इजरायल या ईरान कौन है ज्यादा अमीर? वॉर लंबा खिंचा तो किसकी बनेगी कब्र?

इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई की चेतावनी ने तनाव बढ़ा दिया है। अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा। इजरायल अपनी मजबूत इकॉनमी और अमेरिकी समर्थन के दम पर लंबी लड़ाई झेल सकता है, जबकि कड़े पश्चिमी प्रतिबंधों और महंगाई से जूझ रहे ईरान के लिए यह संघर्ष उसकी खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को पूरी तरह तबाह कर सकता है।

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर किए गए हालिया हमलों ने पूरे मध्य पूर्व को युद्ध की आग में झुलसा दिया है। ईरान ने इस लड़ाई को निर्णायक अंत तक ले जाने की धमकी दी है, ईरान ने साफ कर दिया है कि इस लड़ाई का अंत वह खुद करेगा। इन धमकियों के बीच एक बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं इस विनाशकारी झटके को कैसे सह पाएंगी और किसकी अर्थव्यवस्था ढह जाएगी? युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि खजाने से भी लड़े जाते हैं। आइए, आंकड़ों और वर्तमान परिस्थितियों के आईने में देखते हैं कि इस विनाशकारी युद्ध में किसकी आर्थिक नींव कितनी मजबूत है।

Iran Israel economy

आर्थिक आंकड़ों में इजरायल का दबदबा

आर्थिक ताकत के मामले में इजरायल और ईरान के बीच जमीन-आसमान का अंतर है। अनुमानों के अनुसार, इजरायल की जीडीपी (GDP) लगभग 666.4 अरब डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है, जबकि इसकी आबादी केवल एक करोड़ के आसपास है। इसका मतलब है कि प्रति व्यक्ति जीडीपी लगभग 60,000 डॉलर है, जो दुनिया के सबसे धनी देशों में से एक है। इसके विपरीत, 9 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले ईरान की जीडीपी केवल 375 अरब डॉलर के करीब है और प्रति व्यक्ति आय महज 4,000 डॉलर है। इजरायल को अमेरिका और पश्चिमी देशों का मजबूत आर्थिक समर्थन प्राप्त है, जो उसे लंबी लड़ाई लड़ने की क्षमता देता है।

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