Aggressive Hybrid Mutual Funds : अगर आप शेयर बाजार की अस्थिरता और अनिश्चितता को लेकर चिंतित हैं, लेकिन फिर भी लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न कमाना चाहते हैं, तो आक्रामक हाइब्रिड म्यूचुअल फंड आपके लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकते हैं। आपने अपने पसंदीदा म्यूचुअल फंड मैनेजर या एक्सपर्ट्स से सुना होगा कि आने वाले वर्ष में हाइब्रिड फंडों में मजबूती आने की संभावना है। हाइब्रिड म्यूचुअल फंड या ऐसी योजनाएं जो अधिकतर इक्विटी और डेट में निवेश करती हैं, अनिश्चित या अस्थिर माहौल में बेहतर प्रदर्शन करती हैं। म्यूचुअल फंड एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाजार में सतर्कता की संभावना है और निवेशकों को भी सावधानी से आगे बढ़ना चाहिए।
म्यूचुअल फंड: अस्थिर बाजार में आक्रामक हाइब्रिड फंड हो सकते हैं बेहतर विकल्प (तस्वीर-istock)
क्या हैं आक्रामक हाइब्रिड फंड?
ये फंड ऐसे म्यूचुअल फंड स्कीम्स होते हैं जो निवेशकों का पैसा इक्विटी (स्टॉक्स) और डेट (बॉन्ड्स, सरकारी प्रतिभूतियां आदि) में लगाते हैं। सेबी के नियमों के मुताबिक इन फंड्स को 65-80% हिस्सा शेयर बाजार में और 20-35% हिस्सा डेट इंस्ट्रूमेंट्स में लगाना होता है। इस मिक्स्ड पोर्टफोलियो का फायदा यह होता है कि अगर शेयर बाजार गिरता है तो डेट हिस्सा नुकसान को कुछ हद तक संतुलित कर देता है। ऐसे में निवेशक घबराकर पैसा नहीं निकालते और अपने निवेश को बनाए रख सकते हैं।
किसके लिए उपयुक्त हैं ये फंड?
म्यूचुअल फंड एक्सपर्ट इन फंड्स को ‘कंजर्वेटिव इक्विटी निवेशकों’ के लिए उपयुक्त मानते हैं। ये ऐसे निवेशक होते हैं जो जोखिम तो उठाना चाहते हैं लेकिन बहुत अधिक उतार-चढ़ाव से बचना चाहते हैं। ध्यान रहे, ये पूरी तरह कंजर्वेटिव निवेशक नहीं होते जो सिर्फ बैंक एफडी या बॉन्ड में पैसा लगाते हैं।
आक्रामक हाइब्रिड फंड के फायदे
- वोलैटिलिटी में स्थिरता: इक्विटी और डेट का संतुलन बाजार की अस्थिरता में राहत देता है।
- प्रॉफिट बुकिंग का फायदा: फंड मैनेजर समय-समय पर इक्विटी में से प्रॉफिट बुक करते रहते हैं ताकि पोर्टफोलियो का बैलेंस बना रहे। इससे लॉन्ग टर्म में रिटर्न बेहतर होते हैं।
- टैक्स लाभ: अगर आप खुद प्रॉफिट बुक करते हैं तो आपको टैक्स देना पड़ सकता है। लेकिन फंड लेवल पर टैक्स नहीं लगता, जिससे रिटर्न बेहतर हो सकता है।
- रेगुलर डिविडेंड की उम्मीद न करें: ये स्कीम्स रेगुलर इनकम के लिए नहीं हैं, बल्कि लॉन्ग टर्म वेल्थ बनाने के लिए हैं।
जोखिम की बात भी जरूरी है
हालांकि ये फंड वोलैटिलिटी को कम करते हैं, लेकिन इनमें 65% से अधिक हिस्सा इक्विटी में होता है। यानी ये पूरी तरह जोखिममुक्त नहीं हैं। बाजार में गिरावट का असर इन फंड्स पर भी पड़ सकता है। इसलिए थोड़ा धैर्य और लॉन्ग टर्म नजरिया जरूरी है।
अगर आप शेयर बाजार में पूरी तरह निवेश करने से घबरा रहे हैं, लेकिन अच्छा रिटर्न कमाना चाहते हैं, तो आक्रामक हाइब्रिड फंड एक समझदारी भरा कदम हो सकता है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें और इन फंड्स के मासिक अपडेट्स पर नजर रखें।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है, निवेश की सलाह नहीं है, अगर आपको म्यूचुअल फंड में निवेश करना है तो एक्सपर्ट से संपर्क करें। )
