Petrol Diesel News : देश के कुछ हिस्सों में हाल के दिनों में पेट्रोल और डीजल की मांग (Petrol Diesel demand) अचानक बढ़ गई है। इसकी वजह यह है कि थोक उपभोक्ता अब सीधे थोक आपूर्ति केंद्रों की बजाय खुदरा पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद रहे हैं। इस बदलाव के कारण कई पेट्रोल पंपों पर सामान्य से 20 से 30 प्रतिशत तक ज्यादा भीड़ देखी जा रही है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इसका एक बड़ा कारण थोक और खुदरा कीमतों में भारी अंतर है। कुछ जगहों पर डीजल की कीमत में दोनों बाजारों के बीच 40 से 42 रुपये प्रति लीटर तक का अंतर पाया गया है। इसी वजह से कई बड़े खरीदार सस्ता विकल्प पाने के लिए पेट्रोल पंपों की ओर रुख कर रहे हैं।
थोक खरीद से पेट्रोल पंपों पर बढ़ी ईंधन की मांग (तस्वीर-istock)
मांग बढ़ने से कुछ जगहों पर अस्थायी कमी
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि कुछ पेट्रोल पंपों पर अचानक मांग बढ़ने से अस्थायी रूप से ईंधन की कमी जैसी स्थिति बन गई है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि देश में ईंधन की कुल आपूर्ति पूरी तरह पर्याप्त और स्थिर है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल पंपों पर आमतौर पर केवल दो से तीन दिन का ही स्टॉक रखा जाता है। ऐसे में अगर किसी दिन अचानक 20 से 30 प्रतिशत ज्यादा बिक्री हो जाए, तो कुछ पंपों पर सप्लाई और मांग का संतुलन बिगड़ सकता है। यह समस्या आपूर्ति की कमी की वजह से नहीं, बल्कि वितरण और अचानक बढ़ी मांग के कारण हो रही है।
थोक और खुदरा कीमतों में बड़ा अंतर
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, थोक खरीदार जैसे बस ऑपरेटर, बिजली उत्पादन से जुड़े डीजल उपयोगकर्ता और बड़े औद्योगिक उपभोक्ता आमतौर पर थोक आपूर्ति केंद्रों से ईंधन खरीदते हैं। लेकिन मौजूदा समय में कुछ उपभोक्ता खुदरा पेट्रोल पंपों से खरीदारी कर रहे हैं क्योंकि वहां कीमतें तुलनात्मक रूप से कम हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल पंपों पर ईंधन अक्सर लागत से कम या नियंत्रित दरों पर उपलब्ध कराया जाता है, जबकि थोक आपूर्ति बाजार आधारित कीमतों पर होती है। इसी अंतर ने खरीद पैटर्न को प्रभावित किया है और खुदरा पंपों पर दबाव बढ़ा दिया है।
सरकार की निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था
संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। जिन क्षेत्रों में मांग असामान्य रूप से बढ़ी है, वहां आपूर्ति बनाए रखने के लिए राज्य प्रशासन और स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे घबराकर ईंधन की अनावश्यक खरीदारी न करें। सरकार का कहना है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल अपनी जरूरत के अनुसार ही ईंधन खरीदें। उनका कहना है कि देश में ईंधन की कोई वास्तविक कमी नहीं है और आपूर्ति व्यवस्था सामान्य रूप से काम कर रही है।
उत्पादन और भंडारण की स्थिति
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है। देश की रिफाइनरियां अपनी अधिकतम क्षमता पर काम कर रही हैं ताकि घरेलू मांग पूरी हो सके। डीजल उत्पादन की बात करें तो भारत में हर महीने लगभग एक करोड़ टन डीजल का उत्पादन होता है, जबकि खपत करीब 85 लाख टन के आसपास है। इसका मतलब है कि उत्पादन मांग से अधिक है।
एलपीजी आपूर्ति और पश्चिम एशिया संकट का असर
एलपीजी (रसोई गैस) की आपूर्ति को लेकर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। अधिकारियों के अनुसार, भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इसका बड़ा हिस्सा पहले पश्चिम एशिया क्षेत्र से आता था। हाल के क्षेत्रीय तनाव और पश्चिम एशिया संकट के कारण सप्लाई पर कुछ असर पड़ा है, लेकिन सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाकर स्थिति को संभालने की कोशिश की है। रिफाइनरियां अब प्रतिदिन करीब 46,000 से 47,000 टन एलपीजी का उत्पादन कर रही हैं।
सरकार की अपील
सरकार ने कहा है कि वह ईंधन आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है। साथ ही मांग प्रबंधन (डिमांड मैनेजमेंट) के जरिए घरेलू उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है, खासकर रसोई गैस जैसी जरूरी जरूरतों के लिए। अधिकारियों ने दोहराया कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। जनता से अपील की गई है कि वे अफवाहों से दूर रहें और केवल आवश्यकतानुसार ही ईंधन खरीदें।
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