India Economy Growth : भारत 2036 तक 20 ट्रिलियन (20 लाख करोड़) डॉलर की विशाल अर्थव्यवस्था बन सकता है। घरेलू ब्रोकरेज फर्म 'इक्किरस' (Equirus) की एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को अपनी विकास दर को करीब 14.2 प्रतिशत तक बढ़ाना होगा। इसके साथ ही भारतीय रुपये में हर साल 3 से 3.6 प्रतिशत की लगातार मजबूती जरूरी होगी। इक्किरस ने इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 20-सूत्रीय आर्थिक सुधार एजेंडा भी सामने रखा है।
20 कदम और 20 ट्रिलियन डॉलर! जानिए भारत को दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बनाने का मास्टर प्लान
अतीत का सफर और भविष्य की चुनौती
भारत की आर्थिक यात्रा पर नजर डालें तो देश को आजादी के बाद पहले 2 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) तक पहुंचने में 67 साल लग गए थे। हालांकि, साल 2014 के बाद अगले एक दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था करीब दोगुनी हो गई। वर्तमान में भारत की अर्थव्यवस्था करीब 3.7 ट्रिलियन डॉलर की है। इसे 20 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लिए अर्थव्यवस्था को आकार में करीब 5.5 गुना बढ़ाना होगा। इसके लिए भारत को सालाना करीब 18 प्रतिशत की डॉलर-नामांकित विकास दर बरकरार रखनी होगी, जो कि इसकी ऐतिहासिक 10-11 प्रतिशत की औसत दर से काफी अधिक है।
सर्विस सेक्टर बनेगा मेन ड्राइवर
एएनआई के मुताबिक रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि केवल विकास की गति ही नहीं, बल्कि इसका ढांचा भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। भविष्य में भारतीय अर्थव्यवस्था की मुख्य ताकत निर्माण या कृषि के बजाय सर्विस सेक्टर बनेगा। वर्तमान में भारत की जीडीपी में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 54 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर 65 प्रतिशत से अधिक करने की जरुरत होगी। इसका अर्थ है कि सेवा क्षेत्र को 2 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 11 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का होना पड़ेगा। दूसरी ओर, वैश्विक स्तर पर बढ़ते संरक्षणवाद के कारण विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र के सीमित रहने की संभावना है, जबकि तेजी से हो रहे शहरीकरण के कारण अर्थव्यवस्था में कृषि की हिस्सेदारी घटेगी।
आर्थिक और वित्तीय सुधारों का 20-सूत्रीय खाका
इक्किरस ने जिन 20 प्रमुख सुधारों का प्रस्ताव रखा है, वे अर्थव्यवस्था के विभिन्न हिस्सों को कवर करते हैं। इनमें ईंधन (पेट्रोल-डीजल) को जीएसटी के दायरे में लाना, राज्यों के लिए पूंजीगत खर्च (Capital Expenditure) की न्यूनतम सीमा तय करना, भारतीय रेलवे को शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्ट) करना और एक भारतीय सोवरेन वेल्थ फंड की स्थापना करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, मानव पूंजी और व्यापार में सुधार के लिए निजी शिक्षा क्षमता को बढ़ाना, निजी क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देना और कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार को मजबूत करना शामिल है।
टैक्स सुधारों से मिलेगी बड़ी वर्किंग कैपिटल
रिपोर्ट में कर प्रणाली (Tax Structure) से जुड़े नियमों को आसान बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि एडवांस टैक्स व्यवस्था को समाप्त करने से भारतीय व्यवसायों के पास करीब 10 ट्रिलियन (10 लाख करोड़) रुपये की कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) मुक्त हो सकती है। इसके अलावा, टीडीएस (TDS) की दर को घटाकर फ्लैट 5 प्रतिशत करने से 13.4 ट्रिलियन (13.4 लाख करोड़) रुपये की अतिरिक्त नकदी बाजार में आ सकती है। इन सुधारों से कंपनियों की नकद लागत कम होगी और व्यापार करना आसान होगा।
जीसीसी (GCC) और पर्यटन से रोजगार व विदेशी मुद्रा का उछाल
सेवा क्षेत्र को गति देने के लिए एक राष्ट्रीय ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) नीति की सिफारिश की गई है। इसके जरिए भारत में जीसीसी की संख्या को वर्तमान 1,800 से बढ़ाकर 5,000 करने का लक्ष्य है। इस एक कदम से 470 से 600 अरब डॉलर का आर्थिक प्रभाव पड़ेगा और देश में 2 से 2.5 करोड़ (20-25 मिलियन) नए रोजगार पैदा होंगे। इसके साथ ही, पर्यटन को बढ़ावा देने से भारत को हर साल लगभग 21 अरब डॉलर की अतिरिक्त विदेशी मुद्रा प्राप्त हो सकती है।
सुधारों का आर्थिक गणित और क्रियान्वयन की आवश्यकता
इक्किरस के अनुमान के अनुसार, इस पूरे रिफॉर्म पैकेज को लागू करने से देश को सालाना करीब 7.9 ट्रिलियन रुपये का सीधा आर्थिक लाभ होगा, जबकि इसे लागू करने की लागत लगभग 3.4 ट्रिलियन रुपये आएगी। इस प्रकार भारत को हर साल करीब 4.5 ट्रिलियन रुपये का शुद्ध लाभ होगा। रिपोर्ट के अंत में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि 20 ट्रिलियन डॉलर के इस बड़े मील के पत्थर को हासिल करना केवल किसी एक नीति पर निर्भर नहीं करेगा, बल्कि यह सभी मोर्चों पर इन सुधारों को सही तरीके से लागू करने पर निर्भर करता है।
