Repo Rate EMI Connection: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अगस्त की मौद्रिक नीति बैठक (Monetary Policy Meeting) में रेपो रेट को एक बार फिर बिना किसी बदलाव के 5.5% पर स्थिर रखा है। आपने अक्सर सुना होगा कि RBI के रेपो रेट का असर आपकी लोन EMI पर पड़ता है। लेकिन फिलहाल RBI ने अगस्त की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट को छेड़ा तक नहीं यानी न बढ़ाया, न घटाया। 5.5% पर जमे इस रेट का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ता है, खासकर तब जब आपने बैंक से होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन लिया हुआ हो। लेकिन रेपो रेट और EMI का डायरेक्ट कनेक्शन क्या है? ये बहुत ही कम लोगो को पता है, ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि रिजर्व बैंक के रेपो रेट का असर आपके लोन EMI पर कैसे पड़ता है?
EMI Repo Rate (Pic Credit: iStock)
आखिर रेपो रेट होता क्या है?
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। जब रेपो रेट कम होती है, तो बैंक भी सस्ते कर्ज देते हैं जिससे आपकी EMI घटती है। और जब रेपो रेट बढ़ती है, तो लोन महंगा हो जाता है।
इस बार राहत क्यों नहीं मिली?
पिछले कुछ महीनों में RBI ने लगातार तीन बार ब्याज दरों में कटौती की थी, जिससे लोगों की EMI थोड़ी कम हुई थी। जून 2025 में भी RBI ने 0.50% की बड़ी कटौती की थी। इस बार विशेषज्ञों को उम्मीद थी कि RBI एक और राहत देगा और 0.25% की कटौती करेगा खासकर तब जब देश की महंगाई दर कुछ कम हुई है।
लेकिन अगस्त 2025 की नीति बैठक में RBI ने रेट कट नहीं किया। इसका मतलब है कि लोन लेने वालों को कोई राहत नहीं मिली और आपकी मौजूदा EMI जस की तस रहेगी।
रेपो रेट का EMI कनेक्शन
रेपो रेट घटने या बढ़ने का सबसे बड़ा असर उन लोन पर होता है जिनकी ब्याज दर फ्लोटिंग होती है। यानी जैसे ही रेपो रेट बदलती है, वैसे ही आपकी EMI भी बदल सकती है। मान लीजिए अगर आपने ₹30 लाख का होम लोन 8.5% ब्याज दर पर 20 साल के लिए लिया है, तो मौजूदा रेपो रेट (5.5%) पर आपकी EMI करीब ₹26,035 बनती है। लेकिन अगर RBI 0.25% रेट घटा देता और यह 5.25% हो जाती, तो EMI घटकर ₹25,298 हो सकती थी। यानी आपकी जेब से हर महीने ₹737 कम जाता।
रेपो रेट का असर किन लोन पर होता है?
RBI के रेपो रेट में बदलाव का सीधा असर सिर्फ उन्हीं लोन पर पड़ता है, जिनकी ब्याज दर फ्लोटिंग होती है और जो रेपो रेट से सीधे जुड़े होते हैं। होम लोन, कार लोन (अगर फ्लोटिंग रेट पर हो), पर्सनल लोन, MSME (छोटे बिज़नेस) लोन, एजुकेशन लोन, वहीं, कुछ लोन ऐसे होते हैं जिन पर रेपो रेट का कोई असर नहीं पड़ता। फिक्स्ड रेट लोन (जैसे कुछ कार या पर्सनल लोन) और वे लोन जो पुराने समय में लिए गए हैं और रेपो रेट से लिंक नहीं हैं।
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
- नई EMI कम नहीं होगी: जो लोग नया होम लोन या पर्सनल लोन लेने की सोच रहे थे, उन्हें फिलहाल सस्ते लोन की उम्मीद छोड़नी होगी, क्योंकि ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
- मौजूदा EMI में राहत नहीं: जिन लोगों के पास पहले से फ्लोटिंग रेट लोन हैं, उनकी भी EMI जस की तस रहेगी।
- बैंकिंग सेवाएं महंगी रहेंगी: लोन लेना या देना, दोनों ही अभी उतने ही महंगे बने रहेंगे।
- एफडी (Fixed Deposit) पर असर नहीं: रेपो रेट में बदलाव न होने से फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज भी पहले जैसा ही रहेगा।
इसके पीछे क्या वजहें रहीं?
इस बार के पॉलिसी फैसले पर अमेरिका के बढ़ते टैरिफ का असर साफ नजर आया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाले फार्मा प्रोडक्ट्स पर 250% तक टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय दबावों को देखते हुए RBI ने सतर्कता बरती है और पॉलिसी रुख ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा है।
हालांकि RBI ने रेट में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन दरें घटाने की संभावना को पूरी तरह खत्म भी नहीं किया। इसका मतलब है कि आने वाली पॉलिसी मीटिंग में रेपो रेट में कटौती हो सकती है, बशर्ते महंगाई काबू में रहे और वैश्विक हालात ज्यादा नहीं बिगड़ें।
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