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Explained: क्या है पीएम गतिशक्ति योजना? कैसे बदल रही है देश के इंफ्रास्ट्रक्चर की तस्वीर

PM GatiShakti Explained: पीएम गतिशक्ति योजना सड़क, रेलवे, बंदरगाह और हवाई अड्डों को जोड़कर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में तेजी लाने, लॉजिस्टिक्स खर्च घटाने और देश की कनेक्टिविटी बेहतर बनाने का लक्ष्य रखती है।

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पीएम गतिशक्ति योजना: क्या है इसका मकसद, कैसे मिलेगा फायदा? (तस्वीर-AI)
Authored by: रामानुज सिंह
Updated Oct 15, 2026, 15:08 IST
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PM GatiShakti Explained : भारत में सड़कें, रेलवे लाइनें, हवाई अड्डे, बंदरगाह और माल ढुलाई से जुड़ी सुविधाएं देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं। लेकिन कई बार इन परियोजनाओं की योजना अलग-अलग बनाई जाती है। इससे एक ही जगह पर काम दोहराया जा सकता है, जरूरी सुविधाओं के बीच तालमेल की कमी रह सकती है और परियोजनाओं को पूरा होने में देरी हो सकती है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान शुरू किया। इसका उद्देश्य देश में बुनियादी ढांचे का विकास बेहतर तालमेल के साथ करना है, ताकि लोगों और सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना आसान हो सके। अक्टूबर 2026 में इस योजना ने अपने 5 साल पूरे कर लिए हैं। इन वर्षों में यह केवल बुनियादी ढांचे का नक्शा तैयार करने वाला प्लेटफॉर्म नहीं रहा, बल्कि अलग-अलग विभागों को एक साथ जोड़कर विकास की योजना बनाने का डिजिटल माध्यम बन गया है। आइए समझते हैं कि पीएम गतिशक्ति क्या है, यह कैसे काम करती है और इससे देश को क्या फायदा हो सकता है।

क्या है पीएम गतिशक्ति योजना?

पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान की शुरुआत 13 अक्टूबर 2021 को हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य देश में सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के विकास की योजना को एक साथ जोड़ना है। आसान शब्दों में समझें तो पहले अलग-अलग सरकारी विभाग अपनी जरुरत के हिसाब से परियोजनाओं की योजना बनाते थे। ऐसे में एक विभाग को दूसरे विभाग की योजना की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती थी। पीएम गतिशक्ति इस कमी को दूर करने की कोशिश करती है। इसके तहत विभिन्न विभागों की जरूरी जानकारियों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाता है, ताकि परियोजनाओं की योजना बनाते समय सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा सके। उदाहरण के लिए, अगर किसी इलाके में नया औद्योगिक क्षेत्र बनाया जाना है, तो वहां तक सड़क और रेलवे की सुविधा, माल ढुलाई के साधन, जमीन की उपलब्धता और आसपास की दूसरी सुविधाओं को एक साथ देखा जा सकता है। इससे परियोजना की योजना बनाना और उसे लागू करना आसान हो सकता है।

पीएम गतिशक्ति का मुख्य उद्देश्य क्या है?

पीएम गतिशक्ति योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य देश में परिवहन और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर तरीके से जोड़ना है। सरकार चाहती है कि सड़क, रेल और दूसरे परिवहन साधन एक-दूसरे के पूरक बनें। इससे लोगों के सफर के साथ-साथ सामान की ढुलाई भी आसान हो सकती है। पीएम गतिशक्ति के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं:-

  • परियोजनाओं में तालमेल:- अलग-अलग मंत्रालयों और राज्यों के विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना।
  • आखिरी छोर तक कनेक्टिविटी:- गांवों, उद्योगों और दूरदराज के इलाकों को मुख्य परिवहन नेटवर्क से जोड़ना।
  • समय की बचत:- परियोजनाओं की योजना बनाते समय संभावित समस्याओं को पहले ही पहचानना, ताकि देरी कम की जा सके।
  • संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल:- जमीन, पैसा और अन्य संसाधनों का उपयोग अधिक प्रभावी तरीके से करना।
  • माल ढुलाई को आसान बनाना:- सामान को फैक्टरी से बाजार, बंदरगाह और दूसरे राज्यों तक पहुंचाने में लगने वाला समय और खर्च कम करने में मदद करना।
इन प्रयासों से कारोबार करना आसान हो सकता है और देश के आर्थिक विकास को गति मिल सकती है।

GIS तकनीक से कैसे बनती है विकास की योजना?

पीएम गतिशक्ति की एक बड़ी खासियत इसका GIS यानी जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसे आसान भाषा में डिजिटल नक्शे पर आधारित ऐसी व्यवस्था कह सकते हैं, जिसमें किसी जगह से जुड़ी कई तरह की जानकारियां एक साथ देखी जा सकती हैं। इस प्लेटफॉर्म पर सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे, औद्योगिक क्षेत्र, जमीन की स्थिति और दूसरी जरूरी जानकारियों को जोड़ा जाता है। इससे अधिकारियों को यह समझने में मदद मिलती है कि किसी नई परियोजना के लिए कौन-सी जगह उपयुक्त होगी और वहां तक पहुंचने के लिए किन सुविधाओं की जरूरत पड़ेगी। उदाहरण के लिए, अगर किसी इलाके में नया रेलवे ट्रैक बिछाने की योजना है, तो अधिकारी डिजिटल नक्शे पर आसपास की सड़कें, आबादी, औद्योगिक क्षेत्र और जमीन से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं। इससे संभावित बाधाओं का पहले पता लगाने और बेहतर विकल्प चुनने में मदद मिलती है। 12 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म पर 23,493 से अधिक डेटा लेयर यानी अलग-अलग प्रकार की सूचनाओं की परतें जोड़ी जा चुकी थीं। इन जानकारियों का इस्तेमाल परियोजनाओं की योजना और उनके बेहतर क्रियान्वयन में किया जा सकता है।

किन-किन क्षेत्रों पर है योजना का फोकस?

पीएम गतिशक्ति के तहत बुनियादी ढांचे के सात प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इन्हें योजना के 7 इंजन भी कहा जाता है।

  • सड़कें:- शहरों, गांवों, औद्योगिक क्षेत्रों और बाजारों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ना।
  • रेलवे:- यात्रियों और मालगाड़ियों की आवाजाही के लिए रेल संपर्क को बेहतर बनाना।
  • बंदरगाह:- समुद्र के रास्ते होने वाले व्यापार और सामान की आवाजाही को सुविधाजनक बनाना।
  • जलमार्ग:- नदियों और दूसरे जलमार्गों के जरिए माल ढुलाई की संभावनाओं को बढ़ावा देना।
  • हवाई अड्डे:- हवाई संपर्क को बेहतर बनाना और विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंच आसान करना।
  • मास ट्रांसपोर्ट:- मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन जैसी सुविधाओं के विकास में तालमेल बढ़ाना।
  • लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर:- गोदाम, माल ढुलाई केंद्र और अन्य परिवहन सुविधाओं को बेहतर तरीके से जोड़ना।
इन 7 क्षेत्रों को एक साथ ध्यान में रखने से परिवहन के अलग-अलग साधनों के बीच संपर्क बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ताकत! (तस्वीर-AI)

भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ताकत! (तस्वीर-AI)

58 केंद्रीय मंत्रालयों और सभी राज्यों को जोड़ने की पहल

पीएम गतिशक्ति केवल एक मंत्रालय की योजना नहीं है। इसके तहत 58 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के साथ देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। इसका मकसद यह है कि किसी परियोजना पर काम करते समय संबंधित विभागों को एक-दूसरे की योजनाओं और जरुरतों की जानकारी मिल सके। उदाहरण के लिए, अगर किसी सड़क के निर्माण की योजना है और उसी क्षेत्र में रेलवे लाइन या बिजली से जुड़ा काम भी होना है, तो विभाग पहले से तालमेल बनाकर काम कर सकते हैं। इससे बार-बार खुदाई करने, एक ही काम दोहराने और निर्माण के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकती है। इस योजना में भारतमाला, सागरमाला, अंतर्देशीय जलमार्ग, ड्राई पोर्ट और उड़ान जैसी विभिन्न बुनियादी ढांचा पहलों के बीच भी तालमेल बनाने पर जोर दिया गया है।

पीएम गतिशक्ति के तहत परियोजनाओं की जांच कैसे होती है?

इस योजना को लागू करने के लिए तीन स्तरों वाली संस्थागत व्यवस्था बनाई गई है। इसका उद्देश्य परियोजनाओं की जांच, विभागों के बीच तालमेल और काम की निगरानी को व्यवस्थित बनाना है।

  • अधिकार प्राप्त सचिवों का समूह (EGoS):- इसकी अध्यक्षता कैबिनेट सचिव करते हैं। यह समूह योजना के क्रियान्वयन की निगरानी करता है और राष्ट्रीय मास्टर प्लान में जरूरी बदलावों पर विचार करता है।
  • नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG):- इसमें बुनियादी ढांचे से जुड़े मंत्रालयों और विभागों के नेटवर्क प्लानिंग प्रमुख शामिल होते हैं। यह समूह प्रस्तावित परियोजनाओं की जांच करता है, ताकि वे दूसरी योजनाओं से जुड़ सकें और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सके।
  • तकनीकी सहायता इकाई (TSU):- इसमें अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होते हैं। ये विशेषज्ञ परियोजनाओं का मूल्यांकन करने और योजना को तकनीकी सहायता देने में मदद करते हैं।

11 अगस्त 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप लगभग 18.66 लाख करोड़ रुपये की 396 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का मूल्यांकन कर चुका था। इनमें से 256 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी थी और 198 परियोजनाएं क्रियान्वयन के चरण में थीं। यहां ध्यान रखना जरूरी है कि किसी परियोजना का मूल्यांकन, उसे मंजूरी मिलना और उसका निर्माण शुरू होना अलग-अलग चरण हैं।

निजी कंपनियों को भी मिल रहा है डेटा का लाभ

अक्टूबर 2025 में पीएम गतिशक्ति प्लेटफॉर्म को एक विशेष व्यवस्था के जरिए निजी क्षेत्र के उपयोगकर्ताओं के लिए भी खोला गया। इसके तहत चुनिंदा गैर-संवेदनशील जानकारियों तक नियंत्रित पहुंच दी जाती है। इससे निजी कंपनियों को किसी नए उद्योग, गोदाम या अन्य व्यावसायिक परियोजना के लिए उपयुक्त जगह चुनने में मदद मिल सकती है। वे यह भी समझ सकती हैं कि किसी संभावित स्थान पर सड़क, रेलवे और दूसरी जरूरी सुविधाएं कितनी आसानी से उपलब्ध हैं। इस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सार्वजनिक डेटा का इस्तेमाल जगह की उपयुक्तता जांचने, परिवहन संपर्क समझने और परियोजना की संभावित योजना बनाने जैसे कामों में किया जा सकता है। हालांकि, सभी जानकारियां हर उपयोगकर्ता के लिए उपलब्ध नहीं होतीं। डेटा तक पहुंच संबंधित नियमों और अनुमतियों पर निर्भर करती है।

डिजिटल लॉजिस्टिक्स से कैसे मिलेगी मदद?

पीएम गतिशक्ति का उद्देश्य केवल निर्माण परियोजनाओं की योजना बनाना नहीं है। सामान की ढुलाई और परिवहन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना भी इसका अहम हिस्सा है। यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP) सरकारी लॉजिस्टिक्स प्रणालियों के बीच डिजिटल संपर्क स्थापित करता है। इससे अलग-अलग प्रणालियों में मौजूद जानकारी को आपस में जोड़ना आसान होता है। जुलाई 2026 तक ULIP ने 12 केंद्रीय मंत्रालयों की 46 सरकारी प्रणालियों को 142 API के जरिए जोड़ा था। API ऐसी तकनीक है, जिसकी मदद से अलग-अलग डिजिटल प्रणालियां एक-दूसरे के साथ जानकारी साझा कर सकती हैं। वहीं, लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (LDB) निर्यात और आयात से जुड़े कंटेनरों की निगरानी में मदद करता है। इससे माल की आवाजाही पर नजर रखना आसान हो सकता है। इसके अलावा, डिजिटल डैशबोर्ड परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखने और डेटा अपडेट करने में मदद करते हैं। इससे अधिकारियों को परियोजनाओं की स्थिति समझने और जरूरी फैसले लेने में सुविधा मिल सकती है।

गति शक्ति विश्वविद्यालय की क्या भूमिका है?

गति शक्ति विश्वविद्यालय (GSV) की स्थापना 2022 में परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में शिक्षा, प्रशिक्षण और शोध को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। यह विश्वविद्यालय रेलवे, सड़क परिवहन, समुद्री परिवहन और माल ढुलाई जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता विकसित करने पर काम करता है। यहां विद्यार्थियों और अधिकारियों को परिवहन व्यवस्था, आधुनिक तकनीक और बुनियादी ढांचे की योजना से जुड़े विषयों में प्रशिक्षण दिया जाता है। जुलाई 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय पीएम गतिशक्ति से जुड़े पाठ्यक्रमों के माध्यम से 2.4 लाख से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित कर चुका था। इस तरह की पहल का उद्देश्य ऐसे विशेषज्ञ तैयार करना है, जो भविष्य में परिवहन और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं की योजना बनाने और उन्हें बेहतर तरीके से लागू करने में योगदान दे सकें।

बिहार के खगड़िया-पूर्णिया कॉरिडोर का उदाहरण

पीएम गतिशक्ति के तहत डिजिटल योजना का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है, इसे बिहार के खगड़िया–पूर्णिया कॉरिडोर के उदाहरण से समझा जा सकता है। दी गई जानकारी के अनुसार, इस कॉरिडोर की योजना पांच आर्थिक केंद्रों और 11 लॉजिस्टिक्स केंद्रों को जोड़ने के उद्देश्य से बनाई गई है। इस तरह की कनेक्टिविटी से संबंधित क्षेत्रों में लोगों और सामान की आवाजाही को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। आर्थिक केंद्रों और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं को जोड़ने से व्यापार, कृषि और उद्योगों के लिए परिवहन संपर्क मजबूत करने की संभावनाएं बढ़ती हैं। हालांकि, किसी परियोजना का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करता है कि उसका निर्माण कब पूरा होता है, परिवहन सुविधाएं कितनी प्रभावी रहती हैं और उनका इस्तेमाल कितना होता है।

पीएम गतिशक्ति से आम लोगों को क्या फायदा हो सकता है?

इस योजना का असर केवल बड़ी परियोजनाओं या सरकारी विभागों तक सीमित नहीं है। बेहतर परिवहन नेटवर्क का लाभ आम लोगों, किसानों, कारोबारियों और उद्योगों को भी मिल सकता है।

  • किसानों के लिए:- कृषि उत्पादों को मंडियों और बाजारों तक पहुंचाने में आसानी हो सकती है।
  • विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए:- बेहतर सड़क और सार्वजनिक परिवहन संपर्क से यात्रा अधिक सुविधाजनक हो सकती है।
  • कारोबारियों के लिए:- सामान की ढुलाई में लगने वाला समय और खर्च कम करने में मदद मिल सकती है।
  • उद्योगों के लिए:- कच्चे माल को कारखानों तक पहुंचाना और तैयार उत्पादों को बाजार तक भेजना आसान हो सकता है।
  • पिछड़े और दूरदराज के क्षेत्रों के लिए:- बेहतर कनेक्टिविटी से आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है।
हालांकि, इन फायदों की वास्तविक उपलब्धि परियोजनाओं के समय पर पूरा होने, सही क्रियान्वयन और स्थानीय जरूरतों के अनुसार सुविधाएं विकसित करने पर निर्भर करेगी।

देश के विकास को जोड़ने वाला डिजिटल प्लान

पीएम गतिशक्ति ने भारत में बुनियादी ढांचे की योजना बनाने के तरीके को अधिक एकीकृत और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। GIS तकनीक, डिजिटल डेटा और अलग-अलग मंत्रालयों के बीच तालमेल के जरिए इसका लक्ष्य परियोजनाओं की योजना बेहतर बनाना, संसाधनों का सही इस्तेमाल करना और परिवहन संपर्क मजबूत करना है।

अगर इन प्रयासों को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो इससे माल ढुलाई की व्यवस्था बेहतर हो सकती है, परियोजनाओं में देरी कम करने में मदद मिल सकती है और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। इस तरह पीएम गतिशक्ति विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की दिशा में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण पहल बन सकती है।

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