Indian Households Savings & Debt: पिछले दो सालों में भारतीय परिवारों की बचत में 4% की गिरावट आई है। भारतीय परिवारों ने अपनी बचत को घरों और गाड़ी जैसी संपत्ति के लिए खर्च कर दिया। हालाँकि इससे लोगों का कर्ज बढ़ गया है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि कर्ज़ चुकाने की भारतीयों की क्षमता कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अधिक है। घरेलू बचत पर आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि यह 2020-21 में 11.5 प्रतिशत से गिरकर 2022-23 में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की 5.1 प्रतिशत रह गई। ये लॉन्ग टर्म के वार्षिक औसत 7.0-7.5 प्रतिशत से काफी कम है। वित्तीय देनदारियों (घरों द्वारा लिया गया कर्ज) में तेजी से वृद्धि हुई। ये 2021-22 में जीडीपी के 3.8 प्रतिशत से बढ़कर 2022-23 में 5.8 प्रतिशत हो गई। यही कारण है कि परिवारों की बचत घटी है।
भारत में कितना है डेब्ट सर्विस रेशियो
बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के आंकड़ों और भारत के डेब्ट सर्विस रेशियो पर आरबीआई के अपने अनुमान की तुलना करने पर पता चलता है कि भारत का घरेलू डेब्ट सर्विस रेशियो (सही से कर्ज चुकाना) कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है।
मार्च 2023 तक भारत का ये अनुपात 6.7 प्रतिशत है जो अमेरिका के 7.8 प्रतिशत, जापान के 7.5 प्रतिशत, यूके के 8.5 प्रतिशत, कनाडा के 14.3 प्रतिशत और कोरिया के 14.1 प्रतिशत से कम है।
मार्च 2021 के मुकाबले घट गया डेब्ट सर्विस रेशियो
गौरतलब है कि मार्च 2023 के अंत में भारतीय परिवारों का डेब्ट सर्विस अनुपात 6.7 प्रतिशत होने का अनुमान है, जो मार्च 2022 में 6.6 से बढ़ गया है। लेकिन मार्च 2021 में 6.9 प्रतिशत से अभी भी कम है।
