Roti Rice Rate: क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार, जून 2025 में घर के बने भोजन की कीमतें पिछले साल के मुकाबले कम हुईं। 'रोटी चावल रेट' नामक मासिक रिपोर्ट में बताया गया है कि शाकाहारी थाली की औसत कीमत में साल-दर-साल (YoY) 8 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि मांसाहारी थाली की कीमतें लगभग 6 प्रतिशत कम हुई हैं।
थाली पर महंगाई की मार हुई कम! (तस्वीर सौजन्य- istock)
सब्जियों के दाम में भारी कमी
शाकाहारी थाली की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण प्रमुख सब्जियों की कीमतों में बड़ी कमी है, जो पिछले साल खराब मौसम और फसल बीमारियों के कारण काफी बढ़ी थीं। टमाटर की कीमतें 24 प्रतिशत कम होकर 42 रुपये से घटकर 32 रुपये प्रति किलो हो गईं। आलू और प्याज की कीमतों में भी क्रमशः 20 प्रतिशत और 27 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई।
फसल उत्पादन में कमी के बावजूद सब्जियों के दाम में गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में आलू का उत्पादन लगभग 6 प्रतिशत घट गया था, जबकि रबी प्याज की पैदावार में लगभग 20 प्रतिशत की कमी आई थी। ये उत्पादन कम होने के बावजूद कीमतों में गिरावट का कारण पिछले साल के उच्च आधार प्रभाव और बाजार में आपूर्ति की स्थिति थी।
तेल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी से थाली की कुल लागत पर असर
सरकार द्वारा कच्चे खाद्य तेलों पर मूल कस्टम ड्यूटी घटाने के बावजूद, जून में वनस्पति तेल की कीमतों में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई। क्रिसिल इंटेलिजेंस के अनुसार, घटे हुए आयात मूल्य का लाभ अभी तक पूरी तरह से उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा है। इसके अलावा, एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 6 प्रतिशत की वृद्धि से थाली की कुल लागत में गिरावट सीमित रही।
चिकन की कीमतों में कमी
मांसाहारी थाली की कीमतें भी 3 प्रतिशत YoY घटीं, जिसका मुख्य कारण ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में गिरावट है, जो मांसाहारी थाली की लागत का लगभग आधा हिस्सा बनाती है।
महीने-दर-महीने कीमतों में बढ़ोतरी
रिपोर्ट ने यह भी बताया कि जून 2025 में महीने-दर-महीने (MoM) तुलना में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों थालियों की कीमतें बढ़ी हैं। शाकाहारी थाली की कीमतें 3 प्रतिशत और मांसाहारी थाली की कीमतें 4 प्रतिशत महंगी हुईं। टमाटर की कीमतों में 36 प्रतिशत MoM बढ़ोतरी मुख्य वजह रही, जो बाजार में आपूर्ति 8 प्रतिशत कम होने से हुई। आलू की कीमतें 4 प्रतिशत बढ़ीं, जबकि प्याज की कीमतें स्थिर रहीं। ब्रॉयलर चिकन की कीमतें भी 5 प्रतिशत MoM बढ़ीं, जिसका कारण अत्यधिक गर्मी के कारण पोल्ट्री सप्लाई में कमी और पक्षियों की मृत्यु दर बढ़ना है।
सालाना राहत के बावजूद खाद्य मुद्रास्फीति में अस्थिरता जारी
जहां साल-दर-साल कीमतों में गिरावट घरेलू परिवारों के लिए राहत प्रदान करती है, वहीं महीने-दर-महीने कीमतों में बढ़ोतरी खाद्य मुद्रास्फीति की अस्थिरता और बढ़ती चुनौती को दर्शाती है, खासकर ताजी सब्जियों और प्रोटीन स्रोतों में। (इनपुट एएनआई)
