Iran Crisis: शेयर बाजार में कोहराम! सोना-चांदी भी फिसले, क्या निवेश का सुरक्षित ठिकाना बनेगा प्रॉपर्टी बाजार?

रियल एस्टेट एक्सपर्ट का कहना है कि अगर ईरान संकट लंब समय तक चला तो भारतीय रियल एस्टेट बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है। खासकर टियर-1 शहरों में रेजिडेंशियल और प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट को इसका फायदा मिल सकता है।

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी महायुद्ध ने पूरे मिडिल ईस्ट को अस्थिर कर दिया है। इसका असर भारत सहित दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ा है। भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई है। 'सेफ हेवन' कहे जाने वाले सोना-चांदी में गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। आमतौर पर संकट के समय निवेशक सोने और चांदी में निवेश करते हैं, लेकिन यह संकट कुछ अलग है। इस डर भरे माहौल में निवेशकों के मन में एक सवाल उठ रहा है कि क्या प्रॉपर्टी बाजार निवेशकों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन सकता है? आइए सही जवाब ढूंढते हैं।

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ईरान संकट और रियल एस्टेट

रियल एस्टेट को फायदा मिलने के 3 कारण

  • पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन: शेयर बाजार की अस्थिरता से बचने के लिए अमीर निवेशक (HNIs) अपना पैसा रियल एस्टेट में शिफ्ट कर सकते हैं।
  • रुपये की कमजोरी और NRIs: डॉलर के मुकाबले रुपये का 92 के पार जाना खाड़ी देशों और अमेरिका में रहने वाले भारतीयों (NRIs) के लिए 'सुनहरा मौका' है। उन्हें अब उन्हीं डॉलर्स के बदले भारत में ज्यादा बड़ी और लग्जरी प्रॉपर्टी मिल रही है।
  • मुद्रास्फीति (Inflation) के खिलाफ ढाल: कच्चा तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ेगी। रियल एस्टेट ऐतिहासिक रूप से महंगाई के खिलाफ सबसे अच्छी ढाल माना जाता है, क्योंकि संपत्ति के दाम और किराया महंगाई के साथ बढ़ते हैं।

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