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Explained: रूसी तेल पर ट्रंप के यू-टर्न से भारत को राहत, आखिर क्यों अहम है यह फैसला? 5 पॉइंट्स में समझें

India-US Relation Explained: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर संभावित टैरिफ फिलहाल टाल दिए हैं। इससे भारत को राहत मिली है। आइए विस्तार से समझते हैं।

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ट्रंप के फैसले से भारत को राहत, रूस से तेल खरीदने पर फिलहाल टला अमेरिकी टैरिफ का खतरा (तस्वीर-AI)
Authored by: रामानुज सिंह
Updated Oct 17, 2026, 12:20 IST
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India-US Relation Explained: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले से भारत को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण भारत पर अमेरिका की ओर से भारी टैरिफ लगाए जाने का खतरा पैदा हो गया था। अब ट्रंप ने संबंधित अमेरिकी कानून के कुछ प्रावधानों पर छूट देकर तत्काल कार्रवाई को टाल दिया है। इससे भारत के साथ-साथ चीन और तुर्किये जैसे देशों को भी राहत मिली है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब भारत अपनी ऊर्जा जरुरतों के लिए रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका रूस पर यूक्रेन युद्ध को लेकर आर्थिक दबाव बनाए रखना चाहता है। ऐसे में ट्रंप के सामने रूस पर प्रतिबंध जारी रखने और अपने देश में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। सवाल है कि ट्रंप के इस फैसले से भारत को क्या फायदा होगा? क्या इससे पेट्रोल-डीजल सस्ता हो सकता है? और क्या भारत पर अमेरिकी टैरिफ का खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है? आइए, 5 पॉइंट्स में समझते हैं।

1. भारत पर 100% तक टैरिफ का खतरा फिलहाल टला

ट्रंप ने 17 अक्टूबर 2026 को लिंडसे ओ. ग्राहम के नाम वाले रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े कानून के कुछ प्रावधानों पर छूट देने का फैसला किया। इस कानून के तहत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों पर भी कार्रवाई की जा सकती थी। कानून में अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया था। अगर भारत पर ऐसा टैरिफ लगाया जाता, तो अमेरिका को सामान बेचने वाली भारतीय कंपनियों के लिए कारोबार करना मुश्किल हो सकता था। इसे एक उदाहरण से समझें। अगर भारत की कोई कंपनी अमेरिका में 100 डॉलर का सामान बेचती है और उस पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगता है, तो टैरिफ जुड़ने के बाद उसकी कीमत 200 डॉलर तक पहुंच सकती है। इससे अमेरिकी खरीदार भारतीय सामान खरीदने से बच सकते हैं या कंपनी को अपनी कीमत घटानी पड़ सकती है। ट्रंप के ताजा फैसले से फिलहाल इस तरह की तत्काल कार्रवाई का खतरा टल गया है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति भविष्य में संबंधित उपायों को दोबारा लागू कर सकते हैं। इसलिए इसे स्थायी राहत नहीं माना जा सकता।

2. रूस से सस्ता तेल मिलने से भारत को फायदा

भारत अपनी जरुरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदकर पूरा करता है। कच्चे तेल को रिफाइनरी में साफ करके पेट्रोल, डीजल और दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट बनाए जाते हैं। इसलिए कच्चे तेल की खरीद कीमत भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए। इसके बाद रूस ने दूसरे देशों को तेल बेचने पर ज्यादा ध्यान दिया। भारत ने भी रूस से तेल की खरीद बढ़ाई। कई मौकों पर रूसी तेल भारतीय रिफाइनरी कंपनियों को दूसरे विकल्पों के मुकाबले कम कीमत पर मिला। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने रूस से 40.8 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा। यह भारत के कुल 134.7 अरब डॉलर के कच्चे तेल आयात का 30.3 प्रतिशत था। रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2026 तक भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। इन आंकड़ों से साफ है कि भारत के ऊर्जा कारोबार में रूस की भूमिका काफी बढ़ गई है। अगर अमेरिका रूसी तेल खरीदने के कारण भारत पर भारी टैरिफ लगाता, तो दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ सकता था। ट्रंप के फैसले से फिलहाल इस खतरे में कमी आई है।

3. क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम होंगी?

ट्रंप के फैसले का एक अहम पहलू ईंधन की कीमतों से जुड़ा है। अमेरिका में डीजल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई थीं। ऐसे में अमेरिकी सरकार के लिए ईंधन की आपूर्ति बढ़ाना महत्वपूर्ण हो गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मिलकर रूसी डीजल की आपूर्ति वैश्विक बाजार में बढ़ाने की योजना पर काम करना चाहते थे। अगर इसी दौरान रूस से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों पर कड़े टैरिफ लगाए जाते, तो इस योजना को लागू करना मुश्किल हो सकता था। वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ने से कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह फायदेमंद हो सकता है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तुरंत घट जाएंगी। भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के अलावा रुपये-डॉलर की विनिमय दर, टैक्स, परिवहन और अन्य लागतों से भी प्रभावित होते हैं। इसलिए रूसी तेल की आपूर्ति बढ़ने का फायदा उपभोक्ताओं तक कब और कितना पहुंचेगा, यह कई बातों पर निर्भर करेगा।

4. भारत के निर्यातकों और कारोबार को राहत

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध काफी महत्वपूर्ण हैं। भारतीय कंपनियां अमेरिका को कई तरह के प्रोडक्ट बेचती हैं। ऐसे में अगर भारत पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जाता, तो उसका असर केवल तेल कारोबार तक सीमित नहीं रहता। भारी टैरिफ से भारतीय प्रोडक्ट अमेरिकी बाजार में महंगे हो सकते थे। इससे भारतीय कंपनियों की बिक्री, कमाई और प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता पर असर पड़ सकता था। कुछ कंपनियों को दूसरे बाजार तलाशने पड़ सकते थे। ट्रंप के फैसले से फिलहाल इस संभावित दबाव से राहत मिली है। इससे भारत और अमेरिका को व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत जारी रखने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ और व्यापार से जुड़े सभी मतभेद खत्म हो गए हैं। रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर तत्काल टकराव टला है, लेकिन व्यापक व्यापारिक समझौते और दूसरे विवादों पर बातचीत आगे भी जारी रह सकती है।

5. चीन और तुर्किये को भी राहत, लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं

ट्रंप के फैसले से चीन और तुर्किये को भी राहत मिली है। चीन रूस से कच्चा तेल खरीदने वाला सबसे बड़ा देश है, जबकि तुर्किये भी रूस से ऊर्जा खरीदता है। इसलिए अमेरिकी कानून के तहत इन देशों पर भी कार्रवाई का खतरा था। अमेरिका इस कानून के जरिए रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव बनाना चाहता था। इसका मकसद रूस की आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करना और यूक्रेन युद्ध को लेकर मॉस्को पर दबाव बढ़ाना था। लेकिन टैरिफ लगाने से अमेरिका के अपने व्यापारिक संबंध भी प्रभावित हो सकते थे। भारत और चीन जैसे बड़े बाजारों के साथ तनाव बढ़ने से अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। ट्रंप ने फिलहाल संबंधित प्रावधानों पर छूट देकर तत्काल कार्रवाई को टाल दिया है। हालांकि, इस फैसले से अमेरिकी कांग्रेस में मतभेद पैदा हो सकते हैं। कानून के कुछ समर्थकों का मानना है कि रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध बनाए रखना जरूरी है, ताकि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए दबाव बनाया जा सके। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने आदेश में इस छूट को देश के राष्ट्रीय हित में बताया है और जरूरी प्रमाणन कांग्रेस को सौंपा है। इसके बावजूद भविष्य में टैरिफ और प्रतिबंध दोबारा लागू किए जाने की संभावना बनी हुई है।

रूस से तेल खरीद पर ट्रंप की नरमी (तस्वीर-AI)

रूस से तेल खरीद पर ट्रंप की नरमी (तस्वीर-AI)

भारत के लिए आगे क्या मायने हैं?

ट्रंप के फैसले से भारत को फिलहाल तीन स्तरों पर राहत मिली है। पहला, रूस से तेल खरीदने के कारण भारी अमेरिकी टैरिफ लगाए जाने का तत्काल खतरा टला है। दूसरा, भारत की रिफाइनरी कंपनियों के लिए रूसी तेल की खरीद जारी रखने को लेकर अनिश्चितता कुछ कम हुई है। तीसरा, भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में एक संभावित टकराव फिलहाल टल गया है। लेकिन आगे की स्थिति अमेरिका की रूस नीति, अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर निर्भर करेगी।

ट्रंप का यह फैसला भारत के लिए राहत जरूर लेकर आया है, लेकिन इसे रूस से तेल खरीदने पर अमेरिकी दबाव का स्थायी अंत नहीं माना जा सकता। भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि उसे किफायती ऊर्जा मिलती रहे और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों में भी स्थिरता बनी रहे।

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