ITR Filing : इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का सीजन शुरू हो चुका है। जून महीने में अधिकांश नौकरीपेशा लोगों को उनके नियोक्ता (Employer) की ओर से Form 16 मिल जाता है। ITR भरते समय कर्मचारी आमतौर पर Form 16 और Form 26AS की मदद से अपनी आय और कटे हुए टैक्स (TDS) की जांच करते हैं। आदर्श स्थिति में इन दोनों दस्तावेजों में TDS की राशि एक जैसी होनी चाहिए, लेकिन कई बार इनमें अंतर देखने को मिलता है। ऐसी स्थिति में टैक्सपेयर्स के सामने यह सवाल खड़ा हो जाता है कि किस दस्तावेज पर भरोसा करें और क्या कदम उठाएं।
इनकम टैक्स रिटर्न भरने से पहले Form 16, Form 26AS और AIS का मिलान जरूरी
क्या होते हैं Form 16 और Form 26AS?
Form 16 एक TDS सर्टिफिकेट है, जिसे नियोक्ता अपने कर्मचारियों को जारी करता है। इसमें कर्मचारी की सैलरी, उस पर कटे टैक्स और सरकार के पास जमा किए गए TDS की जानकारी होती है। आयकर नियमों के अनुसार, नियोक्ता को संबंधित वित्त वर्ष समाप्त होने के बाद 15 जून तक Form 16 जारी करना होता है। वहीं, Form 26AS एक समेकित टैक्स स्टेटमेंट (Consolidated Tax Statement) है। इसमें आपके PAN से जुड़ी टैक्स संबंधी सभी जानकारियां दर्ज होती हैं। इसमें TDS, TCS, एडवांस टैक्स, सेल्फ-असेसमेंट टैक्स, टैक्स रिफंड और कुछ बड़े वित्तीय लेन-देन की जानकारी शामिल रहती है।
TDS में अंतर क्यों आता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, Form 16 और Form 26AS में TDS का अंतर कई कारणों से हो सकता है। सबसे आम वजह यह है कि नियोक्ता ने TDS तो काट लिया हो, लेकिन उसकी जानकारी समय पर आयकर विभाग के पोर्टल पर अपडेट न की हो। इसके अलावा TDS रिटर्न भरते समय PAN नंबर की गलती, डेटा एंट्री में त्रुटि या संशोधित TDS रिटर्न का अभी तक अपडेट न होना भी इसकी वजह बन सकता है। कई बार तकनीकी या समय संबंधी कारणों से भी दोनों दस्तावेजों में आंकड़े अलग दिखाई देते हैं।
ITR भरते समय किस दस्तावेज पर भरोसा करें?
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि Form 16 और Form 26AS में TDS की राशि अलग-अलग दिख रही है, तो करदाता को मुख्य रूप से Form 26AS और AIS (Annual Information Statement) पर भरोसा करना चाहिए। इसकी वजह यह है कि आयकर विभाग इन्हीं रिकॉर्ड्स के आधार पर TDS क्रेडिट को मान्यता देता है। Form 16 एक महत्वपूर्ण दस्तावेज जरूर है, लेकिन यदि उसमें दर्ज जानकारी आयकर विभाग के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती, तो केवल Form 16 के आधार पर TDS क्रेडिट का दावा करना जोखिम भरा हो सकता है।
रिटर्न दाखिल करने के बाद गलती पता चले तो क्या करें?
अगर ITR दाखिल करने के बाद TDS में अंतर का पता चलता है, तो सबसे पहले अपने नियोक्ता या संबंधित डिडक्टर (Deductor) से संपर्क करें। उनसे TDS रिटर्न में सुधार कराने के लिए कहें ताकि सही जानकारी Form 26AS में दिखाई देने लगे। जब संशोधित जानकारी Form 26AS में अपडेट हो जाए, तब करदाता संशोधित आयकर रिटर्न (Revised Return) दाखिल कर सकता है। इससे सही TDS क्रेडिट मिल जाएगा और भविष्य में किसी तरह के विवाद या नोटिस की संभावना कम हो जाएगी।
अंतर को नजरअंदाज करने के क्या नुकसान हो सकते हैं?
अगर कोई करदाता Form 16 और Form 26AS के बीच मौजूद अंतर को नजरअंदाज करके ITR भर देता है, तो उसे कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आयकर विभाग कम TDS क्रेडिट मान सकता है, जिससे अतिरिक्त टैक्स देनदारी बन सकती है। इसके अलावा ब्याज लग सकता है, टैक्स नोटिस आ सकता है और रिफंड मिलने में भी देरी हो सकती है। कुछ मामलों में मामला जांच (Scrutiny) तक पहुंच सकता है।
ITR भरने से पहले ऐसे करें मिलान
एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि AY 2026-27 के लिए ITR दाखिल करने से पहले Form 16, Form 26AS और AIS का मिलान जरूर करें। सबसे पहले PAN, नाम और असेसमेंट ईयर जैसी मूल जानकारियों की जांच करें। इसके बाद Form 16 में दर्ज सैलरी और अन्य आय का मिलान AIS से करें। फिर TDS की राशि को Form 16, Form 26AS और AIS में लाइन-दर-लाइन जांचें। अगर कोई कमी, डुप्लीकेट एंट्री या गलत जानकारी मिले तो तुरंत नियोक्ता या डिडक्टर से संपर्क करें। सुधार होने और Form 26AS में अपडेट दिखाई देने के बाद ही ITR दाखिल करें। इससे सही TDS क्रेडिट मिलेगा और भविष्य में टैक्स नोटिस या विवाद से बचा जा सकेगा।
