Indian Type Foundry: आपने स्मार्टफोन और लैपटॉप के लिए अलग-अलग फॉन्ट देखे और यूज किए होंगे। मगर क्या आप जानते हैं कि इन्हें कौन डेवलप करता है? कुछ कंपनियां या स्टार्टअप गूगल-ऐप्पल समेत अन्य कंपनियों के लिए फॉन्ट डेवलप करती हैं। ऐसा ही एक स्टार्टअप है Indian Type Foundry, जिसकी शुरुआत सत्या राजपुरोहित ने की थी। सत्या राजस्थान के बोर्डिंग स्कूल में अपने क्लासमेट के प्रोजेक्ट्स के लिए शब्दों को खूबसूरती से लिखते थे। इसी कौशल की बदौलत उन्होंने एक डिजाइन फर्म शुरू की, जिसने दुनिया में 20 राइटिंग सिस्टम्स के लिए 450 फॉन्ट डेवलप किए हैं।
फॉन्ट बनाकर करोड़ों की कमाई
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2009 में शुरू किया स्टार्टअप
द बेटर इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सत्या को इस क्रिएटिव प्रोसेस (शब्दों को अलग अंदाज से लिखना) में मजा आता था। बाद में वे कारों और बाइकों के लिए रेडियम नंबर प्लेटों की तरफ आकर्षित हुए। उन्होंने अपने दोस्तों और परिवार को फ्री में अपनी सर्विस दी और फिर सत्या ने 2009 में अहमदाबाद में इंडियन टाइप फाउंड्री (आईटीएफ) की शुरुआत की।
450 से अधिक फॉन्ट फैमिली डेवलप कर दीं
सत्या ने आईटीएफ की शुरुआत सिर्फ एक फॉन्ट फैमिली (फेड्रा हिंदी) के साथ की। उसके बाद से उनके स्टार्टअप ने 450 से अधिक फॉन्ट फैमिली डेवलप की हैं, जिसमें लाइसेंस के लिए उपलब्ध 300 रिटेल फॉन्ट फैमिली और लगभग 150 कस्टम और ओपन-सोर्स फॉन्ट शामिल हैं।
आईटीएफ के कुछ सबसे लोकप्रिय फॉन्ट हैं कोहिनूर, वोल्टे, अखंड, पोपिन्स, सातोशी, जनरल सेन्स, स्वैट्ज़र, टेको और हिंद।
कौन-कौन है कस्टर और कितना है रेवेन्यू
आईटीएफ का सालाना रेवेन्यू लगभग 2 मिलियन डॉलर (लगभग 16.48 करोड़ रुपये) है। फॉर्च्यून 500 कंपनियों में से लगभग 300 इसकी ग्राहक हैं। इन ग्राहकों में Apple, गूगल, सैमसंग, सोनी, अमेजन, हुंडई, यूनिलीवर, टाटा प्ले, स्टार स्पोर्ट्स, एसबीआई, जी टीवी, महिंद्रा, डिज्नी, कोटक, डिस्कवरी और आज तक जैसे दिग्गज शामिल हैं।
मिल चुके हैं ये खास अवॉर्ड
2010 में सत्या को सोसाइटी ऑफ टाइपोग्राफिक अफिसिओनडोस द्वारा प्रेजेंट किया जाने वाला 'SoTA Catalyst Award' मिल चुका है। उन्हें लगातार तीन साल (2016, 2017 और 2018) तक फॉर्च्यून इंडिया की '40 अंडर 40' लिस्ट में जगह मिली।
