IMF Pakistan Loan Assistance: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान को करीब 1.2 अरब डॉलर की नई ऋण सहायता देने की मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान विनाशकारी बाढ़, आर्थिक संकट और महंगाई जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। नई ऋण सहायता इस बात का संकेत है कि मुश्किल हालात के बावजूद पाकिस्तान ने अपनी आर्थिक स्थिरता को किसी हद तक बनाए रखा है। न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक पाकिस्तान के प्रसिद्ध समाचार पत्र ‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह निर्णय आईएमएफ के कार्यकारी निदेशक मंडल द्वारा वाशिंगटन में आयोजित बैठक में लिया गया।
पाकिस्तान की टूटती अर्थव्यवस्था को आईएमएफ का सहारा (तस्वीर-istock)
दोहरी राहत योजना के तहत मंजूरी
आईएमएफ ने पाकिस्तान को यह राशि दो प्रमुख योजनाओं के अंतर्गत दी है। विस्तारित निधि सुविधा (EFF) – 37 महीने का कार्यक्रम, जलवायु-केंद्रित टिकाऊ स्थिरता सुविधा (RSF), इन दोनों योजनाओं को मिलाकर इसे दोहरे ‘ट्रैक बेलआउट’ का नाम दिया गया है। नई मंजूरी के बाद पाकिस्तान तत्काल ईएफएफ के तहत 1 अरब डॉलर और आरएसएफ के तहत 20 करोड़ डॉलर निकाल सकेगा।
आईएमएफ कार्यक्रम में पहले से शामिल है पाकिस्तान
पाकिस्तान कई वर्षों से आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है और इसी कारण वह लगातार आईएमएफ की सहायता पर निर्भर है। वर्तमान में पाकिस्तान आईएमएफ के 24वें कार्यक्रम पर काम कर रहा है, जिसके तहत पिछले साल उसे 39 महीनों में 7 अरब डॉलर देने पर सहमति बनी थी। इस नई मंजूरी के बाद पाकिस्तान को आर्थिक मोर्चे पर थोड़ी राहत जरूर मिलेगी, लेकिन उसके सामने अभी भी गंभीर सुधारों की जरूरत बनी हुई है।
आईएमएफ की सलाह
आईएमएफ के उप प्रबंध निदेशक एवं कार्यवाहक प्रमुख निगेल क्लार्क ने इस निर्णय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वैश्विक माहौल अभी भी अनिश्चित है। ऐसे में पाकिस्तान को अपनी वृहद आर्थिक स्थिरता को मजबूत रखने के लिए विवेकपूर्ण और जिम्मेदार नीतियों को जारी रखना होगा। उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान को अपनी आर्थिक वृद्धि को तेज और स्थिर करने के लिए आवश्यक सुधारों को बढ़ावा देना चाहिए। खासकर ऐसे सुधार जिनसे निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़े और विकास प्रक्रिया टिकाऊ हो सके।
इस्लामाबाद की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान सरकार ने इस मंजूरी को अपने सुधार प्रयासों के प्रति अंतरराष्ट्रीय विश्वास का संकेत बताया है। इस्लामाबाद के अधिकारियों का कहना है कि आईएमएफ का यह कदम दिखाता है कि पाकिस्तान सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि असली चुनौती अब शुरू होगी यानी इन प्रतिबद्धताओं को वास्तविक और स्थायी आर्थिक सुधारों में बदलना।
आईएमएफ की आलोचना
कुछ समय पहले आईएमएफ ने पाकिस्तान की खराब वित्तीय व्यवस्था को लेकर तीखी टिप्पणी की थी। संस्था ने कहा था कि पाकिस्तान में सरकारी खर्चों की निगरानी, नकदी प्रबंधन, और सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग में गंभीर खामियां हैं। आईएमएफ का यह भी कहना था कि करदाताओं के पैसे का व्यक्तिगत और राजनीतिक उपयोग कम किया जाना चाहिए और इसके लिए कड़ी जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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