SBI FD Return:अगर आप अपनी बचत को सुरक्षित जगह निवेश करना चाहते हैं और बहुत लंबे समय के लिए पैसा लॉक नहीं करना चाहते तो FD एक अच्छा विकल्प हो सकता है। खासतौर पर ऐसे निवेशक, जो बाजार से जुड़े उतार-चढ़ाव से बचना चाहते हैं वे बैंक FD पर विचार करते हैं। अगर आप भी एफडी में निवेश करने की योजना बना रहे हैं तो देश के सबसे बड़े पब्लिक सेक्टर बैंक एसबीआई की 2 साल की एफडी में पैसा लगा सकते हैं।
एसबीआई की 2 साल की एफडी (AI Generated Image)
2 साल की एफडी पर ब्याज दर
SBI की ओर से 2 साल की FD पर सामान्य नागरिकों के लिए 6.40% सालाना ब्याज दिया जा रहा है। वहीं, सीनियर सिटिजन को इसी अवधि के लिए 6.90% सालाना ब्याज मिल रहा है। यानी वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य ग्राहकों की तुलना में 0.50 प्रतिशत ज्यादा ब्याज मिल रहा है।
2 लाख की FD पर कितना मिलेगा रिटर्न
2 साल की एफडी पर निवेशकों को कितना फायदा मिलेगा। इसे एक उदाहरण से समझने की कोशिश कर सकते हैं। मान लीजिए आपके पास 2 लाख रुपये हैं और आप इस रकम को सुरक्षित निवेश के तौर पर 2 साल के लिए SBI की FD में लगाना चाहते हैं। अगर आप सामान्य नागरिक हैं तो आपको 6.40% सालाना ब्याज मिलेगा। इस हिसाब से 2 साल की अवधि पूरी होने पर आपको लगभग 2,27,080 रुपये की मैच्योरिटी रकम मिल सकती है। यानी 2 लाख के निवेश पर करीब 27,080 का ब्याज कमा सकते हैं।
वहीं अगर यही 2 लाख रुपये किसी सीनियर सिटिजन द्वारा 2 साल के लिए निवेश किए जाते हैं तो 6.90% ब्याज दर पर मैच्योरिटी पर करीब 2,29,325 मिल सकते हैं। इस स्थिति में ब्याज से होने वाली कमाई करीब 29,325 रुपये होगी।
यह कैलकुलेशन Quarterly Compounding के आधार पर है। वास्तविक मैच्योरिटी रकम बैंक के लागू नियमों और FD के प्रकार के अनुसार अलग हो सकती है।
| निवेशक | ब्याज दर | निवेश राशि | अवधि | मैच्योरिटी राशि | अनुमानित ब्याज |
|---|---|---|---|---|---|
| सामान्य नागरिक | 6.40% | ₹2,00,000 | 2 साल | ₹2,27,080 | ₹27,080 |
| सीनियर सिटिजन | 6.90% | ₹2,00,000 | 2 साल | ₹2,29,325 | ₹29,325 |
इन बातों का भी रखें ध्यान
FD को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन पैसा लगाने से पहले कुछ दूसरी चीजों पर भी ध्यान देना जरूरी है। अगर आपको लगता है कि अगले कुछ महीनों में पैसे की जरूरत पड़ सकती है तो पूरी रकम को 2 साल की FD में लॉक करने के बजाय कुछ पैसा आसानी से उपलब्ध विकल्प में रखना बेहतर हो सकता है।
यह भी समझें कि FD को उसकी मैच्योरिटी से पहले बंद करने पर बैंक के नियम लागू होते हैं। ऐसे में ब्याज की गणना उस अवधि के लिए लागू दर के अनुसार की जा सकती है और कुछ मामलों में जुर्माना या ब्याज में कटौती भी हो सकती है। इसके अलावा, इस बात का ध्यान रखें कि FD से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री नहीं होता।
