Gold vs Share : पिछले कुछ वर्षों में सोना (Gold) दुनियाभर के निवेशकों के लिए सबसे पसंदीदा और सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले एसेट क्लास के रूप में उभरा है। बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव वैश्विक अनिश्चितताओं, केंद्रीय बैंकों की तरफ से बड़े पैमाने पर की जा रही सोने की खरीदारी और सुरक्षित निवेश (Safe-Haven Asset) की मांग के चलते सोने ने Equity यानी शेयर बाजार को काफी पीछे छोड़ दिया।
गोल्ड रेट में आ रही स्थिरता
लेकिन, इस साल की शुरुआत से लगातार सोना एक रेंज में बना हुआ है। इसे लेकर अब एक्सपर्ट मानने लगे हैं कि गोल्ड की तेज रैली वाला दौर अब पीछे छूट गया है। खासतौर पर भारतीय बाजार में अब गोल्ड की जगह फिर से इक्विटी मार्केट का दबदबा बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। मोतीलाल ओसवाल (Motilal Oswal), सैमको सिक्योरिटीज (SAMCO Securities), कोटक नियो सहित कई ब्रोकरेज और रिसर्च फर्म के एनालिस्टों के मुताबिक Gold Historical Trends और Market Ratio इस साफ इशारा कर रहे हैं कि सोने के वर्चस्व का दौर अब अपने अंतिम पड़ाव में है और अगले मार्केट साइकिल में शेयर बाजार (Equities) बाजी मार सकता है।
सोने की गिरावट ने बदला एनालिस्टों का रुख
इस साल की शुरुआत में गोल्ड और सिल्वर ऑल टाइम हाई पर पहुंच गए थे। 2026 की शुरुआत में 28 जनवरी के आसपास रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने वाला गोल्ड अब करीब 25% तक फिसल चुका है। 5608.35 के शिखर से 4200 के स्तर तक आई यह गिरावट बताती है कि सोने की एकतरफा तेजी फिलहाल थमती दिख रही है। इसी बीच कई मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले महीनों में निवेशकों का रुझान फिर से इक्विटी मार्केट की तरफ बढ़ सकता है।
ऐतिहासिक निचले स्तर पर Nifty vs Gold Ratios
शेयर बाजार और सोने के सापेक्ष प्रदर्शन (Relative Performance) को मापने के लिए एक्सपर्ट दो अहम रेशियो Nifty/XAUINRG और Nifty/Gold रेशियो का को देखते हैं। जब ये रेशियो गिरते हैं, तो इसका मतलब होता है कि सोना शेयर बाजार से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। इसके विपरीत, रेशियो का बढ़ना शेयर बाजार की मजबूती को दर्शाता है। इस समय इन दोनों ही रेशियो में ऐतिहासिक स्तर पर भारी गिरावट देखी जा रही है।
1. Nifty/XAUINRG रेशियो : यह रेशियो ऐतिहासिक मेजर डिमांड जोन (1.55 से 1.85) के बीच आ चुका है। पिछले तीन दशकों (30 साल) का डाटा गवाह है कि, जब भी यह रेशियो इस लेवल पर आया है, बाजार में एक बड़ा बदलाव (U-Turn) आया है। इससे पहले ऐसी स्थिति 1990 के दशक की शुरुआत में, 2008-09 के वैश्विक वित्तीय संकट (GFC) के बाद और फिर 2012-13 के दौरान देखी गई थी।
2. Nifty/Gold रेशियो : पिछले कुछ वर्षों में सोने के एकतरफा दमदार प्रदर्शन के कारण यह रेशियो साल 2024 के 0.35 के स्तर से तेजी से गिरकर वर्तमान में लगभग 0.15 के करीब आ चुका है। इससे पहले ठीक ऐसा ही निचला स्तर साल 2020 में कोरोना महामारी (COVID-19) के समय देखा गया था, जब अनिश्चितता के डर से निवेशकों ने अंधाधुंध सोना खरीदा था।
क्या इतिहास खुद को दोहराएगा?
एनालिस्टों के मुताबिक, जब-जब निवेशक शेयर बाजार से डरकर गोल्ड जैसे एसेट्स में निवेश करते हैं, तो बाजार में मंदी के बाद एक शानदार वापसी देखने को मिलती है। मसलन, 2008-09 संकट के बाद भारतीय इक्विटी बाजारों में कई वर्षों तक चलने वाली महा-तेजी (Multi-year Recovery) देखी गई और सोने की रफ्तार धीमी पड़ गई। 2012-13 के बाद इस अवधि में भी रेशियो के निचले स्तर छूने के बाद अगले कुछ सालों तक निफ्टी ने गोल्ड को रिटर्न के मामले में काफी पीछे छोड़ दिया।
निवेशकों के लिए इसके क्या मायने हैं?
दोनों रेशियो का एक साथ अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर होना इस बात की पुष्टि करता है कि सोना और शेयर बाजार के बीच प्रदर्शन का अंतरबहुत ज्यादा बढ़ गया है। हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सोने की कीमतों में कोई बड़ी गिरावट या क्रैश होने वाला है, बल्कि यह संकेत है कि सोने की एकतरफा तेजी अब ठहर सकती है। इसके साथ ही सोने से पैसा निकालकर धीरे-धीरे ग्रोथ-ओरिएंटेड एसेट (शेयर बाजार) की तरफ रुख आ सकता है।
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