UPI Rewards: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ऐप्स अब अपने कैशबैक और रिवॉर्ड पॉइंट्स प्रोग्राम को तेजी से बढ़ा रहे हैं। ऐसे में उन यूजर्स के लिए यह समझना जरूरी हो जाता है कि ये रिवॉर्ड सिस्टम कैसे काम करता है, जो अपने लेनदेन का अधिकतम फायदा उठाना चाहते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि किन महत्वपूर्ण कारकों से इन ऑफर्स की असली वैल्यू प्रभावित होती है और रिवॉर्ड स्ट्रक्चर में बदलाव के दौरान यूजर्स को किन पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए।
यूपीआई रिवॉर्ड्स को समझें: कैसे मिले अधिक फायदा (तस्वीर-istock)
सिर्फ कैशबैक प्रतिशत पर न जाएं
UPI ऐप्स अब बड़े कैशबैक और रिवॉर्ड पॉइंट्स के बारे में बताते हैं, लेकिन असली फायदा तभी मिलता है जब आप पॉइंट्स की असली कीमत समझें। कई ऐप्स 1 से 2% कैशबैक दिखाते हैं, लेकिन उनके कॉइन या पॉइंट्स की वैल्यू अलग-अलग होती है। कुछ प्लेटफॉर्म 1 कॉइन बराबर 1 रुपया देते हैं, जबकि कुछ में एक कॉइन की कीमत सिर्फ 40 पैसे होती है। इसलिए किसी भी बड़े पेमेंट से पहले रिवॉर्ड प्रतिशत और कॉइन की असली वैल्यू दोनों को जरूर देखें। रिवॉर्ड्स को फ्री का पैसा न समझें, बल्कि एक तरह के निवेश की तरह देखें। अगर आपको तुरंत कैश चाहिए तो इंस्टेंट कैशबैक सही है, लेकिन प्लान किए गए खर्चों के लिए वाउचर या वैल्यू-बेस्ड रिवॉर्ड ज्यादा फायदेमंद होते हैं।
किन कैटेगरी पर मिलते हैं ज्यादा रिवॉर्ड
एक्सपर्टस के मुताबिक हर तरह के पेमेंट पर समान रिवॉर्ड नहीं मिलता। यात्रा, शॉपिंग, डाइनिंग और मूवी जैसी डिस्क्रेशनरी कैटेगरी पर आमतौर पर ज्यादा रिवॉर्ड मिलता है क्योंकि इन पर ऐप्स की पार्टनरशिप और प्रमोशन होते हैं। कई ऐप्स सब्सक्रिप्शन, इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन और फूड डिलीवरी पर भी अच्छे रिवॉर्ड देते हैं। जरूरी बिल जैसे मोबाइल रिचार्ज और बिल पेमेंट पर आमतौर पर कम रिवॉर्ड मिलता है। लेकिन कुछ प्लेटफॉर्म इन पर भी अच्छी इंसेंटिव देते हैं क्योंकि उन्हें इन सेवाओं पर कमीशन मिलता है। ऑनलाइन शॉपिंग में यूजर को अक्सर ज्यादा फायदा मिल जाता है, क्योंकि व्यापारी UPI पेमेंट पर प्रीपेड डिस्काउंट देते हैं ताकि COD और रिटर्न की लागत कम हो सके।
रिवॉर्ड लेते समय प्राइवेसी का ध्यान कैसे रखें
रिवॉर्ड लेते समय सुरक्षा से कोई समझौता करने की जरुरत नहीं है। भरोसेमंद ऐप ही इस्तेमाल करें, अनावश्यक परमिशन न दें और किसी भी ऐसे ऑफर से बचें जो मैसेज या निजी फाइलों तक पहुंच मांगता हो। अपने UPI PIN को गोपनीय रखें, फोन में लॉक सेट करें और ऐप्स को समय-समय पर अपडेट करें। भारत की पेमेंट सिस्टम NPCI के कड़े नियमों के तहत काम करती है, इसलिए यूजर को सिर्फ वही परमिशन देनी चाहिए जो जरूरी हो। बैकग्राउंड एक्सेस को भी कंट्रोल किया जा सकता है। उनका कहना है कि आज के सिस्टम में प्राइवेसी से समझौता किए बिना रिवॉर्ड हासिल किए जा सकते हैं।
बदलते रिवॉर्ड स्ट्रक्चर पर कैसे नजर रखें
क्योंकि UPI ऐप्स अपने रिवॉर्ड नियमों में बार-बार बदलाव करते रहते हैं, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सभी अपडेट्स पर नजर रखने की जरुरत नहीं है। बस कुछ मुख्य चीजों को ट्रैक करें। जैसे कैशबैक प्रतिशत, कॉइन-टू-कैश की वैल्यू में बदलाव, किन कैटेगरी पर ज्यादा रिवॉर्ड मिल रहा है, ऐप में चल रहे शॉर्ट-टर्म ऑफर, इन कुछ संकेतों पर ध्यान देकर यूजर्स आसानी से बेहतरीन रिवॉर्ड ऑफर पहचान सकते हैं और अपने भुगतान को अधिक लाभदायक बना सकते हैं।
