बहुत सारे लोग इस सवाल का जवाब ढूंढते रहते हैं कि वह एक्स्ट्रा पैसों से कर्ज चुकाएं या नया निवेश शुरू करें। आज कल नया SIP शुरू करने का चलन खूब है। अगर आप नौकरीपेशा हैं और इंक्रीमेंट हुआ है तो सैलरी बढ़ी होगी। आपके हाथ में पिछले कई महीने के पैसे जोड़कर आएंगे। वहीं, कुछ लोग पार्ट टाइम काम कर भी पैसे कमाते हैं। अब सवाल उठता है कि जो एक्स्ट्रा रकम आपके पास आ रहे हैं, उससे आप अपना मौजूदा कर्ज चुकाएं या नया निवेश शुरू करें। अगर आप भी इस सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं तो आइए आपको सही जवाब देते हैं।
कर्ज चुकाएं या निवेश करें
एक्स्ट्रा पैसों से लोन कब चकाएं?
अगर आपके पास एक्स्ट्रा पैसे आए हैं तो लोन चुकाना कब फायदेमंद होगा? जानकारों का कहना है कि यह लोन की अवधि पर निर्भर करता है। होम लोन के शुरुआती कुछ सालों में, हर EMI का एक बड़ा हिस्सा मूलधन (प्रिंसिपल) चुकाने के बजाय ब्याज चुकाने में जाता है। इस दौरान थोड़ी सी भी एकमुश्त प्रीपेमेंट करने से आपका बकाया बैलेंस और लोन का बोझ काफी कम हो सकता है।
बाद में हिसाब-किताब बदल जाता है। अगर आप लोन चुकाने के आखिरी कुछ सालों में हैं, तो आपकी ज्यादातर EMI पहले ही मूलधन (प्रिंसिपल) चुकाने में जा रही होती है। ऐसे में, लोन का प्री-पेमेंट करने से ब्याज में कोई खास बचत नहीं हो सकती है, इसलिए अतिरिक्त पैसे को निवेश करना ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है।
ब्याज दर और रिटर्न की तुलना जरूर करें
किसी भी लोन को चुकाने से पहले आपको उस पर लगने वाले ब्याज दर और निवेश पर मिलने वाले ब्याज से तुलना जरूर करनी चाहिए। कई लोग यह मान लेते हैं कि अगर वे होम लोन पर दिए जा रहे ब्याज से ज्यादा रिटर्न इन्वेस्टमेंट से कमा सकते हैं, तो इन्वेस्टमेंट ही बेहतर विकल्प है। मामला इतना सीधा नहीं है। इन्वेस्टमेंट रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती, खासकर तब जब आप इक्विटी म्यूचुअल फंड या स्टॉक में इन्वेस्ट कर रहे हों। दूसरी ओर, होम लोन के ब्याज में बचत पक्की होती है। इसलिए, तुलना उम्मीदों के बजाय असल में मिलने वाले रिटर्न (टैक्स के बाद) के आधार पर होनी चाहिए।
इमरजेंसी फंड का इस्तेमाल बिल्कुल न करें
कर्ज चुकाने से भले ही अच्छा लगे, लेकिन इससे आपके पास कैश की कमी नहीं होनी चाहिए। कुछ लोग अपने होम लोन को पहले ही चुकाने के लिए अपनी सारी बचत का इस्तेमाल कर लेते हैं, लेकिन बाद में जब उन्हें अचानक मेडिकल बिल, नौकरी जाने या घर के किसी बड़े खर्च का सामना करना पड़ता है, तो उन्हें फिर से कर्ज लेना पड़ता है। एकमुश्त पेमेंट करने से पहले यह पक्का कर लें कि आपके पास अभी भी काफी इमरजेंसी फंड है। कुछ साल पहले कर्ज-मुक्त होने की तुलना में फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी अक्सर ज्यादा जरूरी होती है।
