AI कंपनियों के लिए भारत एक बड़ा बाजार है। ऐसे में Google ने भी भारत के AI सेक्टर में होने वाली ग्रोथ का फायदा उठाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। गूगल विशाखापत्तनम में Airtel और Adani ग्रुप के साथ मिलकर AI Data Center बना रहा है। भारत के डिजिटल भविष्य से जुड़े इस मेगा प्रोजेक्ट ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
गूगल AI Data Center
दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी गूगल ने भारत में अपने $15 बिलियन (लगभग ₹1.25 लाख करोड़) के भारी-भरकम निवेश को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है। विशाखापत्तनम में शुरू हुआ यह 'एआई इंफ्रास्ट्रक्चर' प्रोजेक्ट केवल गूगल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एयरटेल और अडानी जैसे दिग्गजों की किस्मत बदलने वाला भी साबित हो सकता है।
भारत बनेगा 'एआई पावरहाउस'
गूगल ने विशाखापत्तनम में एक विशाल एआई हब के निर्माण की नींव रख दी है, जो भारत के डिजिटल इकोसिस्टम के लिए अब तक का सबसे बड़ा बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट माना जा रहा है। यह गीगावाट-स्केल का इकोसिस्टम होगा, जिसमें कई विशाल डेटा सेंटर कैंपस बनाए जाएंगे। यह प्रोजेक्ट भारत को केवल एक उपभोक्ता के रूप में नहीं, बल्कि एआई विकास के एक वैश्विक केंद्र (Global Hub) के रूप में स्थापित करेगा, जहाँ हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और डेटा प्रोसेसिंग की अपार क्षमता होगी।
एयरटेल और अडानी ग्रुप के साथ पार्टनरशिप
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका 'इंटीग्रेटेड अप्रोच' है, जिसके लिए गूगल ने भारती एयरटेल और अडानी ग्रुप के साथ हाथ मिलाया है। एयरटेल अपनी डेटा सेंटर यूनिट 'Nxtra' और व्यापक फाइबर नेटवर्क के जरिए इस प्रोजेक्ट की कनेक्टिविटी को मजबूती देगा। वहीं, अडानी ग्रुप अपने ज्वाइंट वेंचर 'AdaniConneX' के जरिए डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर को स्केल करेगा। यह गठबंधन टेलीकॉम, डेटा मैनेजमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर की संयुक्त ताकत का एक अनूठा उदाहरण पेश कर रहा है।
निवेश के लिहाज से असली विनर कौन
शेयर बाजार के नजरिए से देखें तो भारती एयरटेल इस डील का एक सीधा और बड़ा बेनेफिशियरी नजर आता है। डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की बढ़ती मांग एयरटेल के रेवेन्यू में स्थिरता और लंबी अवधि की ग्रोथ सुनिश्चित करेगी। दूसरी ओर, अडानी ग्रुप के पास अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) का विशाल पोर्टफोलियो है, जो इन ऊर्जा-खपत वाले डेटा सेंटर्स को चलाने के लिए अनिवार्य है। ऐसे में अडानी ग्रीन और अडानी पावर जैसे शेयरों को भी इस इकोसिस्टम से बड़ा बूस्ट मिल सकता है।
फाइबर और पावर सेक्टर में छिपे अवसर
गूगल के इस महा-निवेश का असर केवल बड़े नामी ग्रुप्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका एक 'डोमिनो इफेक्ट' पूरे सप्लाई चेन पर दिखेगा। हाई-स्पीड कनेक्टिविटी की जरूरत को देखते हुए फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क बनाने वाली कंपनियों और सबसी केबल लैंडिंग से जुड़ी फर्मों के लिए ऑर्डर्स की बाढ़ आ सकती है। इसके साथ ही, डेटा सेंटर्स के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति की जरूरत पावर जनरेशन और उपकरण निर्माताओं के लिए विकास के नए द्वार खोलेगी, जिससे निवेशकों के लिए कई नए मल्टीबैगर सेक्टर सामने आ सकते हैं।
डिस्क्लेमर: TimesNow Navbharat किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
