SBI RBI Rupee Forex Trade: रिजर्व बैंक की तरफ से रुपये की गिरावट में ब्रेक लगाने के लिए उठाए गए फैसले बैंकों के लिए भारी पड़ते दिख रहे हैं। क्योंकि, रिजर्व बैंक की सख्ती ने करेंसी मार्केट का पूरा समीकरण बदल दिया है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के सबसे बड़े बैंक SBI की $5 अरब की शॉर्ट पोजीशन फंस गई, जिससे बैंक को करीब ₹300 करोड़ का नुकसान होना तय है।
रुपये को बचाने के एक्शन में फंसा SBI
कैसे फंस गया SBI ?
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने रुपये के खिलाफ करीब $5 अरब की शॉर्ट पोजीशन बनाई थी, जो उसके कुल एक्सपोजर का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा थी। RBI के अचानक सख्त कदमों के बाद बैंक को इन पोजीशंस को मजबूरन अनवाइंड करना पड़ा। इस अनवाइंडिंग से SBI को करीब ₹3 अरब यानी लगभग $32 मिलियन का नुकसान होने का अनुमान है। हालांकि यह नुकसान दिखने में बड़ा लगता है, लेकिन बैंक के स्केल के हिसाब से सीमित माना जा रहा है।
$800 अरब की बैलेंस शीट
SBI के कुल एसेट्स $800 अरब डॉलर से अधिक हैं। ऐसे में ₹3 अरब का नुकसान बैंक के लिए मैनेजेबल माना जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह झटका अस्थायी है और पोजीशन क्लियर होने के बाद बैंकिंग सिस्टम रुपये में और मजबूती की उम्मीद कर रहा है।
RBI की सख्ती: क्या-क्या बदला?
रुपये में 3% से ज्यादा गिरावट के बाद RBI ने एक साथ कई बड़े कदम उठाए। पहला, बैंकों के लिए ऑनशोर करेंसी मार्केट में नेट ओपन पोजीशन को 10 अप्रैल तक $100 मिलियन तक सीमित कर दिया गया। दूसरा, भारतीय बैंकों को क्लाइंट्स को नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड (NDF) ऑफर करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई।
यह कदम सीधे $149 बिलियन रोजाना वाले ऑफशोर मार्केट को टारगेट करता है, जहां सबसे ज्यादा सट्टेबाजी होती है।
RBI ने गिरावट रोकी, ट्रेंड नहीं बदला
RBI के दखल के बाद फिलहाल रुपया 92 से 93 की रेंज में कारोबार कर रहा है। इससे साफ है कि रिजर्व बैंक के दखल से बाजार की दिशा नहीं बदली है, बल्कि रुपये की गिरावट की गति को नियंत्रित किया है। वहीं, SBI का नुकसान इस बात का संकेत है कि करेंसी मार्केट में अब पॉलिसी का असर निर्णायक हो चुका है। रुपया फिलहाल संभला है, लेकिन असली स्थिरता अभी दूर है।
मार्केट में आया बड़ा उलटफेर
इन सख्त उपायों के बाद बड़े पैमाने पर शॉर्ट पोजीशंस कवर हुईं। नतीजा यह रहा कि रुपये में 12 साल का सबसे बड़ा एक-दिवसीय उछाल देखने को मिला। इंडस्ट्री स्तर पर अनुमान है कि $30 बिलियन से ज्यादा की सट्टेबाजी पोजीशंस प्रभावित हुईं। ब्रोकरेज हाउस Jefferies के मुताबिक, पूरे बैंकिंग सेक्टर को करीब ₹5,000 करोड़ तक का नुकसान हो सकता है, लेकिन मजबूत प्रॉफिटेबिलिटी के चलते इसका असर सीमित रहेगा।
RBI का साफ संदेश: सट्टेबाजी नहीं चलेगी
RBI का मकसद स्पष्ट है, रुपये में अत्यधिक वोलैटिलिटी को रोकना और सट्टेबाजी पर लगाम लगाना। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल के बढ़ते दबाव और ग्लोबल अनिश्चितता के बीच केंद्रीय बैंक अब आक्रामक मोड में है। हालांकि SBI ने इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन बाजार के लिए यह एक बड़ा संकेत है कि अब करेंसी ट्रेड में नियम सख्त हो चुके हैं।
