दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और खासकर मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध की स्थिति ने ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को एक बड़ा मुद्दा बना दिया है। ऐसे में हर देश अपनी जरूरत के लिए 'स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व' (SPR) यानी कच्चे तेल का आपातकालीन भंडार बनाकर रखता है। भारत के दो पड़ोसी देश पाकिस्तान और चीन इस मामले में एक-दूसरे से बिल्कुल अलग स्थिति में खड़े हैं। मार्च 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जहां चीन दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार बनाने की होड़ में है, वहीं पाकिस्तान अपनी आर्थिक तंगहाली के कारण बेहद नाजुक स्थिति में है। आइए जानते हैं कि अगर आज सप्लाई चेन पूरी तरह ठप हो जाए, तो ये दोनों देश कितने दिनों तक बिना आयात के सरवाइव कर पाएंगे।
चीन के पास कितने दिन का ऑयल रिजर्व
चीन दुनिया का सबसे बड़ा कच्चे तेल का आयातक देश है। अपनी भारी-भरकम औद्योगिक जरूरतों और भविष्य के युद्धों की आशंका को देखते हुए चीन ने पिछले एक दशक में अपना तेल भंडार बहुत तेजी से बढ़ाया है। ताजा आंकड़ों (मार्च 2026) के मुताबिक, चीन के पास लगभग 1.2 अरब बैरल (1.2 Billion Barrels) से ज्यादा का कच्चा तेल जमा है। यह भंडार इतना विशाल है कि अगर अंतरराष्ट्रीय सप्लाई पूरी तरह बंद हो जाए, तो भी चीन 100 से 120 दिनों तक अपनी अर्थव्यवस्था को बिना किसी रुकावट के चला सकता है। चीन ने अपनी तटीय सीमाओं और भूमिगत गुफाओं में 11 नए विशाल स्टोरेज सेंटर बनाए हैं, जो उसे किसी भी वैश्विक संकट के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा कवच देते हैं।
पाकिस्तान के पास दिन का तेल बचा
चीन के उलट, पाकिस्तान की स्थिति काफी चिंताजनक है। पाकिस्तान की ऊर्जा सुरक्षा उसकी खराब आर्थिक स्थिति और विदेशी मुद्रा भंडार की कमी के कारण हमेशा खतरे में रहती है। वर्तमान रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के पास केवल 28 से 30 दिनों का तेल रिजर्व बचा है। पाकिस्तान अपनी तेल की जरूरतों के लिए पूरी तरह से सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों से मिलने वाली क्रेडिट लाइन्स (उधार तेल) पर निर्भर है। पाकिस्तान के पास चीन या भारत की तरह बड़े स्ट्रैटेजिक रिजर्व बनाने के लिए न तो पर्याप्त फंड है और न ही बुनियादी ढांचा। यही कारण है कि संकट बढ़ते ही पाकिस्तान में सबसे पहले फ्यूल की राशनिंग और बाजारों को जल्दी बंद करने जैसे कदम उठाने पड़ते हैं।
अगर भारत से तुलना करें, तो भारत के पास अपनी रिफाइनरियों और अंडरग्राउंड गुफाओं (जैसे विशाखापत्तनम और पादुर) को मिलाकर लगभग 50 से 60 दिनों का तेल स्टॉक रहता है। जापान और दक्षिण कोरिया जैसे विकसित एशियाई देशों के पास 200 से 250 दिनों का भंडार है। इस पूरी तस्वीर में चीन सबसे सुरक्षित नजर आता है, क्योंकि उसका 120 दिनों का रिजर्व उसे किसी भी लंबी लड़ाई या समुद्री नाकाबंदी को झेलने की ताकत देता है। वहीं पाकिस्तान के लिए 30 दिन की सीमा का मतलब है कि एक महीने की देरी भी पूरे देश के पहियों को जाम कर सकती है।
