्याज चुकाना पड़ता है। लेकिन यह फंड लोन देने के बजाय कंपनियों में सीधे पैसे निवेश करेगा (जिसे इक्विटी निवेश कहते हैं)। इससे कंपनियों को बिना तुरंत लोन चुकाने के दबाव के, लंबे समय तक व्यापार फैलाने का मौका मिलेगा।
  • मिसिंग मिडिल (Missing Middle) की समस्या दूर करना:- हमारे देश में बहुत छोटे (Micro) उद्योगों को मदद मिल जाती है और बहुत बड़ी कंपनियों को बैंक आसानी से पैसा दे देते हैं। लेकिन बीच के जो मध्यम स्तर के उद्योग होते हैं, उन्हें आगे बढ़ने के लिए बड़ा निवेश नहीं मिल पाता। इस खाली जगह को ही 'मिसिंग मिडिल' कहा जाता है। यह फंड इसी खाली जगह को भरने का काम करेगा।
  • अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF):- यह फंड 'वैकल्पिक निवेश फंड' के रूप में काम करेगा। इसमें सरकार और बड़े निजी निवेशक मिलकर पैसा लगाएंगे और उन चुनिंदा छोटे उद्योगों में निवेश करेंगे, जिनमें भविष्य में बहुत बड़ा बनने की क्षमता है।

इस फंड का फायदा किन उद्योगों को और कहां मिलेगा?

सरकार का लक्ष्य इस 10,000 करोड़ रुपये के फंड का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करने का है। यह फंड मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग (सामान बनाने वाली फैक्ट्रियां), सर्विसेज (सेवा क्षेत्र), टेक्नोलॉजी और नए इनोवेशन पर आधारित स्टार्टअप्स को मिलेगा। इस योजना का एक खास मकसद देश के छोटे शहरों (Tier-II और Tier-III शहरों) का विकास करना है। इन शहरों में स्थित इंडस्ट्रियल क्लस्टरों यानी औद्योगिक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि वहां की लोकल सप्लाई चेन मजबूत हो और स्थानीय लोगों को अपने ही शहर में रोजगार मिल सके।

मोदी सरकार का बड़ा दांव! छोटे कारोबारियों के लिए खुला 10,000 करोड़ रुपये का खजाना (तस्वीर-AI)

मोदी सरकार का बड़ा दांव! छोटे कारोबारियों के लिए खुला 10,000 करोड़ रुपये का खजाना (तस्वीर-AI)

MSME क्या होते हैं और इन्हें कैसे पहचाना जाता है?

MSME का मतलब होता है Micro, Small and Medium Enterprises (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम)। भारत सरकार ने अप्रैल 2025 से MSME की पहचान के लिए कुछ नए नियम बनाए हैं, जो दो बातों पर निर्भर करते हैं। कंपनी में लगा पैसा (निवेश) और कंपनी की सालभर की कुल बिक्री (टर्नओवर)।

  • सूक्ष्म उद्यम (Micro Enterprise):- जिस बिजनेस में 2.5 करोड़ रुपये तक का निवेश हो और साल का टर्नओवर 10 करोड़ रुपये तक हो।
  • लघु उद्यम (Small Enterprise):- जिस बिजनेस में 25 करोड़ रुपये तक का निवेश हो और साल का टर्नओवर 100 करोड़ रुपये तक हो।
  • मध्यम उद्यम (Medium Enterprise):- जिस बिजनेस में 125 करोड़ रुपये तक का निवेश हो और साल का टर्नओवर 500 करोड़ रुपये तक हो।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए MSME इतने जरूरी क्यों?

भारत की अर्थव्यवस्था में MSME को आर्थिक इंजन माना जाता है। इसके कुछ मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:-

  • देश की कमाई में बड़ा हिस्सा:- आर्थिक सर्वे 2025-26 के मुताबिक, भारत की कुल जीडीपी (GDP) में MSME का हिस्सा 31.1% है। देश में बनने वाले कुल सामान (मैन्युफैक्चरिंग) में इनकी हिस्सेदारी 35.4% और देश से बाहर भेजे जाने वाले सामान (निर्यात) में करीब 48.58% हिस्सेदारी इन्हीं छोटे उद्योगों की है।
  • करोड़ों लोगों को रोजगार:- उद्यम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब 9.78 करोड़ MSME रिजस्टर्ड हैं, जिन्होंने मिलकर करीब 43.28 करोड़ लोगों को नौकरियां दी हैं।
  • महिलाओं की भागीदारी:- इस क्षेत्र की सबसे अच्छी बात यह है कि कुल पंजीकृत उद्योगों में से करीब 37.6% उद्यम महिलाओं के स्वामित्व में हैं।
  • पर्यावरण की सुरक्षा:- आजकल कई छोटे उद्योग सौर ऊर्जा (सोलर पावर), रीसाइक्लिंग और ऊर्जा बचाने वाली तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंच रहा है।

छोटे उद्योगों (MSME) के रास्ते में कौन-सी बड़ी रुकावटें हैं?

इतना बड़ा योगदान देने के बावजूद, हमारे देश के छोटे उद्योगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है:-

  • बैंक से लोन मिलने में परेशानी:- ज्यादातर छोटे कारोबारियों के पास कागजात और सही वित्तीय रिकॉर्ड नहीं होते। इस वजह से बैंक इन्हें आसानी से लोन नहीं देते। आरबीआई की यू.के. सिन्हा समिति के अनुसार, MSME सेक्टर को जितने पैसों की जरुरत है और जितना उन्हें मिलता है, उसमें 20 रुपये से 25 लाख करोड़ रुपये का बहुत बड़ा अंतर है। मजबूरन इन्हें महंगे ब्याज पर बाहर से उधार लेना पड़ता है।
  • अटका हुआ पैसा (Delayed Payments):- छोटे उद्योग बड़ी कंपनियों या सरकारी विभागों को सामान बेच तो देते हैं, लेकिन उन्हें महीनों तक उनका बकाया पैसा नहीं मिलता। एक स्टडी के मुताबिक, हर साल करीब 10.7 लाख करोड़ रुपया भुगतानों में अटका रहता है। इससे उनके पास नया सामान बनाने के लिए पैसे नहीं बचते।
  • सरकारी नियमों का डर:- हमारे देश में श्रम कानून, टैक्स (GST) और कागजी कार्रवाई इतनी जटिल है कि छोटे कारोबारी जेल या जुर्माने के डर से अपने बिजनेस को जानबूझकर छोटा ही रखते हैं। करीब 95% उद्योग सूक्ष्म या लघु श्रेणी से बाहर ही नहीं निकल पाते।
  • पुरानी तकनीक और मशीनों का इस्तेमाल:- आज के डिजिटल जमाने में भी सिर्फ 23% छोटे उद्योग ही AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) या नई तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं। बाकी लोग पुरानी मशीनों से काम चला रहे हैं, जिससे उत्पादन धीमा होता है।
  • कुशल कर्मचारियों की कमी:- छोटी कंपनियों के पास इतनी बड़ी कमाई नहीं होती कि वे बड़े पैकेज देकर एक्सपर्ट कर्मचारियों को रख सकें। 50% से ज्यादा एमएसएमई मानते हैं कि उनके पास नई तकनीक चलाने वाले कुशल लोगों की भारी कमी है।

MSME सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए?

अगर भारत को 2047 तक विकसित देश बनना है, तो इन MSMEs की समस्याओं को हल करना बेहद जरूरी है।

  • समय पर भुगतान पक्का करना:- सरकार के 'MSME समाधान' और 'TReDS' पोर्टल को सख्त बनाना चाहिए ताकि बड़ी कंपनियां छोटे उद्योगों का पैसा न दबा सकें। TReDS प्लेटफॉर्म के जरिए अब तक छोटे उद्योगों को 7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम समय पर मिल चुकी है।
  • लोन देने के नए तरीके अपनाना:- बैंकों को जमीन या संपत्ति गिरवी रखने की शर्त हटाने होगी। जीएसटी रिटर्न और डिजिटल लेन-देन के आधार पर छोटे कारोबारियों को आसानी से लोन देना चाहिए।
  • नई तकनीक और ऑटोमेशन को बढ़ावा देना:- सरकार को चाहिए कि वह छोटे शहरों में साझा रिसर्च लैब (R&D Labs) और आधुनिक मशीनरी सेंटर बनाए, जहाँ छोटे कारोबारी कम खर्च में नई तकनीक का फायदा उठा सकें।
  • नियमों को आसान बनाना:- छोटे-मोटे कागजी अपराधों पर जेल की सजा खत्म होनी चाहिए और ऑनलाइन अप्रूवल (सिंगल विंडो सिस्टम) को बढ़ावा मिलना चाहिए।
  • स्किल ट्रेनिंग (कौशल विकास):- कॉलेजों, आईटीआई (ITI) और उद्योगों को मिलकर युवाओं को ऐसी ट्रेनिंग देनी चाहिए जिससे उन्हें तुरंत इन छोटी फैक्ट्रियों में आधुनिक काम मिल सके।

10,000 करोड़ रुपये का SME ग्रोथ फंड सिर्फ एक बजटीय घोषणा नहीं है, बल्कि यह भारत के छोटे कारोबारियों को पंख देने की एक दूरदर्शी कोशिश है। जब हमारे गांव और छोटे शहरों के एमएसएमई मजबूत होंगे, तो देश में नए रोजगार पैदा होंगे, निर्यात बढ़ेगा और भारत सचमुच 'आत्मनिर्भर' और 'विकसित भारत @2047' के सपने को पूरा कर सकेगा।

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