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आर्थिक वृद्धि के लिए RBI कर सकता है नीतिगत दर में कटौती, बोले CII अध्यक्ष संजीव पुरी

Inflation: आरबीआई को खुदरा महंगाई दर दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के अध्यक्ष संजीव पुरी ने कहा कि सुस्त पड़ती आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के लिए अगले महीने नीतिगत दर रेपो में कटौती कर सकता है।

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भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के अध्यक्ष संजीव पुरी (तस्वीर-X)

Inflation: भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के अध्यक्ष संजीव पुरी ने बुधवार को कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सुस्त पड़ती आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के लिए अगले महीने नीतिगत दर रेपो में कटौती कर सकता है। उन्होंने आगामी बजट में श्रम-केंद्रित क्षेत्रों के लिए लक्षित हस्तक्षेपों के माध्यम से रोजगार सृजन को बढ़ावा देने की जरूरत भी बतायी। पुरी ने खाद्य महंगाई दर के उच्चस्तर पर बने रहने का जिक्र करते हुए कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की जरुरत का उल्लेख किया।

उन्होंने इसे भारतीय रिजर्व बैंक के महंगाई दर लक्ष्य ढांचे के तहत अलग करने का तर्क देते हुए कहा कि यह जलवायु परिवर्तन के कारण है और वास्तव में मौद्रिक नीति से इसका कोई लेना-देना नहीं है। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय बैंक को खुदरा महंगाई दर दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है।

आईटीसी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक ने यह भी उम्मीद जतायी की कि बीजेपी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार तीसरे कार्यकाल में बहुप्रतीक्षित श्रम सुधारों को आगे बढ़ाएगी। इससे अर्थव्यवस्था को लाभ होगा और अधिक नौकरियां सृजित होंगी।

इस महीने अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यभार संभालने के बाद भारत पर संभावित प्रभाव से जुड़े सवाल पर, सीआईआई अध्यक्ष ने कहा कि हमें उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जहां अवसर हैं और जहां हम वास्तव में अपनी ताकत के दम पर आगे बढ़ सकते हैं।

पुरी ने कहा कि ट्रंप क्या करेंगे, अमेरिका क्या करेगा? मुझे लगता है कि इस समय, इस बारे में कुछ कहना अटकलबाजी होगी। जब ऐसा होगा तो फिर हम देखेंगे। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक खर्च बढ़ रहा है और खपत में भी तेजी आनी चाहिए।

एक सवाल के जवाब में पुरी ने कहा कि सीआईआई को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा दर में कटौती की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि वास्तव में, हम यह भी सुझाव दे रहे हैं कि महंगाई दर का जो लक्ष्य रखा गया है, मुझे लगता है कि उसमें से खाद्य महंगाई दर को मौद्रिक नीति से अलग किया जाना चाहिए। खाद्य महंगाई दर जलवायु परिवर्तन के कारण है और वास्तव में मौद्रिक नीति से प्रभावित नहीं है।

पुरी ने कहा कि सीआईआई कई क्षेत्रों में श्रम सुधारों को देखने के लिए एक संस्थागत व्यवस्था स्थापित करने की भी सिफारिश करता है। पुरी ने परिधान, जूते, फर्नीचर, पर्यटन और रियल एस्टेट जैसे श्रम-गहन क्षेत्रों में लक्षित हस्तक्षेप का आग्रह किया और कहा कि पर्यटन को ‘बुनियादी ढांचे की स्थिति’ से लाभ हो सकता है जबकि परिधानों को उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) 2.0 योजना से फायदा हो सकता है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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