SBI Senior Citizen FD: अगर आप अपने पैसे को सुरक्षित निवेश के साथ बढ़ाना चाहते हैं, तो आपके लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) एक अच्छा विकल्प हो सकता है। खासतौर पर ऐसे निवेशक जो बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर रहकर निश्चित रिटर्न चाहते हैं, उनके लिए एफडी आज भी पसंदीदा निवेश साधनों में शामिल है। देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक SBI (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) अपने ग्राहकों को अलग-अलग अवधि की एफडी पर आकर्षक ब्याज दरें पेश कर रहा है। आप बैंक की 2 साल की अवधि वाली एफडी में निवेश कर सकते हैं। SBI की 2 साल की एफडी योजना वरिष्ठ नागरिकों और सामान्य ग्राहकों दोनों के लिए उपलब्ध है। हालांकि, बैंक वरिष्ठ नागरिकों को अतिरिक्त ब्याज दर का लाभ देता है, जिससे उन्हें बेहतर रिटर्न मिलता है।
FD (Photo: iStock)
सीनियर सिटिजन को कितना ब्याज मिल रहा है?
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SBI की 2 साल की एफडी पर वरिष्ठ नागरिकों को 6.90 प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जा रहा है। यह दर सामान्य ग्राहकों की तुलना में अधिक है। अगर कोई सीनियर सिटिजन इस योजना में 6 लाख रुपये का निवेश करता है, तो 2 साल की अवधि पूरी होने पर उसे 6,87,975 रुपये की मैच्योरिटी राशि प्राप्त होगी।
इसका मतलब है कि निवेशक को लगभग 87,975 रुपये का ब्याज मिलेगा। सुरक्षित निवेश के साथ यह रिटर्न वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन सकता है।
सामान्य नागरिकों को कितना मिलेगा रिटर्न?
सामान्य ग्राहकों के लिए SBI 2 साल की एफडी पर 6.40 प्रतिशत की दर से ब्याज दे रहा है। अगर कोई सामान्य नागरिक इसी अवधि के लिए 6 लाख रुपये निवेश करता है, तो मैच्योरिटी पर उसे 6,81,241 रुपये मिलेंगे। यानी निवेशक को लगभग 81,241 रुपये का ब्याज प्राप्त होगा। हालांकि यह रिटर्न वरिष्ठ नागरिकों की तुलना में थोड़ा कम है, लेकिन सुरक्षित और निश्चित आय चाहने वाले निवेशकों के लिए यह एक अच्छा विकल्प माना जा सकता है।
एफडी में क्यों करें निवेश
एफडी को सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है क्योंकि इसमें रिटर्न पहले से तय होता है। निवेशक को बाजार के जोखिम की चिंता नहीं रहती और मैच्योरिटी पर निश्चित राशि प्राप्त होती है। इसके अलावा बैंक एफडी में अलग-अलग अवधि चुनने की सुविधा भी देते हैं, जिससे निवेशक अपनी जरूरत के अनुसार निवेश कर सकते हैं।टैक्स से जुड़ी जरूरी बात
हालांकि, एफडी पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री नहीं होता। ब्याज से होने वाली आय निवेशक की कुल आय में जुड़ती है और उस पर लागू आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स देना पड़ सकता है।अगर एक वित्तीय वर्ष में एफडी से मिलने वाला ब्याज तय सीमा से ज्यादा होता है तो बैंक TDS भी काट सकता है।
