बिजनेस की दुनिया में फर्श से अर्श तक पहुंचने की कई कहानियां आपने सुनी होंगी, लेकिन अडाणी ग्रुप (Adani Group) के चेयरमैन गौतम अडाणी का सफरनामा किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। घर की रसोई से लेकर पोर्ट और पावर तक अपनी धमक रखने वाले अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी आज 64 साल के हो गए। 24 जून 1962 को जन्मे Gautam Adani आज एशिया के दूसरे सबसे अमीर इंसान हैं। उनके पास आज 120 अरब डॉलर की नेटवर्थ और 20 लाख करोड़ का मार्केट कैप है, उनके ग्रुप का कारोबार तमाम हवाईअड्डों में दखल के साथ ही ग्रीन एनर्जी सेक्टर तक फैला हुआ है। ऐसे में आइए जानते गौतम अडानी हीरा ट्रेडर से कैसे सबसे अमीर शख्स बन गए?
कैसे हुई शुरुआत?
गौतम अडाणी के इस असाधारण सफर की शुरुआत बेहद साधारण रही। गुजरात के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे अडाणी का मन किताबी ज्ञान से ज्यादा व्यापार की बारीकियों में रमता था। यही वजह थी कि उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी (College Dropout) और 1980 के दशक की शुरुआत में अपनी किस्मत आजमाने सपनों की नगरी मुंबई पहुंच गए। मुंबई में उन्होंने 'महेंद्र ब्रदर्स' कंपनी में बतौर डायमंड सॉर्टर (हीरों की परख करने वाले) महज कुछ सौ रुपये की नौकरी से शुरुआत की।
अडाणी में बिजनेस को भांपने की गजब की समझ थी। कुछ ही समय में उन्होंने हीरों के बाजार के सारे गुर सीख लिए और नौकरी छोड़ खुद का हीरा ब्रोकरेज बिजनेस शुरू कर दिया। इस पहले ही बिजनेस में उन्होंने अपनी काबिलियत के दम पर बड़ा मुनाफा कमाया। इसके बाद साल 1981 में उनके जीवन में एक नया मोड़ आया, जब उनके बड़े भाई मनसुखभाई ने उन्हें अहमदाबाद वापस बुला लिया ताकि वे उनकी प्लास्टिक रीसाइक्लिंग यूनिट का कामकाज संभाल सकें। यह उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट (Turning Point) साबित हुआ, क्योंकि यहीं से उनके लिए इंटरनेशनल ट्रेड (वैश्विक व्यापार) और पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC) के आयात-निर्यात (Import-Export) के दरवाजे खुले।
खुद खड़ा किया अरबों का साम्राज्य
गौतम अडाणी को अपना विशाल बिजनेस साम्राज्य विरासत में नहीं मिला है, बल्कि उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर कामयाबी की यह बुलंद मंजिल खुद खड़ी की है। उनका जन्म गुजरात के एक छोटे से कस्बे थराड़ में शांति लाल और शांता बेन अडाणी के परिवार में हुआ था। कुल 7 भाई-बहनों वाले इस बड़े परिवार का गुजारा पिता के कपड़े के छोटे से व्यापार से चलता था। बाद में उनका परिवार थराड़ से अहमदाबाद आ गया, जहां गौतम अडाणी ने 'एससीएन विद्यालय' से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। स्वभाव से बेहद शांत, सरल और धीरे बोलने वाले अडाणी की मातृभाषा गुजराती रही है, यही वजह थी कि शुरुआती दिनों में वे अंग्रेजी बोलने में थोड़ा हिचकिचाते थे, लेकिन इस भाषा की रुकावट को उन्होंने कभी अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया।
विदेशों में फैलाया बिजनेस का डंका
भारत में अपनी धाक जमाने के बाद अडाणी ग्रुप ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने पंख फैलाए और ऑस्ट्रेलिया व इंडोनेशिया जैसे देशों में माइंस, पोर्ट और रेलवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में कदम रखा। साल 2010 में उन्होंने इंडोनेशिया में माइनिंग कारोबार की शुरुआत की। इसके ठीक अगले साल, 2011 में अडाणी ग्रुप ने एक बड़ा वैश्विक दांव खेलते हुए ऑस्ट्रेलिया के 'अबॉट पॉइंट कोल टर्मिनल' को 2.72 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि में खरीद लिया। आज अडाणी ग्रुप का बिजनेस एनर्जी, पोर्ट, लॉजिस्टिक्स, माइनिंग, गैस, डिफेंस एवं एयरोस्पेस और एयरपोर्ट जैसे कई बड़े और विविध क्षेत्रों तक फैल चुका है। शेयर बाजार में लिस्टेड उनके मजबूत साम्राज्य में मुख्य रूप से अडाणी एंटरप्राइजेज, अडाणी ग्रीन एनर्जी, अडाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन, अडाणी पावर, अडाणी ट्रांसमिशन (अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस), अडाणी टोटल गैस लिमिटेड और अडाणी विल्मर जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं।
बढ़ाते चले गए बिजनेस
बंदरगाहों को कामयाबी से चलाने के बाद अडाणी ग्रुप ने तेजी से अपने बिजनेस का विविधीकरण (Diversification) यानी नए क्षेत्रों में विस्तार शुरू किया। देश की बढ़ती बिजली और ऊर्जा जरूरतों को पहचानते हुए उन्होंने साल 2006 में पावर जनरेशन के क्षेत्र में कदम रखा और अडाणी पावर (Adani Power) की शुरुआत की। देखते ही देखते अडाणी पावर देश की सबसे बड़ी निजी थर्मल पावर उत्पादक कंपनी बन गई।
बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को और मजबूत करने के लिए वे यहीं नहीं रुके। उन्होंने कोयला खदानों (Mining), बिजली ट्रांसमिशन (Adani Energy Solutions) और घर-घर गैस पहुंचाने के लिए सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (Adani Total Gas) में भी अपनी बादशाहत कायम की। समय की मांग को देखते हुए आज अडाणी ग्रुप ग्रीन एनर्जी पर सबसे ज्यादा फोकस कर रहा है। अडाणी ग्रीन एनर्जी (Adani Green Energy) के जरिए वे गुजरात के खावड़ा में दुनिया के सबसे बड़े रिन्यूएबल (सौर और पवन) ऊर्जा पार्क का निर्माण कर रहे हैं, जो पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन कर रहा है।
एयरपोर्ट और पोर्ट्स में तेजी
हाल के वर्षों में अडाणी ग्रुप की रफ्तार दोगुनी हो चुकी है। आज अडाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स देश की सबसे बड़ी एयरपोर्ट ऑपरेटर कंपनी बन चुकी है, जो मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ और जयपुर समेत देश के 8 प्रमुख हवाई अड्डों का संचालन और मॉडर्नाइजेशन संभाल रही है। यानी देश के समंदर (Ports) पर राज करने के बाद अब आसमान (Airports) पर भी अडाणी का ही दबदबा है।
सिर्फ इतना ही नहीं, वैश्विक दिग्गज होल्सिम ग्रुप से अंबुजा (Ambuja) और एसीसी (ACC) सीमेंट का अधिग्रहण करके अडाणी रातों-रात भारत के दूसरे सबसे बड़े सीमेंट उत्पादक बन गए। इसके साथ ही डेटा सेंटर्स, डिफेंस (रक्षा क्षेत्र), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी 'गंगा एक्सप्रेसवे' जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में उनके हालिया भारी निवेश ने यह साफ कर दिया है कि अडाणी ग्रुप भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है।
