Oil Prices : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब पूरी दुनिया के तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। ब्रेंट क्रूड का भाव छह सप्ताह के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमतों में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मध्य पूर्व में हालात और बिगड़ते हैं तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है, जिसका असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर
ब्रेंट और WTI क्रूड में जोरदार बढ़त
गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 2 प्रतिशत बढ़कर 96 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में भी इसमें 3 डॉलर से ज्यादा की तेजी आई थी। वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड लगभग 1.7 प्रतिशत बढ़कर 88.27 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। लगातार दूसरे दिन आई इस तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के कारण निवेशक खरीदारी बढ़ा रहे हैं।
अमेरिका ने फिर किए हमले
तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी सेना ने लगातार 12वीं रात ईरान से जुड़े ठिकानों और यमन के हूती विद्रोहियों पर हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले किसी जहाज पर हमला करता है तो अमेरिका हर बार जवाबी कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि ईरान की किसी भी आक्रामक कार्रवाई का कड़ा जवाब दिया जाएगा। इसके बाद दोनों देशों के बीच टकराव और गहरा गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी चिंता
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से में एक तेल टैंकर विस्फोट के बाद आग की चपेट में आ गया। उनके अनुसार यह जहाज ऐसे समुद्री रास्ते से गुजर रहा था जहां बारूदी सुरंगें बिछाई गई थीं। दो अन्य टैंकरों ने भी खतरे को देखते हुए अपना रास्ता बदल लिया। ईरान ने यह भी दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह उसके नियंत्रण में है और जब तक अमेरिकी कार्रवाई जारी रहेगी, किसी भी तेल टैंकर को उसकी अनुमति के बिना वहां से गुजरने नहीं दिया जाएगा।
हूती विद्रोहियों ने बढ़ाई मुश्किलें
ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी लाल सागर (रेड सी) में नया मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सऊदी अरब का तेल ले जाने वाले जहाजों को निशाना बनाने की धमकी दी है और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा की है। हूती विद्रोहियों का दावा है कि उन्होंने दो सऊदी तेल टैंकरों पर हमला किया। समुद्री सुरक्षा से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी झंडे वाले एक टैंकर Encelia को रेड सी में नुकसान पहुंचा है। हूती विद्रोहियों का यह भी कहना है कि उनकी चेतावनी के बाद करीब 10 जहाजों ने अपना रास्ता बदल लिया और वापस लौट गए। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
वैश्विक तेल आपूर्ति पर मंडरा रहा खतरा
एक्सपर्ट का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं तो दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। इसी आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार बढ़ा
दूसरी ओर, अमेरिका से आए आंकड़ों ने भी बाजार का ध्यान खींचा है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के अनुसार, पिछले सप्ताह देश में कच्चे तेल का भंडार 20 लाख बैरल बढ़ गया। इसकी वजह रिफाइनरियों में उत्पादन गतिविधियों का धीमा होना, कच्चे तेल के निर्यात में कमी और आयात में बढ़ोतरी रही। इससे पहले रॉयटर्स के सर्वे में विश्लेषकों ने अनुमान लगाया था कि भंडार में करीब 11 लाख बैरल की कमी आएगी, लेकिन वास्तविक आंकड़े इसके उलट रहे।
आगे क्या हो सकता है?
बाजार एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल तेल बाजार पूरी तरह मध्य पूर्व की घटनाओं पर नजर बनाए हुए है। यदि अमेरिका, ईरान और हूती विद्रोहियों के बीच तनाव और बढ़ता है या प्रमुख समुद्री मार्गों पर तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। इसका असर दुनिया भर में ईंधन की कीमतों, महंगाई और परिवहन लागत पर भी देखने को मिल सकता है। इसलिए आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार के लिए बेहद अहम रहने वाली है।
