अक्सर कपल्स, बिजनेस पार्टनर्स या माता-पिता अपने बच्चों के साथ मिलकर जॉइंट बैंक अकाउंट (Joint Bank Account) खोलना पसंद करते हैं। इसे सुविधा के नजरिए से काफी अच्छा माना जाता है क्योंकि घर के खर्च चलाने या सेविंग्स करने में इससे आसानी होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जॉइंट अकाउंट खोलना जितना आसान है, उसके कानूनी पेच उतने ही उलझे हुए हो सकते हैं? यदि आप बिना सोचे-समझे नियमों पर साइन कर देते हैं, तो भविष्य में न केवल आपके पैसों को लेकर विवाद हो सकता है, बल्कि आपके रिश्तों में भी दरार आ सकती है। इसलिए बैंक जाने से पहले यह समझना जरूरी है कि जॉइंट अकाउंट कितने तरह के होते हैं और इनमें पैसा निकालने का अधिकार किसके पास होता है।
ऑपरेशन मोड को समझना है सबसे जरूरी
जॉइंट अकाउंट खोलते समय बैंक आपसे 'मोड ऑफ ऑपरेशन' (Mode of Operation) पूछता है। यहीं पर सबसे ज्यादा लोग गलती करते हैं। इसके मुख्य रूप से दो बड़े प्रकार हैं: 'आइदर और सर्वाइवर' (Either or Survivor) और 'जॉइंटली' (Jointly)। अगर आप 'Either or Survivor' चुनते हैं, तो खाते में मौजूद दो लोगों में से कोई भी कभी भी पैसे निकाल सकता है और चेक साइन कर सकता है। लेकिन अगर आप 'Jointly' मोड चुनते हैं, तो पैसा निकालने या किसी भी ट्रांजेक्शन के लिए दोनों खाताधारकों के हस्ताक्षर होना अनिवार्य है। अक्सर कपल्स 'आइदर और सर्वाइवर' चुनते हैं ताकि इमरजेंसी में कोई भी पैसा निकाल सके, लेकिन अगर भरोसे में कमी हो, तो यही सुविधा विवाद का कारण बन जाती है।
कानूनी पेच और पैसों पर हक
कई लोग यह मान लेते हैं कि जॉइंट अकाउंट में पैसा आधा-आधा दोनों का है। कानूनी तौर पर, अगर खाते में जमा सारा पैसा एक ही व्यक्ति की कमाई का है, तो टैक्स देनदारी भी उसी की बनती है। अगर कल को दोनों खाताधारकों के बीच विवाद होता है या मामला कोर्ट तक जाता है, तो सिर्फ जॉइंट अकाउंट में नाम होने मात्र से आप उस पैसे के मालिक नहीं बन जाते। आपको यह साबित करना होगा कि उस पैसे में आपका कितना योगदान है। साथ ही, अगर किसी एक खाताधारक पर कोई कानूनी देनदारी या कर्ज है, तो बैंक उस जॉइंट अकाउंट को फ्रीज कर सकता है, जिससे दूसरे बेगुनाह पार्टनर को भी परेशानी उठानी पड़ सकती है।
मौत के बाद क्या होता है पैसों का?
जॉइंट अकाउंट का सबसे बड़ा फायदा तब होता है जब एक खाताधारक की मृत्यु हो जाती है। अगर आपने 'Either or Survivor' विकल्प चुना है, तो दूसरे पार्टनर को पैसा पाने के लिए लंबी कागजी कार्रवाई नहीं करनी पड़ती; वह जीवित रहते हुए खाते का संचालन जारी रख सकता है। लेकिन अगर मोड 'Jointly' है और एक की मृत्यु हो गई, तो खाता फ्रीज हो जाता है और जीवित पार्टनर को कानूनी उत्तराधिकारी के प्रमाण पत्र या डेथ सर्टिफिकेट के साथ बैंक के चक्कर काटने पड़ते हैं। इसलिए विशेषज्ञों की राय है कि जॉइंट अकाउंट में हमेशा 'नॉमिनेशन' (Nomination) जरूर करना चाहिए, ताकि तीसरे व्यक्ति (जैसे बच्चे) को भी जरूरत पड़ने पर हक मिल सके।
टैक्स और ब्याज का गणित
इनकम टैक्स के नजरिए से भी जॉइंट अकाउंट को समझना जरूरी है। खाते पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स की जिम्मेदारी आमतौर पर 'प्राइमरी अकाउंट होल्डर' (जिसका नाम पहले है) की होती है। यदि आप और आपके पार्टनर दोनों अलग-अलग टैक्स स्लैब में आते हैं, तो यह ध्यान रखना चाहिए कि खाते में पहला नाम किसका है। कभी-कभी टैक्स बचाने के चक्कर में लोग बुजुर्ग माता-पिता के साथ जॉइंट अकाउंट खोल लेते हैं, लेकिन इसके कानूनी और उत्तराधिकार संबंधी नियमों को नजरअंदाज करना भविष्य में भारी पड़ सकता है।
