भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए साल 2026 के पहले चार महीने किसी बुरे सपने से कम नहीं रहे हैं। इस दौरान बाजार को प्रभावित करने वाले ज्यादातर फैक्टर बाहरी रहे हैं। मसलन, ट्रंप का टैरिफ हो या यूएस-ईरान का युद्ध, जियो-पॉलिटिक्स के अखाड़े में भारतीय निवेशक बेवहज पिट रहे हैं। तमाम वजहों से ज्यादातर निवेशकों के पोर्टफोलियो लहुलुहान पड़े हैं। ऐसे में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों FPI/ FII ने बिकवाली का ऐसा तांडव मचाया है कि पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक 2026 के पहले4 महीनों में ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से ₹1.8 लाख करोड़ से अधिक की पूंजी निकाल ली है। यह आंकड़ा चौंकाने वाला इसलिए है, क्योंकि मात्र 120 दिनों के भीतर हुई यह निकासी, साल 2025 में हुई कुल ₹1.6 लाख करोड़ की बिकवाली से भी कहीं अधिक है।
भारतीय बाजार छोड़ रहे विदेशी निवेशक
विदेशी निवेशकों में भगदड़ की सबसे बड़ी वजह
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस भारी निकासी के पीछे गिरता रुपया और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें सबसे बड़े विलेन बनकर उभरे हैं। फरवरी के अंत में शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष ने वैश्विक अनिश्चितता बढ़ा दी, जिसके चलते विदेशी निवेशकों ने जोखिम भरे बाजारों से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया। रुपये की वैल्यू में ऐतिहासिक गिरावट और महंगाई के डर ने निवेशकों के सेंटिमेंट को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे भारतीय बाजार से उनका मोहभंग होता दिख रहा है।
AI और सेमीकंडक्टर की रेस में पिछड़ा भारत
एक महत्वपूर्ण कारण यह भी सामने आया है कि वैश्विक निवेशक इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर सेक्टर में दांव लगाना चाहते हैं। दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों में AI क्षेत्र में निवेश के बेहतर और सस्ते विकल्प मौजूद हैं, जिसके कारण विदेशी फंड भारत के बजाय उन बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में AI निवेश के सीमित अवसरों के चलते अप्रैल के महीने में भी विदेशी निवेश की वापसी के कोई ठोस संकेत नहीं मिले हैं।
एशियाई बाजारों में भारत की स्थिति नाजुक
एशियाई और उभरते बाजारों की तुलना में भारत बिकवाली के मामले में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण कोरिया से $35.3 बिलियन की निकासी हुई है, जिसके ठीक बाद भारत $19.75 बिलियन की निकासी के साथ खड़ा है। हालांकि, इस संकट के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाजार को सहारा देने की कोशिश की है और ₹2.95 लाख करोड़ से अधिक का निवेश किया है, लेकिन FII की लगातार बिकवाली ने खुदरा निवेशकों के पोर्टफोलियो को जख्मी कर दिया है।
