India AI Impact Summit 2026 की थीम पीपल, प्लैनेट और प्रॉग्रेस रखी गई है। यह थीम AI के मोर्चे पर हो रही तरक्की को दर्शाती है। 2023 में जब पहली बार ब्रिटेन में AI समिट हुआ, तो उसकी थीम सेफ्टी पर फोकस्ड रही। इसके बाद 2024 में बात सेफ्टी और इनोवेश के बीच संतुलन तक पहुंची। 2025 में AI के विमर्श में पब्लिक इंटरेस्ट और सस्टेनेबिलिटी शामिल हुए। लेकिन, इस बार बात हो रही है, AI के रियल वर्ल्ड इस्तेमाल के जरिये लोगों के साथ ही पूरी पृथ्वी की तरक्की के बारे में और उससे आगे की संभावनाओं की चर्चा भी है।
क्यों अहम है AI समिट की थीम का बदलाव?
AI समिट की थीम में बदलाव बेहद अहम है, क्योंकि यह AI चर्चा को सेफ्टी-रिस्क फोकस से आगे बढ़ाकर रियल-वर्ल्ड इम्पैक्ट, इंक्लूसिविटी और सस्टेनेबिलिटी पर ले जाता है। पिछले समिट्स मुख्य रूप से ग्लोबल नॉर्थ की चिंताओं (फ्रंटियर AI खतरे, गवर्नेंस) पर केंद्रित थे, जबकि India AI Impact Summit 2026 की थीम "People, Planet, Progress" ने ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को केंद्र में रखा है। यह AI को डेमोक्रेटाइज करता है, हेल्थ-एग्री-एजुकेशन जैसे क्षेत्रों में सॉल्यूशंस, पर्यावरण-अनुकूल विकास और इक्विटेबल ग्रोथ पर जोर देता है। भारत इस बदलाव से AI गवर्नेंस में लीडर बन रहा है, जिससे ग्लोबल AI ज्यादा फेयर, सस्टेनेबल और सबके लिए उपयोगी बनता है।
किस तरह बदलता गया AI पर विमर्श?
AI पर विमर्श पिछले तीन वर्षों में काफी बदल गया है। 2023 से 2026 के बीच चर्चा फ्रंटियर रिस्क और सेफ्टी से शुरू होकर इस तकनीक के लोकतांत्रिकरण और आम लोगों के लिए इसके इस्तेमाल तक पहुंच गई है।
2023 यूके समिट : 2023 में ब्रिटेन के Bletchley Park में आयोजित AI Safety Summit ने पहली बार फ्रंटियर AI के संभावित खतरों को वैश्विक एजेंडा बनाया। उस समय चैटबॉट्स और जनरेटिव AI की तेज प्रगति ने सरकारों को अलर्ट मोड में डाल दिया था। चर्चा का केंद्र “कैटास्ट्रॉफिक रिस्क” और एक्सटिंक्शन-लेवल थ्रेट्स थे। Bletchley Declaration के जरिए देशों ने माना कि एडवांस्ड AI सिस्टम्स की निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। यह समिट पूरी तरह “Safety First” दृष्टिकोण पर आधारित था। टेक्नोलॉजी को अवसर से ज्यादा जोखिम के रूप में देखा जा रहा था।
2024 साउथ कोरिया समिट : एक साल बाद, 2024 में AI Seoul Summit ने बहस का दायरा बढ़ाया। सियोल में सेफ्टी को बनाए रखते हुए इनोवेशन और इंक्लूसिविटी को जोड़ा गया। यहां यह स्पष्ट हुआ कि AI को केवल नियंत्रित करना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी के साथ उसका उपयोग भी जरूरी है। इंडस्ट्री लीडर्स और सरकारों के बीच कमिटमेंट्स हुए। “Safe, Innovative and Inclusive AI” का फ्रेमवर्क इस बात का संकेत था कि दुनिया अब केवल खतरे पर नहीं, बल्कि अवसर पर भी ध्यान दे रही है। यह संक्रमण का दौर था, जहां पॉलिसी और प्राइवेट सेक्टर के बीच समन्वय मजबूत हुआ।
2025 पेरिस समिट: पेरिस में आयोजित AI Action Summit ने नैरेटिव को एक और कदम आगे बढ़ाया। यहां AI को “Action for Public Interest” के रूप में पेश किया गया। जॉब्स, क्लाइमेट चेंज, और पब्लिक सर्विस डिलीवरी जैसे विषय केंद्र में आए।सरकारों ने गवर्नेंस फ्रेमवर्क और इन्वेस्टमेंट प्लान्स पर जोर दिया। यह वह चरण था, जहां AI को केवल रेगुलेट करने के बजाय, समाज के हित में लागू करने की बात खुलकर हुई।
AI Summit theme
2026: इम्पैक्ट का भारतीय मॉडल
नई दिल्ली के Bharat Mandapam में आयोजित India AI Impact Summit इस क्रम का सबसे नया और अलग अध्याय है। यहां थीम “People, Planet, Progress” रखी गई।
यह समिट खास इसलिए है क्योंकि यह ग्लोबल साउथ से आयोजित पहला बड़ा AI मंच है। फोकस सिर्फ पॉलिसी दस्तावेजों पर नहीं, बल्कि हेल्थ, एग्रीकल्चर और एजुकेशन में वास्तविक तैनाती पर है। सात थीमैटिक चक्रों में विभाजित इस मॉडल ने AI को जनहित, पर्यावरण और इक्विटेबल ग्रोथ से जोड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने AI को “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” के सिद्धांत से जोड़ा। उनका संदेश स्पष्ट था कि तकनीक का अंतिम लक्ष्य मानव कल्याण होना चाहिए। भारत का दावा है कि यदि AI समाधान यहां 1.4 अरब लोगों के पैमाने पर काम कर सकते हैं, तो वे दुनिया में कहीं भी सफल हो सकते हैं।
केंद्र में इंसान : People आयाम AI को जॉब सपोर्ट, स्किलिंग और डिजिटल डिवाइड कम करने के उपकरण के रूप में देखता है। चर्चा का केंद्र यह है कि AI जॉब्स को रिप्लेस करने के बजाय उत्पादकता बढ़ाए। सैम ऑल्टमैन ने भारत को OpenAI का बड़ा बाजार बताते हुए कहा कि AI मानव क्षमता को बढ़ाएगा। वहीं, सुंदर पिचई ने अवसर न चूकने पर जोर दिया। यह स्पष्ट संकेत है कि टेक इंडस्ट्री भारत को AI विस्तार का प्रमुख केंद्र मान रही है।
सस्टेनेबल AI का एजेंडा : Planet आयाम AI के ऊर्जा उपयोग और क्लाइमेट प्रभाव पर केंद्रित है। ग्रीन डेटा सेंटर्स, रिन्यूएबल एनर्जी आधारित इंफ्रा और क्लाइमेट मॉडलिंग सॉल्यूशंस इस बहस का हिस्सा हैं। AI को सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स के साथ जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है। क्लाइमेट रेजिलिएंस और कृषि उत्पादकता बढ़ाने जैसे विषयों पर पायलट प्रोजेक्ट्स प्रस्तुत किए गए। यह शिफ्ट दिखाता है कि टेक्नोलॉजी को पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ जोड़ा जा रहा है।
इक्विटेबल ग्रोथ और ग्लोबल साउथ : Progress का फोकस आर्थिक परिवर्तन और डिजिटल सॉवरेनिटी पर है। खासतौर पर GPU इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, स्टार्टअप्स और लोकल AI मॉडल्स के जरिये भारत ग्लोबल AI कंप्यूट रेस में अहम भूमिका निभाने को तैयार है। थीम का यह पिलर साफ बतात है कि भारत और ग्लोबल साउथ AI का केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बनने की ओर बढ़ रहा है।
पीएम मोदी ने पेश किया मानव विजन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने AI समिट के दौरान Manav Vision पेश किया है। "MANAV" असल में अकाउंटेबल गवर्नेंस, नेशनल सॉवरेनिटी, एक्सेसिबल एंड इन्क्लुसिव, वैलिड एंड लेजिटिमेट AI का संक्षिप्त रूप है। यह AI को नैतिक, जवाबदेह, संप्रभु, समावेशी और वैध बनाने की मंशा रखता है। यह विजन AI को सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि मानवता की भलाई के टूल के रूप में देखता है, खासकर ग्लोबल साउथ के लिए। PM मोदी ने इसे "मानवता के कल्याण के लिए AI-आधारित 21वीं सदी का महत्वपूर्ण लिंक" बताया।
