Stock Market Today : भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को ग्लोबल बाजारों के मजबूत संकेतों के बावजूद दबाव देखने को मिल रहा है। Nifty जहां 115 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ 24,316.30 अंक तक लुढ़क गया। वहीं, Sensex 200 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ 77,709.63 तक फिसल गया है। वहीं, इसके विपरीत जापानी बेंचमार्क Nikkei 225 आज 2 फीसदी से ज्यादा के उछाल के साथ 68,799.71 अंक तक उछल गया। इसी तरह दक्षिण कोरियाई बेंचमार्क KOSPI करीब 4 फीसदी तेजी के साथ 6,895.63 अंक तक उछल गया।
एशियाई बाजारों में तेजी, भारत में बिकवाली हावी
क्यों लुढ़का भारतीय बाजार?
जब एशिया के बड़े बाजारों में जोरदार खरीदारी हो रही है, तब भारतीय बाजार में बिकवाली क्यों है? असल में मार्केट एक्सपर्ट की मानें तो इसके पीछे कोई एक खास वजह नहीं, बल्कि क्रूड, रुपया, विदेशी निवेश, घरेलू सेक्टरों में बिकवाली और बाजार का टेक्निकल स्ट्रक्चर जिम्मदार है। मोटे तौर पर 5 वजहें, जिन्हें गिरावट के पीछे देखा जा सकता है।
कच्चा तेल फिर बना सिरदर्द
भारतीय बाजार के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमत है। ब्रेंट क्रूड में भले ही गुरुवार को हल्क नरमी आई है। लेकिन, अब भी ब्रेंट क्रूड करीब 89 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हे। महंगा क्रूड भारतीय बाजार पर सीधा असर डालता है। यही वजह है कि जब कच्चा तेल ऊंचे स्तर पर रहता है तो विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में ज्यादा सतर्क हो जाते हैं।
रुपया 95 के पार, आयात का दबाव बढ़ा
क्रूड के साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ा रही है। रुपया लगातार 95 प्रति डॉलर की रेंज में है। जबकि, उम्मीद की जा रही थी कि रिजर्व बैंक और सरकार की तरफ से किए गए उपायों के बाद रुपये में मजबूती आएगी। यानी जापान और कोरिया में तेजी के बावजूद भारतीय बाजार को अपना अलग मैक्रो जोखिम झेलना पड़ रहा है।
बैंकिंग शेयरों में बिकवाली
भारतीय बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी में आईटी और बैंकिंग की अहम हिस्सेदारी है। जब ये दोनों सेक्टर नीचे आते हैं, तो पूरा इंडेक्स डगमगाने लगता है। यही वजह है कि आज निफ्टी और सेंसेक्स में कमजोरी बनी हुई है।
मेटल, ऑयल-गैस और सीमेंट में दबाव
बैंकिंग के अलावा आज भारतीय बाजार के कई प्रमुख सेक्टर भी दबाव में हैं। निफ्टी मेटल जहां करीब 0.75%, ऑयल एंड गैस करीब 0.74% और सीमेंट करीब 1.08% नीचे हैं। वहीं, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, फार्मा और रियल्टी में भी कमजोरी दिखाई दे रही थी।
विदेशी निवेशकों की चाल
भारतीय बाजार के लिए विदेशी पूंजी का रुख भी अहम है। विदेशी निवेशक (FII/FPI) जब महंगे तेल, कमजोर रुपये और भू-राजनीतिक जोखिम को देखते हैं तो भारतीय बाजार में जोखिम कम कर सकते हैं। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी बाजार को सपोर्ट दे सकती है।
