रियल एस्टेट को लेकर इन दिनों खबरें आती रहती हैं कि ABC प्रोजेक्ट में लॉन्च होते ही करोड़ों के फ्लैट कुछ घंटे में बिक गए। XYZ रियल एस्टेट कंपनी ने प्रोजेक्ट लॉन्च करने के साथ 2,000 करोड़ के फ्लैट बेच दिए। वह भी तब, जब फ्लैट की शुरुआती कीमत 2 से 5 करोड़ रुपये थी। लेकिन सवाल यह है कि इतने महंगे फ्लैट को खरीद कौन रहा है? वहीं, दूसरी ओर एक्चुअल होम बायर्स का कहना है कि आसमान छूती कीमतों के कारण वे चाहकर भी अपना फ्लैट नहीं खरीद पा रहे। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई लोगों ने अपना दर्द बयां भी किया है कि उनकी मंथली सैलरी 1 लाख रुपये से ज्यादा है, लेकिन प्रॉपर्टी की कीमत करोड़ों में पहुंचने के कारण उनके लिए घर खरीद पाना अब एक सपना है। अब सवाल उठता है कि जब वास्तविक घर खरीदार, फ्लैट खरीद नहीं पा रहे हैं तो करोड़ों का फ्लैट खरीद कौन रहा है? रियल एस्टेट का यह ‘सोल्ड आउट’ गेम क्या है? अगर आप भी इन सवालों के जवाब जानना चाहते हैं, तो चलिए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं।
EOY की आड़ में हो रहा पूरा खेल
रियल एस्टेट में करोड़ों के फ्लैट बिकने का गेम के पीछे का राज जब हमने जानना चाहा तो EOY का खेल निकलकर आया। नोएडा, गुरुग्राम, यमुना एक्सप्रेस एरिया में काम कर रहे कई प्रॉपर्टी ब्रोकर ने अपनी पहचान गुप्त रखने पर EOY का पूरा खेल समझाया। आइए जानते हैं कि कैसे बिल्डर और ब्रोकर मिलकर इस EOY के जरिये करोड़ों का फ्लैट बेचने का गेम कर रहे हैं।
EOY क्या है?
Property Investment में EOY (End of Year) का मतलब होता है साल के अंत में आपकी प्रॉपर्टी की कीमत कितनी हुई। यह वह पैरामीटर है, जिसके जरिये मापा जाता है कि साल भर में आपकी संपत्ति की कीमत कितनी बढ़ी या घटी। निवेशक EOY का उपयोग Capital Appreciation यानी मूल्य वृद्धि को समझने के लिए करते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपने ₹1.5 करोड़ में एक फ्लैट खरीदा और साल के अंत में उसकी कीमत ₹2 करोड़ हो गई, तो EOY पर फ्लैट का मूल्य ₹2 करोड़ दर्ज होगा और आपकी निवेश पर लाभ ₹50 लाख होगा। यह निवेश की सालाना रिटर्न को दर्शाता है।
आसान भाषा में प्रॉपर्टी बाजार के खेल को समझते हैं—
प्रॉपर्टी ब्रोकर राकेश (बदला हुआ नाम) ने बताया कि दरअसल, रेरा आने के बाद प्रॉपर्टी बाजार में बड़ा बदलाव आया है। अब मार्केट में सिर्फ बड़े डेवलपर्स रह गए हैं। छोटे डेवलपर्स बाहर हो गए हैं। इसकी वजह रेरा का सख्त नियम, जमीन की ऊंची कीमत और लैंड खरीदने के लिए एकमुश्त भुगतान है। पहले नोएडा में जमीन 10 साल की किश्त पर मिल जाती थी लेकिन अब एकमुश्त भुगतान करना होता है। इसके चलते कुछ ही बड़े डेवलपर्स लैंड खरीद पा रहे हैं।
वहीं, कोरोना महामारी के बाद छोटे फ्लैट बनने बंद हो गए हैं। डेवलपर्स बड़े साइज के फ्लैट लॉन्च कर रहे हैं। 3बीएचके फ्लैट का साइज 2000 से 2500 वर्ग फीट से शुरू हो रहा है। कोरोना के बाद मांग में उछाल आने से पिछले 4 साल में प्रॉपर्टी की कीमत भी 3 गुनी तक बढ़ गई है। इसके चलते 3बीएचके फ्लैट की कीमत 1.5 करोड़ से लेकर 2.5 करोड़ के बीच शुरू हो रही है। आम होम बायर्स इस बजट का घर खरीद नहीं पा रहे हैं।
करोड़ों के फ्लैट कैसे कुछ घंटों में बिक रहा?
एक दूसरे ब्रोकर महेश (बदला हुआ नाम) ने बताया कि करोड़ों के फ्लैट बिकने के पीछे के खेल में डेवलपर्स, अंडरराइटर और ब्रोकर शामिल हैं। बड़े डेवलपर्स के पास निवेशकों की फौज, अंडरराइटर और ब्रोकरों का बड़ा कॉकटेल है। कोरोना से पहले कई प्रोजेक्ट में 2000 से 5000 यूनिट्स तक लॉन्च होते थे लेकिन आज के समय में अधिकांश प्रोजेक्ट में 500 से 700 यूनिट्स ही लॉन्च हो रहे हैं। डेवलपर्स यूनिट्स घटाकर बड़े साइज के फ्लैट लॉन्च कर रहे हैं।
आपके मन में यह सवाल होगा कि डेवलपर्स करोड़ों के फ्लैट कुछ घंटों में बेच कैसे दे रहे हैं? इसका सवाल यह है कि प्रोजेक्ट लॉन्च होने से पहले वे अपने खास निवेशकों को सॉफ्ट लॉन्चिंग की जानकारी देते हैं। अगर वो किसी प्रोजेक्ट को 12,000 रुपये प्रति स्क्वायर फीट पर एक महीने बाद लॉन्च करेंगे तो निवेशकों को बताएंगे कि हम आपको सॉफ्ट लॉन्चिंग में 10,000 रुपये प्रति स्क्वायर फीट का रेट देंगे। बड़े डेवलपर्स के पास निवेशकों का बड़ा बेस, ब्रोकर और अंडरराइटर की ताकत है। ये लोग सॉफ्ट लॉन्चिंग में 90% फ्लैट होल्ड करा देते हैं। इसके बाद डेवलपर्स प्रोजेक्ट को 12,000 रुपये प्रति स्क्वायर फीट पर लॉन्च करता है और कुछ घंटे में ही ‘सोल्ड आउट’ का बोर्ड लगा दिया जाता। इस तरह करोड़ों के फ्लैट कुछ घंटे में बिका हुआ दिखाया जा रहा है।
रियल एस्टेट
निवेशकों को मोटा मुनाफा का लालच दिखाया जा रहा
रियल एस्टेट एक्सपर्ट ने बताया कि रियल एस्टेट में निवेश करने वाले निवेशकों को मोटा मुनाफा का लालच दिखाया जा रहा है। अगर किसी निवेशक ने 2000 वर्ग फीट का कोई 3बीएचके फ्लैट, सॉफ्ट लॉन्चिंग में 10,000 रुपये प्रति स्क्वायर फीट के रेट से बुक किया। यानी फ्लैट की कीमत 2 करोड़ रुपये हुई। एक महीने बाद डेवलपर्स ने उसी प्रोजेक्ट में फ्लैट को 12,000 रुपये प्रति स्क्वायर फीट पर लॉन्च कर दिया। अब फ्लैट की कीमत 2.4 करोड़ रुपये हो गई। इस तरह निवेशकों को झटके में 40 लाख की कमाई हो गई। हालांकि, इसके पीछे झोल है। निवेशकों को इस 40 लाख कमाने के लिए फ्लैट को होल्ड करना होगा। अब निवेशकों को कम से कम 30% रकम का भुगतान बुकिंग से 1 महीने के अंदर करना होगा। निवेशक यही फंस रहे हैं।
40 लाख की कमाई करने के लिए फ्लैट को अगले कई साल तक होल्ड करना होगा। संभव है कि कीमत आगे भी बढ़े लेकिन रिस्क भी काफी है। प्रोजेक्ट तैयार होगा तो मार्केट कैसा रहेगा? क्या मार्केट में उस समय इतने महंगे फ्लैट के खरीदारी मिलेंगे? रियल एस्टेट में निवेश करने वाले निवेशक इस खेल को नहीं समझ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि कुछ मुट्ठी भर निवेशकों के दम पर इस मार्केट को बहुत दिन तक नहीं चलाया जा सकता है। मार्केट में प्राइस बबल बन रहा है। यह कभी भी फट सकता है। इसलिए रियल एस्टेट में निवेश बहुत ही सावधानी से करें।
