1 अप्रैल से बदल रही है आपकी सैलरी, इन हैंड घट जाएगी लेकिन ये चीज बढ़ जाएगी!

1 अप्रैल 2026 से नया लेबर कोड और 'आयकर अधिनियम 2025' लागू होने जा रहा है, जिससे आपकी सैलरी स्लिप का पूरा ढांचा बदल जाएगा। बेसिक सैलरी बढ़ने से आपकी इन-हैंड सैलरी में तो कटौती हो सकती है, लेकिन पीएफ और ग्रेच्युटी में योगदान बढ़ने से आपका भविष्य और रिटायरमेंट फंड पहले से कहीं अधिक मजबूत होगा।

अगले महीने की 1 तारीख यानी 1 अप्रैल 2026 से प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सरकार द्वारा लाया गया नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 और न्यू लेबर कोड लागू होते ही आपकी सैलरी स्लिप का पूरा ढांचा बदल जाएगा। मुमकिन है कि जब अगले महीने आपकी सैलरी आए, तो बैंक खाते में आने वाली रकम (In-hand Salary) पहले के मुकाबले कम हो। हालांकि, इससे घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि शॉर्ट टर्म में होने वाला यह नुकसान लॉन्ग टर्म में आपके लिए एक बड़ा फंड तैयार करेगा। आइए जानते हैं कि आपकी सैलरी स्लिप में क्या-क्या बदलने वाला है।

Salary New Labor code

क्या है नया लेबर कोड और बेसिक सैलरी का 50% नियम?

सरकार ने पुराने 29 श्रम कानूनों को मर्ज करके 4 नए लेबर कोड (वेजेज, इंडस्ट्रियल रिलेशन, सोशल सिक्योरिटी और OSHWC) तैयार किए हैं। इस नए नियम के तहत अब आपकी बेसिक सैलरी (Basic Salary) आपकी कुल सीटीसी (CTC) का कम से कम 50 फीसदी होना अनिवार्य है। अब तक कंपनियां टैक्स बचाने के लिए बेसिक सैलरी को कम रखती थीं और भत्तों (HRA, स्पेशल अलाउंस) को 70-80 फीसदी तक बढ़ा देती थीं। लेकिन 1 अप्रैल से भत्तों (Allowances) की सीमा कुल सैलरी के 50 फीसदी पर लॉक कर दी जाएगी। यानी अब कंपनियों को आपकी बेसिक सैलरी बढ़ानी ही होगी।

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