वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस मंच से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एनर्जी सेक्टर को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने दुनिया के ऊर्जा बाजार में नेतृत्व संभाल लिया है और देश की उत्पादन क्षमता तेल-गैस की मांग को संतुलित करने में निर्णायक भूमिका निभा रही है। ट्रंप ने कहा कि यूएस नेचुरल गैस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर है, जिससे घरेलू और वैश्विक स्तर पर सप्लाई बढ़ी है। उनके मुताबिक इसी वजह से गैस की कीमतें नीचे आ रही हैं और आने वाले समय में अमेरिका में गैसोलीन की कीमतें 2 डॉलर प्रति गैलन से भी कम हो सकती हैं।
गैस की कीमतों पर बोले ट्रंप
वेनेजुएला का किया जिक्र
अपने भाषण में ट्रंप ने यह भी कहा कि पिछले सप्ताह अमेरिका ने वेनेजुएला से करीब 50 मिलियन बैरल तेल “पिक अप” किया है। ट्रंप के मुताबिक इससे अमेरिकी सप्लाई मजबूत हुई है और ग्लोबल एनर्जी मार्केट में प्राइस प्रेशर कम होने की उम्मीद बढ़ी है।
हर बड़ी ऑयल कंपनी हमारे साथ
वेनेजुएला पर ट्रंप ने जोरदार टिप्पणी करते हुए कहा कि अमेरिका के नियंत्रण में आने के बाद देश “फैंटास्टिकली वेल” करेगा। ट्रंप का दावा रहा कि अगले छह महीनों में वेनेजुएला उतना पैसा कमा सकता है जितना उसने पिछले 20 साल में नहीं कमाया। उन्होंने यह भी कहा कि “हर बड़ी तेल कंपनी हमारे साथ आ रही है”, हालांकि इस दावे पर उन्होंने कोई डिटेल नहीं दी।
ग्लोबल स्थिरता हमने दी
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की एनर्जी पॉलिसी का लक्ष्य सिर्फ घरेलू ऊर्जा सुरक्षा नहीं, बल्कि वैश्विक बाजारों में स्थिरता लाना भी है। उनका तर्क था कि जब अमेरिका मजबूत ऊर्जा उत्पादन करता है तो उसका सकारात्मक असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।
अमेरिका और गैस
अमेरिका प्राकृतिक गैस (Natural Gas) के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा खिलाड़ी है। Energy Institute की Statistical Review of World Energy रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका दुनिया के कुल प्राकृतिक गैस उत्पादन का करीब 25% हिस्सा बनाता है और वैश्विक गैस खपत का लगभग 22% अकेले अमेरिका में होता है। यह दिखाता है कि ग्लोबल गैस सप्लाई और प्राइस ट्रेंड पर अमेरिका की भूमिका निर्णायक रहती है। हालांकि, एनर्जी एक्सपर्ट्स का मानना है कि तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव सिर्फ सप्लाई से तय नहीं होता। इसमें ओपेक+ के फैसले, वैश्विक मांग, जियोपॉलिटिक्स और ट्रेड पॉलिसी जैसे फैक्टर भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। ऐसे में ट्रंप के दावों की असली परीक्षा आने वाले हफ्तों में बाजार के ट्रेंड और डेटा से होगी।
