Gold Smuggling WGC Report : भारत में सोने की तस्करी में जबरदस्त उछाल आया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान भारत में सोने की अनौपचारिक सप्लाई बढ़कर करीब 50 टन पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह सिर्फ 3 टन थी। यानी इसमें 1,500% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। यह 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। WGC ने इसे अनौपचारिक आयात बताया है। इसमें तस्करी के साथ ऐसे दूसरे रास्ते भी शामिल हो सकते हैं, जिनसे आधिकारिक इंपोर्ट ड्यूटी का भुगतान किए बिना सोना देश में पहुंचता है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट
तस्करी में अचानक इतनी बढ़ोतरी क्यों हुई?
एक्सपर्ट का मानना है कि सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने और सोने के आयात को नियंत्रित करने के लिए मई 2026 में आयात कर (Import Duty) बढ़ाया था, लेकिन इस फैसले के बाद आधिकारिक रास्ते से सोना मंगाना महंगा हो गया। नतीजा यह हुआ कि सोने की तस्करी और अनौपचारिक आयात को बढ़ावा मिला। 13 मई 2026 से केंद्र सरकार ने सोने और चांदी पर प्रभावी आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया। इसमें 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) और 5% एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) शामिल है। इसके अलावा सोने के आयात पर 3% IGST भी लगता है। आयात शुल्क बढ़ने से आधिकारिक तरीके से सोना मंगाने की लागत बढ़ गई। ऐसे में तस्करी के जरिए आने वाले सोने के कारोबारियों को कीमत में अंतर का फायदा उठाने का मौका मिला।
सरकार ने गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी क्यों बढ़ाई?
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है और अपनी घरेलू जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। सोना देश के प्रमुख आयातों में शामिल है। ज्यादा सोने का आयात करने से देश के चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है। World Gold Council के मुताबिक, 2025 में भारत के कुल मर्चेंडाइज इंपोर्ट में सोने की हिस्सेदारी करीब 8% थी। मई 2026 में रुपये पर दबाव और विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने की जरूरत के बीच सरकार ने आयात को महंगा करने का फैसला लिया। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों से एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील की थी।
सोने की कीमतें बढ़ीं, खरीदारी घटी
सोने पर आयात शुल्क बढ़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों की तेजी ने भी भारतीय खरीदारों की जेब पर दबाव डाला है। WGC की Q3 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर तिमाही में भारत में सोने की ज्वेलरी की खपत सालाना आधार पर 20% घटकर 99.9 टन रह गई। यह 2020 के बाद किसी तीसरी तिमाही का सबसे कमजोर आंकड़ा है। वहीं, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच ज्वेलरी की मांग 18% घटकर 241.1 टन रही। इस दौरान घरेलू बाजार में सोने की औसत कीमत सालाना आधार पर करीब 45% ज्यादा थी। महंगे सोने के कारण खरीदार अब हल्के वजन की ज्वेलरी, कम कैरेट वाले सोने और स्टडेड ज्वेलरी की तरफ रुख कर रहे हैं। 18K, 14K और 9K गोल्ड की ज्वेलरी की मांग में भी बढ़ोतरी देखी गई है।
क्या सरकार की रणनीति उलटी पड़ रही है?
WGC के आंकड़े बताते हैं कि सोने की सप्लाई का रास्ता बदल रहा है। जुलाई-सितंबर 2026 में भारत में कुल सोने की सप्लाई 136 टन रही, जो पिछले साल से 43% कम थी। इस दौरान आधिकारिक बुलियन इंपोर्ट 70% गिरकर 64 टन रह गया, जबकि अनौपचारिक सप्लाई बढ़कर करीब 50 टन पहुंच गई। इससे संकेत मिलता है कि ऊंची इंपोर्ट ड्यूटी ने आधिकारिक आयात को महंगा करने के साथ अनौपचारिक रास्तों को भी ज्यादा आकर्षक बना दिया है।
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