Strait of Hormuz Closer Impact on India: मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की वजह से ऑयल-गैस सप्लाई का संकट गहरा हो गया है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से यह बड़ा जोखिम है। क्योंकि, रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर लंबे समय तक सप्लाई बाधित होती है, तो सीमित भंडार के कारण भारत एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे ज्यादा जोखिम की स्थिति में रह सकता है।
भारत के पास बचा सिर्फ 25 दिन का रिजर्व
भारत की बढ़ती निर्भरता, सीमित भंडार
जनवरी के आंकड़ों के अनुसार भारत अपने कुल क्रूड ऑयल आयात का करीब 55 फीसदी मिडिल ईस्ट से खरीद रहा है, जो 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है। यह आयात करीब 27.4 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। रूस से खरीद घटने के बाद यह निर्भरता और बढ़ी है। हालांकि, भारत के पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप पुरी के मुताबिक देश के पास कुल मिलाकर 74 दिन की मांग पूरी करने की भंडारण क्षमता है। हालांकि, रिपोर्ट में रिफाइनरी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि उपलब्ध स्टॉक केवल 20 से 25 दिन की जरूरत पूरी कर सकता है। यही अंतर भारत को सबसे ज्यादा असुरक्षित बनाता है।
| देश | आयात निर्भरता | कितने दिन का रिजर्व उपलब्ध | मौजूदा स्थिति |
|---|---|---|---|
| भारत | 55% | आधिकारिक क्षमता 74 दिन, सूत्रों का दावा 20–25 दिन | निर्भरता 2022 के बाद उच्चतम |
| चीन | 50% | 90 दिन | 90 करोड़ बैरल रणनीतिक भंडार |
| जापान | 95% | 254 दिन | मांग लगातार घट रही |
| दक्षिण कोरिया | 70% | 208 दिन | सरकारी और निजी रिजर्व |
| अमेरिका | 5% | 200 दिन | आयात निर्भरता काफी कम |
चीन के पास मजबूत बफर
चीन भी अपनी लगभग आधी जरूरत मिडिल ईस्ट से पूरी करता है, लेकिन उसके पास बड़े रणनीतिक भंडार हैं। विश्लेषकों का अनुमान है कि चीन के पास करीब 90 करोड़ बैरल का स्टॉक है, जो लगभग तीन महीने के आयात के बराबर है। इसके अलावा फ्लोटिंग स्टोरेज में भी पर्याप्त तेल मौजूद है। इस वजह से अल्पकालिक झटकों को झेलने की उसकी क्षमता भारत से बेहतर मानी जा रही है।
जापान और दक्षिण कोरिया की तैयारी
जापान अपनी 95 फीसदी तेल जरूरत मिडिल ईस्ट से पूरी करता है, जबकि दक्षिण कोरिया की निर्भरता करीब 70 फीसदी है। इसके बावजूद जापान के पास 254 दिन और दक्षिण कोरिया के पास 208 दिन की खपत के बराबर भंडार मौजूद है। यह मजबूत बफर संभावित सप्लाई शॉक के असर को सीमित कर सकता है।
वैश्विक कीमतों पर दबाव
ब्रेंट क्रूड में हाल में करीब 7 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है। यदि होर्मुज मार्ग लंबे समय तक बाधित रहा, तो वैश्विक बाजार में हर अतिरिक्त बैरल के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए आयात बिल, महंगाई और चालू खाता घाटा तीनों पर दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिका की स्थिति
अमेरिका ने हाल के वर्षों में मिडिल ईस्ट तेल पर अपनी निर्भरता घटाई है और वह वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों को स्थिर करने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने संकेत दिया है कि ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं। भारत के सामने विकल्प के तौर पर अफ्रीका, अमेरिका या रूस से अतिरिक्त आपूर्ति मंगाने का रास्ता है, लेकिन इसमें भी चुनौतियां बनी रहेंगी।
लंबी खिंची लड़ाई तो 150 तक जाएगा क्रूड
ICIS के मुताबिक होर्मुज अगर कुछ महीनों तक बाधित रहता है, तो ग्लोबल ऑयल सप्लाई में 1 से 1.5 करोड़ बैरल प्रतिदिन तक की कमी आ सकती है। इस स्थिति में ब्रेंट क्रूड का भाव 110 ते 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। यह स्थिति खासतौर पर भारत जैसे एशियाई देशों पर भारी आर्थिक दबाव बनाएगी, क्योंकि इनकी क्रूड आयात निर्भरता काफी ज्यादा है। धीरे-धीरे यह स्थिति में वैश्विक मंदी में बदल सकती है।
