Indian Airlines: भारत की एयरलाइन कंपनी को फाइनेंशियल ईयर 2024-25 (FY25) में भारी नुकसान हुआ है, जिसमें टाटा ग्रुप के स्वामित्व वाली एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस को मिलाकर सबसे बड़ा घाटा हुआ है, गुरुवार को संसद को यह जानकारी दी गई। नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि एयर इंडिया और उसकी कम लागत वाली सहायक कंपनी एयर इंडिया एक्सप्रेस ने वित्तीय वर्ष के दौरान संयुक्त रूप से 9,568.4 करोड़ रुपये का प्री टैक्स घाटा दर्ज किया।
भारतीय एयरलाइंस को हुआ भारी घाटा (तस्वीर-istock)
इसमें से एयर इंडिया को 3,890.2 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, जबकि एयर इंडिया एक्सप्रेस जो वर्षों से लाभ में रही थी। वह 5,678.2 करोड़ रुपये के घाटे में चली गई। अन्य एयरलाइन कंपनियों में, नई एयरलाइन कंपनी आकाश एयर ने 1,983.4 करोड़ रुपये का टैक्स-पूर्व घाटा दर्ज किया, जबकि स्पाइसजेट ने वित्तीय वर्ष के दौरान 58.1 करोड़ रुपये का मामूली घाटा दर्ज किया। इसके विपरीत, देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने वर्ष के दौरान 7,587.5 करोड़ रुपये का कर-पूर्व लाभ दर्ज किया। जो घरेलू बाजार में इसके निरंतर प्रभुत्व को दर्शाता है।
अस्थायी आंकड़ों से भारतीय एयरलाइन कंपनियों के बढ़ते कर्ज का भी पता चला। एयर इंडिया का कर्ज 26,879.6 करोड़ रुपये था, जबकि इंडिगो का कर्ज इससे कहीं अधिक 67,088.4 करोड़ रुपये था। एयर इंडिया एक्सप्रेस, अकासा एयर और स्पाइसजेट पर क्रमशः 617.5 करोड़ रुपये, 78.5 करोड़ रुपये और 886 करोड़ रुपये का कर्ज था।
मोहोल ने स्पष्ट किया कि 1994 में एयर कॉर्पोरेशन अधिनियम के निरस्त होने के बाद से एयरलाइनों के वित्तीय और परिचालन संबंधी निर्णय, जिनमें लोन पुनर्गठन भी शामिल है, कंपनियों द्वारा स्वयं लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति, 2016 के तहत एक अनुकूल नीतिगत माहौल बनाकर एक सहायक भूमिका निभाती है। उन्होंने उड़ान जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया, जो क्षेत्रीय रूटों पर परिचालन करने वाली एयरलाइनों को वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं, जिससे वे अधिक लागत प्रभावी बनती हैं।
ये आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब घरेलू विमानन बाजार में वृद्धि के बावजूद एयरलाइनों की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। मोहोल ने संसद को बताया कि पिछले महीनों की तुलना में जुलाई में एयरलाइन क्षमता में कोई कमी नहीं देखी गई है, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि सरकार इस क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए चुनौतियों का समाधान करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
