Gold and Silver Prices: घरेलू सर्राफा बाजार में वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान सोना और चांदी की कीमतों में मध्यम स्तर की तेजी बने रहने की संभावना जताई जा रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार युद्ध की आशंका और वैश्विक मंदी के बढ़ते जोखिम के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों यानी ‘सेफ-हेवन’ की ओर रुख करेंगे। इसका सीधा फायदा सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं को मिल सकता है। हालांकि, ऊंची ब्याज दरें इनकी कीमतों में बहुत तेज उछाल को सीमित कर सकती हैं।
पिछले वित्त वर्ष में जोरदार तेजी
वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो यह कीमती धातुओं के लिए बेहद मजबूत साल साबित हुआ। इस दौरान चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। एक अप्रैल 2025 को चांदी का वायदा भाव 99,461 रुपये प्रति किलोग्राम था, जो बढ़कर 1,41,431 रुपये तक पहुंच गया। यानी इसमें करीब 142 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, सोने की कीमत भी 90,503 रुपये प्रति 10 ग्राम से बढ़कर करीब 60,258 रुपये तक पहुंची, जो करीब 67 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाती है। इस तेजी के पीछे कई वैश्विक कारण रहे, जिनमें अमेरिकी प्रशासन द्वारा शुल्क बढ़ाने की नीति, भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की बड़ी खरीदारी, सप्लाई की कमी और आर्थिक अनिश्चितता प्रमुख हैं।
एक्सपर्ट्स का क्या कहना है
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक चॉइस ब्रोकिंग के जिंस और मुद्रा विश्लेषक आमिर मकदा के अनुसार, आने वाले वित्त वर्ष में भी सोना और चांदी का रुख सकारात्मक रहेगा, लेकिन तेजी मध्यम स्तर की होगी। उनका कहना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय कई चुनौतियों से गुजर रही है, जैसे युद्ध जैसी स्थितियां, व्यापारिक टकराव और मंदी का डर। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम से बचने के लिए सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुकते हैं, जिससे सोने-चांदी की मांग बढ़ती है।
मार्च में आई गिरावट से क्या संकेत
हालांकि मजबूत तेजी के बाद वित्त वर्ष के अंत में कीमतों में गिरावट भी देखी गई। मार्च महीने में ही सोने की कीमतों में 11,343 रुपये यानी करीब 7 प्रतिशत की गिरावट आई। वहीं, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर चांदी की कीमतें 41,752 रुपये यानी लगभग 15 प्रतिशत तक टूट गईं। विशेषज्ञ इसे बाजार का सामान्य ‘टेक्निकल करेक्शन’ मानते हैं। आमिर मकदा के अनुसार, ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो युद्ध जैसी परिस्थितियों के दूसरे चरण में सोने की मांग और बढ़ती है, खासकर तब जब डॉलर की मजबूती सीमित हो जाती है।
ब्याज दरें बन सकती हैं बाधा
आने वाले समय में एक बड़ा जोखिम ऊंची ब्याज दरों का भी है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व और अन्य बड़े केंद्रीय बैंक अगर लंबे समय तक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखते हैं, तो इससे सोने और चांदी की कीमतों में तेजी सीमित हो सकती है। क्योंकि ऊंची ब्याज दरों के कारण निवेशक बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले साधनों की ओर आकर्षित होते हैं।
चांदी की मांग में मजबूती के कारण
वित्त वर्ष 2025-26 में चांदी के शानदार प्रदर्शन के पीछे कई ठोस कारण रहे। पिछले पांच वर्षों से लगातार बनी हुई आपूर्ति की कमी ने इसकी कीमतों को सहारा दिया। इसके अलावा, सोलर एनर्जी (फोटोवोल्टिक) और इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) सेक्टर से चांदी की मांग में रिकॉर्ड वृद्धि हुई। साथ ही, ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स) में संस्थागत निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी ने भी चांदी के बाजार को मजबूती दी। चूंकि चांदी का बाजार अपेक्षाकृत छोटा होता है, इसलिए मांग बढ़ने पर कीमतों में तेजी से उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
चांदी कहां तक जा सकती है
आने वाले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अनुमान लगाया जा रहा है कि चांदी की कीमतों में मध्यम तेजी बनी रहेगी। घरेलू बाजार में इसकी कीमतें रुपये में उतार-चढ़ाव के आधार पर 2.75 लाख रुपये से 3.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के बीच रह सकती हैं।
डॉलर और वैश्विक संकेतक रहेंगे अहम
अमेरिकी डॉलर की चाल भी कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित करेगी। फेडरल रिजर्व की नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण डॉलर में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, जिसका असर सोने और चांदी दोनों पर पड़ेगा।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि वित्त वर्ष 2026-27 में बीच-बीच में उतार-चढ़ाव जरूर देखने को मिलेगा, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम, केंद्रीय बैंकों की खरीद और औद्योगिक मांग जैसे कारक सोने और चांदी की कीमतों को मजबूत आधार देते रहेंगे। इसलिए निवेशकों के लिए यह सेक्टर आगे भी आकर्षक बना रह सकता है, हालांकि सतर्कता के साथ निवेश करना जरूरी होगा।
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