ईरान की नजर हर महीने होने वाली मोटी कमाई पर, होर्मुज से गुजरने वाले हर जहाज के टोल से 20% बढ़ जाएगी जीडीपी

होर्मुज पर ईरान की 'टोल वसूली' अर्थव्यवस्था में हलचल मचा रही है। हर जहाज से $20 लाख वसूलकर ईरान अपनी जीडीपी 20% बढ़ाने की तैयारी में है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें और माल ढुलाई महंगी हो सकती है।

मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को एक महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है, और इस युद्ध का सबसे बड़ा असर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते 'होर्मुज स्ट्रेट' पर पड़ा है। पिछले एक महीने से यह जलमार्ग लगभग बंद है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है। हालांकि, पर्दे के पीछे चल रहे कूटनीतिक प्रयासों और भारी-भरकम 'टोल' के भुगतान के बाद अब सीमित संख्या में जहाजों को यहां से गुजरने की अनुमति दी जा रही है। युद्ध से आर्थिक रूप से कमजोर हो चुका ईरान अब इस मजबूरी को अपनी ताकत बनाने की कोशिश में है। ईरान चाहता है कि दुनिया इस जलमार्ग पर उसके एकाधिकार को मान्यता दे और उसे हर गुजरने वाले जहाज से आधिकारिक तौर पर टोल वसूलने का हक मिले। यदि ऐसा होता है, तो ईरान को हर महीने अरबों डॉलर की कमाई होगी, जो उसकी अर्थव्यवस्था के लिए किसी जैकपॉट से कम नहीं होगा।

Iran Hormuz Tax.

होर्मुज से कमाई करेगा ईरान

होर्मुज जलडमरूमध्य भौगोलिक रूप से ईरान और ओमान के नियंत्रण में है और यह अपनी सबसे संकरी जगह पर महज 33 किलोमीटर चौड़ा है। दुनिया की कुल तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। युद्ध शुरू होने से पहले यहाँ से हर दिन औसतन 100 से 135 जहाज गुजरते थे, जो रोजाना 2 करोड़ से ढाई करोड़ बैरल कच्चा तेल भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों तक पहुंचाते थे। अब ईरान ने अमेरिका के सामने जो दस बिंदुओं वाला शांति प्रस्ताव रखा है, उसमें सबसे प्रमुख मांग यही है कि होर्मुज पर उसके अधिकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी जाए। ईरान का मानना है कि इस रास्ते से होने वाली वसूली से वह युद्ध के कारण हुए नुकसान की भरपाई कर पाएगा और अपनी जीडीपी में करीब 20 प्रतिशत तक का बड़ा इजाफा कर सकेगा।

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