आज के समय में बच्चे कम उम्र से ही ऑनलाइन शॉपिंग (Online Shopping), फूड डिलीवरी (Food Delivery) और डिजिटल पेमेंट (Digital Payments) का इस्तेमाल करने लगे हैं। लेकिन पैसे खर्च करना और पैसों को सही तरीके से मैनेज करना दो अलग-अलग बातें हैं। ऐसे में माता-पिता अगर बच्चों को पॉकेट मनी के रूप में एक तय राशि देना शुरू कर दें और पैसे के इस्तेमाल की जिम्मेदारी भी उन्हें ही दे दें तो यह उनके लिए आगे चलकर काफी उपयोगी साबित हो सकता है। बच्चों को पॉकेट मनी (Pocket Money Rules) देते वक्त पैरेंट्स कुछ खास बातों का ध्यान रख सकते हैं-
बच्चों को पॉकेट मनी देते वक्त इन बातों का रखें ध्यान (Photo: iStock)
पॉकेट मनी देते वक्त इन बातों का रखें ध्यान
Pocket Money Rules (Photo: iStock)
एक तय राशि
बच्चे को हर बार जरूरत के हिसाब से पैसे देने के बजाय एक निश्चित रकम वीकली या मंथली दी जा सकती है। यह रकम उसकी उम्र और उन खर्चों के हिसाब से तय करें। अगर बच्चा कुछ ही दिनों में पूरी रकम खर्च कर देता है तो तुरंत अतिरिक्त पैसे देने से बचें। इससे उसे अगली पॉकेट मनी (Pocket Money) तक इंतजार करना और बजट बनाना सीखने को मिलेगा।
जरूरत और इच्छा में अंतर
बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि हर खर्च जरूरी नहीं होता। स्कूल की कॉपी-किताब जरूरत हो सकती है, जबकि पहले से कई जोड़ी जूते होने के बावजूद नए जूते खरीदना इच्छा हो सकती है। इसी तरह दोस्तों के साथ महंगा खाना ऑर्डर करना जरूरी खर्च नहीं माना जा सकता। इसका मतलब यह नहीं कि बच्चे अपनी पसंद की चीजें न खरीदें, बल्कि उन्हें खर्च करने से पहले जरूरत और इच्छा के बीच अंतर समझना चाहिए।
पैसे बचाने की आदत
बच्चे को यह सिखाएं कि पूरी रकम खर्च करना जरूरी नहीं है। पैसे मिलते ही उसका एक हिस्सा अलग रखने की आदत डालें। इसके लिए कोई छोटा लक्ष्य बनाया जा सकता है। उदाहरण के लिए अगर बच्चे को 5,000 रुपये के हेडफोन खरीदने हैं तो वह हर महीने कुछ रकम बचाकर तय समय में अपना लक्ष्य पूरा कर सकता है। इससे उसे समझ आएगा कि आज किया गया अतिरिक्त खर्च भविष्य की खरीदारी को कितना आगे बढ़ा सकता है।
पैसे खर्च करने की आजादी
माता-पिता को बच्चों के हर गलत खर्च को रोकने की जरूरत नहीं है। अगर बच्चा पॉकेट मनी का बड़ा हिस्सा फूड डिलीवरी पर खर्च कर देता है और बाद में दोस्तों के साथ जाने के लिए पैसे नहीं बचते, तो यह छोटी गलती उसे बजट की अहमियत समझा सकती है। छोटी उम्र में ऐसी गलतियों से सीखना भविष्य की बड़ी आर्थिक गलतियों से बचने में मदद कर सकता है।
ट्रांजैक्शन ट्रैक करने की आदत
UPI और कार्ड से पेमेंट करते समय खर्च का एहसास कम हो सकता है। इसलिए बच्चों को समय-समय पर अपने ट्रांजैक्शन देखने और यह समझने की आदत डालें कि पैसा कहां खर्च हुआ। साथ ही उन्हें UPI PIN, OTP और बैंकिंग पासवर्ड किसी के साथ साझा न करने की जानकारी जरूर दें।
