Oil and Gas Supply: रूस ने भारत को कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति बढ़ाने की पेशकश की है। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। रूस का कहना है कि उसके पास भारतीय बाजार की जरुरतों को लगातार पूरा करने की क्षमता मौजूद है। रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बृहस्पतिवार को विशेष बैठकें की। इन बैठकों में तेल और गैस के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग पर खास जोर दिया गया। मंतुरोव ने बाद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी मुलाकात की। रूस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इन बैठकों में ऊर्जा क्षेत्र के साथ-साथ परस्पर लाभकारी व्यापार और निवेश को बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा हुई।
रूस ने भारत को तेल और गैस की आपूर्ति बढ़ाने का प्रस्ताव दिया (तस्वीर-istock)
पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक ऊर्जा पर असर
फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। यह संकरा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित है और दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी परिवहन को संभालता है। जलडमरूमध्य में आवागमन अवरुद्ध होने से वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है। भारत के लिए भी पश्चिम एशिया लंबे समय से ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत रहा है। इस परिस्थिति में रूस का भारत को तेल और गैस की आपूर्ति बढ़ाने का प्रस्ताव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
द्विपक्षीय आयोग की बैठक
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक भारत और रूस के बीच भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक भी गुरुवार को हुई। इस बैठक की सह-अध्यक्षता मंतुरोव और जयशंकर ने की। बैठक में व्यापार, उद्योग, ऊर्जा, उर्वरक, संपर्क, परिवहन, प्रौद्योगिकी और इनोवेशन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। रूस ने बताया कि वह भारत को उर्वरकों की आपूर्ति 2025 के अंत तक 40 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य रखता है और भविष्य में भी भारत की जरुरतों को पूरा करने के लिए तैयार है।
पिछली शिखर वार्ता और भविष्य की योजनाएं
दोनों देशों ने पिछले वर्ष दिसंबर में आयोजित 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में लिए गए फैसलों की समीक्षा भी की। उस सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आए थे। प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन ने उस समय पांच वर्षीय आर्थिक साझेदारी का रोडमैप जारी किया था। इसमें 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया। बैठक में दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार साझा किए। विशेष रूप से पश्चिम एशिया संघर्ष पर चर्चा की गई और व्यापार, ऊर्जा और औद्योगिक सहयोग को आगे बढ़ाने के रास्तों पर विचार किया गया।
असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग
रूसी बयान में असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग को गहरा करने की संभावना का भी उल्लेख किया गया। रूस ने कहा कि वह इस क्षेत्र में भारत के साथ नई परियोजनाओं और तकनीकी सहयोग के लिए इच्छुक है। इस तरह, रूस और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंध और ऊर्जा सहयोग मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं। वैश्विक ऊर्जा संकट के इस समय में रूस की यह ऑफिर भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके अलावा, व्यापार, निवेश, टैक्नोलॉजी और इनोवेशन में भी दोनों देशों के बीच नए अवसर खोजने की कोशिश जारी है।
