SIP vs Step Up SIP: म्यूचुअल फंड में एसआईपी (Systematic Investment Plan) को लंबे समय में संपत्ति बनाने का एक प्रभावी तरीका माना जाता है। अक्सर निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे हर महीने एक निश्चित राशि SIP में निवेश करें और लंबे समय तक निवेश जारी रखें। लेकिन फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि केवल एक निश्चित राशि का निवेश करना ही पर्याप्त नहीं है। अगर निवेशक समय-समय पर अपनी SIP राशि बढ़ाते रहें, तो अंतिम कॉर्पस में बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है। दरअसल, कई निवेशक कंपाउंडिंग की ताकत को तो समझते हैं, लेकिन महंगाई और बढ़ती जीवनशैली की लागत के प्रभाव को नजरअंदाज कर देते हैं। यही वजह है कि लंबे समय तक एक ही राशि की SIP जारी रखने से अपेक्षित लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है।
SIP VS Step Up SIP (AI Generated Image)
क्या होती है Step-Up SIP?
सबसे पहले तो यही समझें कि Step-Up SIP क्या होती है? Step-Up SIP को Top-Up SIP भी कहा जाता है, ऐसी व्यवस्था है, जिसमें निवेशक हर साल अपनी SIP राशि को एक निश्चित प्रतिशत या तय रकम से बढ़ाता है। मान लें कि कोई व्यक्ति 5,000 की SIP शुरू करता है और हर साल इसमें 10% की बढ़ोतरी करता है, तो समय के साथ उसका निवेश काफी तेजी से बढ़ सकता है।
यहां समझें अंतर
अगर एक निवेशक केवल 5,000 की मासिक SIP को लंबे समय तक बिना बढ़ाए जारी रखता है तो 12 प्रतिशत के अनुमानित रेट ऑफ रिटर्न के साथ यह राशि 21 वर्षों में 52,15,034 रुपये हो जाएगी। वहीं, अगर वही निवेशक हर साल अपनी SIP राशि 10 प्रतिशत बढ़ाता है तो अंतिम कॉर्पस 1,08,63,008 रुपये तक पहुंच सकता है। यानी केवल SIP में नियमित बढ़ोतरी कर अंतिम फंड को लगभग दोगुना किया जा सकता है।
| विवरण | सामान्य SIP | Step-Up SIP (हर साल 10% बढ़ोतरी) |
|---|---|---|
| मासिक शुरुआती निवेश | ₹5,000 | ₹5,000 |
| निवेश अवधि | 21 वर्ष | 21 वर्ष |
| अनुमानित रिटर्न | 12% प्रतिवर्ष | 12% प्रतिवर्ष |
| SIP में बढ़ोतरी | नहीं | हर साल 10% |
| कुल निवेश | ₹12,60,000 | ₹38,40,150 |
| मैच्योरिटी पर अनुमानित कॉर्पस | ₹52,15,034 | ₹1,08,63,008 |
महंगाई को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि किसी व्यक्ति की आय हर साल बढ़ रही है लेकिन उसकी SIP राशि स्थिर रहती है, तो वास्तव में वह अपनी आय का घटता हुआ हिस्सा निवेश कर रहा होता है। दूसरी ओर, Step-Up SIP निवेश को आय वृद्धि और महंगाई के अनुरूप बनाए रखने में मदद करती है।
