Income Tax Department: अभी तक बहुत सारे लोग इनकम टैक्स रिफंड का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच एक बड़ी जानकारी सामाने आई है। इनकम टैक्स विभाग ने फर्जी क्लेम कर टैक्स छूट पाने वाले टैक्सपेयर्स का पता लगाया है। इन टैक्सपेयर्स ने राजनीतिक दलों व एनजीओ को गलत डोनेशन देने के आधार पर टैक्स छूट का दावा पेश किया। अब आयकर विभाग ऐसे लोगों की पहचान कर शिकंजा कस रहा है। आयकर विभाग की सख्ती के बाद बहुत सारे टैक्सपेयर्स रीवाइज रिफंड फाइल कर रहे हैं।
इनकम टैक्स रिफंड
आयकर विभाग ने क्या कहा है?
इनकम टैक्स विभाग के मुताबिक, जांच में पता चला कि कुछ दलाल ने पूरे भारत में एजेंट नेटवर्क बनाए थे, जो इनकम टैक्स एक्ट के तहत डिडक्शन को बढ़ाकर या गलत दिखाकर कमीशन के आधार पर रिटर्न फाइल करते थे। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का कहना है कि इनमें से बड़ी संख्या में फर्जी क्लेम रजिस्टर्ड अनरिकॉग्नाइज्ड पॉलिटिकल पार्टियों और एनजीओ को दिए गए डोनेशन से जुड़े थे।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने X (पहले ट्विटर) पर एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि रजिस्टर्ड अनरिकॉग्नाइज्ड पॉलिटिकल पार्टियों और चैरिटेबल संस्थानों को डोनेशन के नाम पर बड़ी संख्या में फर्जी क्लेम किए गए हैं और बहुत सारे टैक्सपेयर्स ने अपनी टैक्स की देनदारी कम की है। साथ ही फर्जी रिफंड का भी दावा किया है। विभाग ने इनमें से कुछ पार्टियों और ट्रस्टों के खिलाफ फॉलो-अप सर्च किया और व्यक्तियों द्वारा फर्जी डोनेशन और कंपनियों द्वारा फर्जी CSR के संबंध में सबूत इकट्ठा किए हैं।
डेटा-एनालिटिक्स सिस्टम से मिली जानकारी
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने बताया है कि उसने अपने डेटा-एनालिटिक्स आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम को और मजबूत किया है, ताकि संदिग्ध टैक्स दावों की शुरुआती स्तर पर पहचान की जा सके। जांच में यह सामने आया कि कई टैक्सपेयर्स ने आयकर अधिनियम की धारा 80G और 80GGC के तहत या तो संदिग्ध संस्थाओं को दान दिखाया या फिर प्राप्तकर्ता संगठनों की प्रामाणिकता साबित करने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं दी।
CBDT की कार्रवाई के बाद, आकलन वर्ष 2025-26 के लिए बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स ने अपने रिटर्न संशोधित किए हैं, जबकि कई लोगों ने पिछले वर्षों के लिए अपडेटेड रिटर्न दाखिल कर स्वेच्छा से गलत दावे वापस ले लिए हैं।
