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ग्रीनलैंड, टैरिफ, जिनपिंग का दौरा और अब TRUMP TV, मिडटर्म चुनाव से पहले कैसे अपनी छवि चमकाने में जुटे US राष्ट्रपति

अमेरिका में राष्ट्रपति की लोकप्रियता और अलोकप्रियता का सीधा असर चुनाव नतीजों पर होता है। ऐसे में ट्रंप की जो मौजूदा रेटिंग है, वह कहीं से भी उन्हें चुनाव जीतने का दिलासा नहीं दे रही है। इस बात की चिंता ट्रंप के हालिया फैसलों में झलकी है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।
Written by: आलोक कुमार राव
Updated Sep 22, 2026, 14:46 IST
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Donald Trump News: अमेरिका में नवंबर में मिडटर्म चुनाव होने जा रहे हैं। यह चुनाव सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बहुत मायने रखता है। इस चुनाव में यदि रिपब्लिकन पार्टी की हार हुई तो अपने बाकी बचे कार्यकाल में ट्रंप को काम करना बहुत मुश्किल होगा। यूएस कांग्रेस में डेमोक्रेट्स हावी हो जाएंगे। ऐसे में ट्रंप के लिए कांग्रेस से विधेयक पारित कराना टेढ़ी खीर साबित होगा। ईरान युद्ध में फंसने और घिरने के बाद ट्रंप की लोकप्रियता की रेटिंग में भी बड़ी गिरावट आई है। हालिया सर्वे में यह रेटिंग गिरकर 34 तक आ गई है जो कि चुनाव जीतने के लिए पर्याप्त नहीं है। अमेरिका में राष्ट्रपति की लोकप्रियता और अलोकप्रियता का सीधा असर चुनाव नतीजों पर होता है। ऐसे में ट्रंप की जो मौजूदा रेटिंग है, वह कहीं से भी उन्हें चुनाव जीतने का दिलासा नहीं दे रही है। इस बात की चिंता ट्रंप के हालिया फैसलों में झलकी है। अमेरिकी जनता को लुभाने के लिए उन्होंने 'मुफ्त की रेवड़ी' का भी दांव चला है। उन्होंने मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के जीतने पर प्रत्येक वयस्क अमेरिकी नागरिक को 5000 डॉलर का भत्ता देने का वादा किया है।

ग्रीनलैंड के साथ हुए रक्षा करार का पीटेंगे ढिंढोरा

ट्रंप चाहते हैं कि उनके चुनावी पिटारे में कुछ ऐसी उपलब्धियां शामिल हो जाएं जो उन्हें एक विजेता और एक ताकतवर नेता के रूप में पेश करें। ग्रीनलैंड के साथ रक्षा समझौता भी इसी कड़ी में एक कदम है। ईरान युद्ध शुरू होने से पहले यानी फरवरी 2026 के पूर्व में ट्रंप ने कई बार कहा कि वह सैनिक भेजकर यानी बलपूर्वक ग्रीनलैंड को हासिल कर लेंगे क्योंकि अमेरिका की सुरक्षा के लिए दुनिया के इस सबसे बड़े द्वीप पर उनका नियंत्रण होना जरूरी है। इस मुद्दे को लेकर डेनमार्क के साथ उनकी जुबानी जंग भी हुई। अब चूंकि ग्रीनलैंड के साथ रक्षा करार हो गया है तो अमेरिका यहां अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाएगा और नए सैन्य बेस स्थापित होंगे। हालांकि, एक्सपर्ट मानते हैं कि इस रक्षा डील में कुछ नया नहीं है। ग्रीनलैंड की सुरक्षा को लेकर पहले ही डेनमार्क और यूएस के बीच करार है। अमेरिकी सैनिक और सैन्य बेस वहां पहले से मौजूद हैं और नया रक्षा करार उसी को आगे बढ़ाता है लेकिन ट्रंप अपने स्वभाव के अनुरूप इसे अपनी एक बड़ी जीत के रूप में पेश करेंगे। अमेरिकी जनता को वह बताएंगे कि देश की सुरक्षा के लिए उन्होंने ग्रीनलैंड के साथ एक बेहद उपयोगी रक्षा करार किया है।

नवंबर से पहले भारत पर टैरिफ लगा सकते हैं US राष्ट्रपति

दूसरा, अपने दूसरे टर्म में टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर इसका दांव चला है। टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट से फटकार खाने के बाद वह यूएस कांग्रेस से होकर आए हैं। रूस एवं ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने का अधिकार देने वाला विधेयक यूएस कांग्रेस से पारित हो गया है और इस विधेयक पर ट्रंप ने हस्ताक्षर भी कर दिए हैं। इस कानून ने ट्रंप को रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार उन्हें दे दिया है। एक्सपर्ट मानते हैं कि ट्रंप इस कानून का इस्तेमाल चीन के प्रति कम, भारत के खिलाफ ज्यादा कर सकते हैं। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद मास्को से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले देशों में चीन, भारत और तुर्किये शामिल हैं। रूसी तेल खरीदने पर ट्रंप पहले भी भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा चुके हैं।

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टैरिफ लगाकर खुद को ताकतवर दिखाएंगे ट्रंप

चूंकि, टैरिफ पर चीन ने पलटवार किया है और अमेरिका को क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति करने सहित सोयाबीन खरीदने से मना किया। ट्रंप के टैरिफ के आगे चीन झुका नहीं बल्कि अपने आर्थिक फैसलों से ट्रंप को यू-टर्न लेने पर मजबूर किया। वहीं, टैरिफ लगने के बाद भारत ने चीन की तरह कोई जवाबी प्रतिक्रिया नहीं दी। ट्रंप ने जब भी टैरिफ लगाए, भारत उसे स्वीकार करता गया। हालांकि, भारत ने इस बार पहले ही संदेश दे दिया है कि अगर टैरिफ लगता है तो इसका असर आपसी संबंधों पर पड़ेगा। ऐसे में एक्सपर्ट मानते हैं कि रूसी तेल खरीदने को लेकर मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप भारत पर एक बार फिर टैरिफ लगाने की घोषणा कर सकते हैं। ऐसा करते हुए वह खुद को एक ताकतवर नेता के रूप में पेश और यूक्रेन एवं यूरोप के साथ एकजुटता दिखाने की कोशिश करेंगे। इस बात की संभावना बहुत ज्यादा है कि ट्रंप चीन पर कम और भारत पर ज्यादा टैरिफ लगाएं।

मुलाकात में चीन को साधने की कोशिश

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिका के दौरे पर पहुंचने वाले हैं। 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकात होगी। इससे पहले बीते मई में ट्रंप अपने भारी-भरकम शिष्टमंडल के साथ बीजिंग दौरे पर गए थे। इस यात्रा के दौरान 'बोर्ड ऑफ ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट' बनाने की घोषणा की। जबकि चीन ने बोइंग विमान और अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदने पर हामी भरी, हालाकि कई वादे अब तक अधूरे हैं। बीते मई में जिनेवा में दोनों देशों के अधिकारी मिले और 90 दिन के विराम पर सहमति बनी। अमेरिका ने टैरिफ 145% से घटाकर 30% किए, और चीन ने 125% से घटाकर 10%। इससे बाजार को राहत मिली और बातचीत के लिए जगह बनी, लेकिन बुनियादी मतभेद वहीं के वहीं रहे। एक्सपर्ट मानते हैं कि ट्रंप और जिनपिंग की यह मुलाकात कोई बड़ी और ट्रेड डील के लिए नहीं है। असली मकसद मौजूदा ट्रूस को जिंदा रखना है, जो नवंबर में खत्म हो रहा है। नवंबर का महीना ट्रंप के लिए खास है। इस महीने में वह चीन के साथ कोई टकराव नहीं चाहेंगे। ट्रंप नहीं चाहेंगे कि चीन द्वारा उठाए गए किसी कदम से वह घरेलू मोर्चे पर घिरे या अमेरिकी मतदाता उनसे नाराज हों। इसलिए, वह इस मुलाकात में जिनपिंग को साधने की कोशिश कर सकते हैं।

व्हाइट हाउस में CNN, MS NOW और पॉलिटिको पर बैन

हाल ही में व्हाइट हाउस ने CNN, MS NOW और पॉलिटिको को अपने यहां प्रवेश देने से रोक लगा दी। इस कदम को सही ठहराते हुए ट्रंप ने इन मीडिया हाउसों पर 'फर्जी खबरें' चलाने और उनके बारे में 'झूठी' बातें फैलाने का गंभीर आरोप लगाया। अपने सोशल मीडिया अकाउंट ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने लिखा, 'मुझे यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि तत्काल प्रभाव से मैं फेक न्यूज फैलाने वाले CNN, MSNOW (जिसने हाल ही में कम दर्शक संख्या और विश्वसनीयता की कमी के कारण MSNBC से अपना नाम बदल लिया है!) और Politico को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित कर रहा हूं। पॉलिटिको को ‘जिंदा’ रखने के लिए पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में अमेरिकी सरकार की ओर से सीधे तौर पर 80 लाख डॉलर की एक अवैध और हास्यास्पद सदस्यता दी गई थी जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। यह मुझे भ्रष्टाचार जैसा लगता है!'

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ट्रंप ने आगे कहा, 'मीडिया संस्थानों को अमेरिकी राष्ट्रपति, ट्रंप प्रशासन या संयुक्त राज्य अमेरिका को कवर करते समय लगातार काल्पनिक बातें और झूठ लिखने या प्रसारित करने में सक्षम नहीं होना चाहिए। अन्य फेक न्यूज मीडिया संस्थानों पर भी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद!'

TRUMP TV के जरिए चमकाई जाएगी राष्ट्रपति की छवि

वहीं, CNN, MS NOW और पॉलिटिको के साथ एकजुटता जाहिर करते हुए यूएस के बड़े मीडिया संस्थानों ने राष्ट्रपति का पूल कवरेज करने से मना कर दिया। मीडिया से बढ़े टकराव के बीच व्हाइट हाउस ने 21 सितंबर को 'TRUMP' टीवी लॉन्च किया। व्हाइट हाउस के आधिकारिक X अकाउंट ने इसकी लॉन्चिंग की घोषणा करते हुए कहा, 'यह लाइव है। TRUMP TV अब स्ट्रीमिंग कर रहा है। यह 24/7 उपलब्ध रहेगा और रियल टाइम में अपडेट होगा। इसमें प्रशासन के अहम पुराने पलों, घोषणाओं और ताजा गतिविधियों को एक ही जगह पर दिखाया जाएगा। टीवी पर हर बड़ा पल नहीं दिख पाया है, लेकिन अब उसे यहां देखा जा सकता है।' जाहिर है कि इस टीवी के जरिए ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की उपलब्धियों का बखान और उनकी छवि चमकाने का प्रयास किया जाएगा।

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