RBI MPC Review: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समीक्षा (Monetary Policy Review) की बैठक हुई। जिसमें कमिटी ने महंगाई दर को नियंत्रित करने के लिए लगातार 10वीं बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। इसे 6.5% पर अपरिवर्तित रखने का फैसला लिया। केंद्रीय बैंक ने महंगाई दर के आंकड़ों और भू-राजनीतिक तनावों को अर्थव्यवस्था की वृद्धि के लिए जोखिम के तौर पर बताया। हालांकि पिछली कुछ नीति समीक्षाओं से हटकर RBI ने अपने रुख को उदार से तटस्थ में बदल दिया है। निकट भविष्य में स्थिति कैसे सामने आती है, इस आधार पर यह संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक किसी भी रास्ते पर जाने के लिए तैयार है, अगर महंगाई दर कम रहती है तो हम भविष्य में दरों में कटौती देख सकते हैं। हालांकि वर्तमान में यह वेट एंड वॉच की स्थिति है। इस पर बैंक बाजार के सीईओ आदिल शेट्टी ने बताया कि एमपीसी के बैठक में लिए गए फैसले से कहां-कहां प्रभाव पड़ेगा।
RBI गर्वनर शक्तिकांत दास ने पेश की मौद्रिक नीति समीक्षा
होम लोन पर प्रभाव
होम लोन लेने वालों को ब्याज दरों में कटौती के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ सकता है, संभवतः दिसंबर तक। अगर महंगाई दर नियंत्रण में रहती है तो ब्याज दरों में कटौती की संभावना है। तब तक EMI मौजूदा स्तरों पर ही रहेगी।
FD पर प्रभाव
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) वाले लोगों के लिए अब उच्च दरों को लॉक करने का समय है। आने वाले महीनों में ब्याज दरों में गिरावट की उम्मीद है, इसलिए जब तक संभव हो अपने रिटर्न को सुरक्षित करना उचित है।
डेब्ट फंड पर प्रभाव
डेब्ट म्यूचुअल फंड को ब्याज दरों में गिरावट का लाभ मिलना चाहिए। जैसे-जैसे दरें गिरती हैं, इन फंडों में बॉन्ड का मूल्य बढ़ता है, जिससे निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलता है और अब उन पर विचार करने का एक अच्छा समय होगा।
इक्विटी फंड पर प्रभाव
इक्विटी और शेयर बाजारों का लॉन्गटर्म दृष्टिकोण सकारात्मक है। मंहगाई दर नियंत्रण में है और अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है, इसलिए व्यवसायों को अच्छा प्रदर्शन करना चाहिए। इसलिए, इक्विटी फंड लॉन्गटर्म निवेशकों के लिए एक मजबूत विकल्प बने हुए हैं।
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